डॉ.अवनीश राही की ‘मैं भूख हूँ’ ने रचा नया साहित्यिक अध्याय, साइना नेहवाल के हाथों हुआ भव्य लोकार्पण

Digital desk

वैश्विक साहित्य नवाचार सम्मान से सम्मानित हुए राही; 71 काव्य-रचनाओं वाली त्रि-आयामी युग–काव्य–संहिता गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज

साहित्य की सार्थकता तब सबसे अधिक दिखाई देती है, जब वह अपने समय की चमक से नहीं, उसकी बेचैनी से संवाद करता है। 22 अगस्त को नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय साहित्यिक शब्दोत्सव में अलीगढ़ की साहित्यिक धरती से निकली डॉ. अवनीश राही की कृति “मैं भूख हूँ : एक युग–काव्य–संहिता” (रोटी से राष्ट्र तक की वेदना) का लोकार्पण इसी अर्थ में एक महत्वपूर्ण साहित्यिक प्रसंग बनकर सामने आया। पद्म भूषण एवं विश्वप्रसिद्ध बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल ने कृति का लोकार्पण किया और इसी अवसर पर डॉ. राही को “वैश्विक साहित्य नवाचार सम्मान” से सम्मानित किया गया।
 
काइट्सक्राफ्ट प्रोडक्शंस एलएलपी के तत्वावधान में आयोजित समारोह में साइना नेहवाल ने डॉ. राही को अंगवस्त्र, प्रशस्ति-पत्र, स्मृति-चिह्न एवं शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। ‘मैं भूख हूँ’ के विश्व कीर्तिमान पर बधाई देते हुए उन्होंने इसे ऐसी साहित्यिक पहल बताया, जो पारंपरिक पुस्तक की सीमाओं से आगे बढ़कर साहित्य को पठनीय, श्रवणीय और दर्शनीय रूप में प्रस्तुत करती है। उन्होंने इसे हिन्दी साहित्य में प्रस्तुति की नई दिशा की ओर महत्वपूर्ण कदम बताया।
 
साइना नेहवाल के हाथों इस कृति का लोकार्पण केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं रहा। खेल के वैश्विक मंच पर भारत की पहचान स्थापित करने वाली एक भारतीय खिलाड़ी के हाथों उस साहित्यिक कृति का उद्घाटन हुआ, जिसकी केंद्रीय चिंता मनुष्य की बुनियादी जरूरतों से लेकर सामाजिक न्याय, सम्मान, अवसर और समानता तक फैली हुई है। एक ओर उपलब्धि का अनुशासन था, दूसरी ओर समाज की संवेदना—और दोनों एक ही मंच पर दिखाई दिए।
 
‘मैं भूख हूँ’ की केंद्रीय शक्ति उसका कथ्य है। 71 काव्य-रचनाओं वाली इस युग–काव्य–संहिता में ‘भूख’ केवल विषय नहीं, बल्कि महा-नायिका है। यह रोटी की भूख से शुरू होकर गरीबी, बेरोजगारी, शिक्षा, न्याय, सम्मान, अवसर और समानता की भूख तक जाती है। व्यक्ति की निजी पीड़ा से उठता यह प्रश्न समाज तक पहुँचता है और फिर राष्ट्र के व्यापक सरोकारों से जुड़ता है।
 
इसीलिए “रोटी से राष्ट्र तक की वेदना” केवल उपशीर्षक नहीं, बल्कि कृति की पूरी वैचारिक यात्रा का केंद्रीय सूत्र बन जाता है। यहाँ भूख केवल अभाव नहीं है—वह प्रश्न है। और जब कोई प्रश्न गीत बनता है, तो साहित्य अपने समय से संवाद करने लगता है।
 
 
prou2
 
 
 
कृति का दूसरा महत्वपूर्ण पक्ष उसका त्रि-आयामी स्वरूप है। QR कोड आधारित प्रस्तुति के माध्यम से पाठक रचनाओं को पढ़ने के साथ उन्हें सुन और देख भी सकता है। इस प्रकार मुद्रित पृष्ठ शब्द से स्वर और स्वर से दृश्य तक विस्तार पाता है। इसी अभिनव त्रि-आयामी साहित्यिक प्रस्तुति के लिए कृति को गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज कर विश्व कीर्तिमान बनाया गया है।
 
हालाँकि इस प्रयोग का महत्व केवल तकनीक में नहीं है। तकनीक यहाँ माध्यम है; केंद्र में मनुष्य और उसके प्रश्न हैं। ‘मैं भूख हूँ’ इसीलिए रिकॉर्ड से आगे जाकर साहित्यिक विमर्श का विषय बनती है।
 
डॉ. अवनीश राही की चार दशकों से अधिक की साहित्यिक यात्रा से निकली यह कृति उनके गीत-सृजन और सामाजिक सरोकारों के उस विस्तार को सामने लाती है, जिसमें गीत केवल निजी भावनाओं की अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि अपने समय की पीड़ा, विसंगतियों और प्रश्नों से संवाद का माध्यम बनता है।
 
इसी दृष्टि को डॉ. राही इन शब्दों में व्यक्त करते हैं—
 
 “जहाँ भूख है—वहाँ मैं हूँ,
और जहाँ मैं हूँ—वहाँ सुलगते प्रश्न हैं।”
 
यह पंक्ति ‘मैं भूख हूँ’ की वैचारिक कुंजी की तरह सामने आती है। भूख यहाँ आँकड़ा नहीं, अनुभव है; केवल आवश्यकता नहीं, आकांक्षा है; और अंततः एक ऐसा प्रश्न है, जो समाज से उत्तर चाहता है।
 
इस पूरी यात्रा में अलीगढ़ का स्थान भी महत्वपूर्ण है। जिस साहित्यिक और शैक्षिक भूमि से यह कृति निकली, वहीं से इसकी रचनात्मक दृष्टि विकसित हुई और अब वही आवाज राष्ट्रीय साहित्यिक मंच तक पहुँची है। इस अर्थ में ‘मैं भूख हूँ’ केवल एक रचनाकार की उपलब्धि नहीं, बल्कि अलीगढ़ की सृजन-परंपरा की भी उल्लेखनीय अभिव्यक्ति है।
 
सम्मान को अपने प्रथम गुरु एवं पिता महाकवि अमर सिंह राही को समर्पित करते हुए डॉ. अवनीश राही ने कहा—
 
⁠“मेरे लिए यह बहुत भावुक क्षण है। मुझे साहित्य का पहला सबक अपने पिता से ही मिला है। मैं अपने पिता में ही अपने जीवन का सम्पूर्ण महाग्रंथ देखता हूँ। ‘मैं भूख हूँ’ के लिए मिले इस सम्मान में उन सभी साहित्यकारों, साहित्यप्रेमियों और पाठकों का भी योगदान है, जिनसे मुझे किसी न किसी रूप में कुछ न कुछ सीखने को मिला है। यह सम्मान मेरे लिए खुशी के साथ एक बड़ी जिम्मेदारी भी है और इससे मेरी जिम्मेदारी और बढ़ गई है।”
 
 
 
समारोह में डॉ. सुरभि सचिन धनवाला, रज़ा उर रहमान, मो. बदर उज जमान और आनंद प्रकाश सहित साहित्य, कला, शिक्षा, खेल और संस्कृति जगत की अनेक प्रतिष्ठित हस्तियाँ उपस्थित रहीं।
 
22 अगस्त का यह आयोजन इसलिए भी उल्लेखनीय रहा कि एक ही मंच पर लोकार्पण, सम्मान, विश्व कीर्तिमान और साहित्य की बदलती प्रस्तुति—चारों आयाम एक साथ दिखाई दिए। लेकिन इन सबके केंद्र में अंततः एक ही शब्द था—भूख।
 
क्या साहित्य भूख की आवाज बन सकता है?
 
‘मैं भूख हूँ’ का उत्तर किसी घोषणापत्र में नहीं, बल्कि अपनी रचनात्मक संरचना में दिखाई देता है। वह भूख को पेट से आगे ले जाकर शिक्षा, न्याय, सम्मान, अवसर और समानता तक पहुँचाती है और फिर उस प्रश्न को राष्ट्र के व्यापक संदर्भ में रखती है।
 
यही इस कृति की सबसे महत्वपूर्ण यात्रा है—रोटी से राष्ट्र तक।
 
पुरस्कार, लोकार्पण और विश्व कीर्तिमान इस यात्रा के दिखाई देने वाले पड़ाव हैं; लेकिन ‘मैं भूख हूँ’ का वास्तविक केंद्र इन उपलब्धियों से आगे है। वह प्रश्न है—मनुष्य की वह कौन-सी भूख है, जिसे केवल रोटी से नहीं समझा जा सकता?
 
शायद इसी प्रश्न से इस कृति की साहित्यिक यात्रा शुरू होती है और इसी प्रश्न पर पाठक ठहरता है।
 
भूख जहाँ है, साहित्य का प्रश्न वहीं से शुरू होता है।

Recommended for You

दैनिक जागरण से जुड़ें:

देश-प्रदेश की ताज़ा ख़बरों को सबसे पहले पढ़ने के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल को फॉलो करें:

नवीनतम समाचार

गोविंदा-सुनीता ने सोशल मीडिया पर बढ़ाई दूरी, एक-दूसरे को इंस्टाग्राम से किया अनफॉलो

तलाक की खबरों के बाद रिश्ते में सुलह की चर्चाओं के बीच आया नया बदलाव, सोशल मीडिया एक्टिविटी पर फैंस...
मनोरंजन 
गोविंदा-सुनीता ने सोशल मीडिया पर बढ़ाई दूरी, एक-दूसरे को इंस्टाग्राम से किया अनफॉलो

‘डॉन 3’ को लेकर रणवीर सिंह के सामने बढ़ी मुश्किलें, पिता ने IMPPA में रखा पक्ष

45 करोड़ रुपये के कथित नुकसान के दावे पर अभिनेता की लीगल टीम ने जताई आपत्ति; IMPPA के अधिकार क्षेत्र...
मनोरंजन 
‘डॉन 3’ को लेकर रणवीर सिंह के सामने बढ़ी मुश्किलें, पिता ने IMPPA में रखा पक्ष

भारत दौरे के लिए अफगानिस्तान ने उतारी मजबूत T20 टीम, जादरान कप्तान; राशिद खान भी शामिल

तीन मैचों की सीरीज के लिए 15 सदस्यीय टीम घोषित; तारीखों में बदलाव का प्रस्ताव, BCCI के फैसले का इंतजार...
स्पोर्ट्स 
भारत दौरे के लिए अफगानिस्तान ने उतारी मजबूत T20 टीम, जादरान कप्तान; राशिद खान भी शामिल

नेशनल स्पोर्ट्स डे से पहले मोदी का बड़ा कार्यक्रम, 1,500 से ज्यादा जगहों पर युवाओं और खिलाड़ियों से संवाद

27 अगस्त को वर्चुअल कार्यक्रम में देशभर के युवा और खिलाड़ी होंगे शामिल; पीटी उषा समेत कई दिग्गज खिलाड़ियों के...
स्पोर्ट्स 
नेशनल स्पोर्ट्स डे से पहले मोदी का बड़ा कार्यक्रम, 1,500 से ज्यादा जगहों पर युवाओं और खिलाड़ियों से संवाद

बिजनेस