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अमेरिका-चीन दबाव के बीच इंडोनेशिया से रिश्ते मजबूत कर रहा चीन
Sandeep Patel
चीन ने इंडोनेशिया के साथ रक्षा और कूटनीतिक सहयोग बढ़ाया है, जबकि जकार्ता अमेरिका और बीजिंग के बीच रणनीतिक संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।
चीन ने इंडोनेशिया के साथ रक्षा, कूटनीति और आर्थिक सहयोग बढ़ाने की दिशा में कदम तेज किए हैं। वहीं, जकार्ता अमेरिका और बीजिंग दोनों के साथ रणनीतिक रिश्तों को संतुलित करने की कोशिश कर रहा है।
चीन-इंडोनेशिया संवाद तेज
चीन ने शुक्रवार को इंडोनेशिया के साथ कूटनीतिक और रक्षा सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों ने सुरक्षा, राजनीति, रक्षा और आर्थिक मुद्दों पर व्यापक बातचीत की।
चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने जकार्ता में अपने इंडोनेशियाई समकक्ष सुगियोनो से मुलाकात की। इसके बाद दोनों देशों के विदेश और रक्षा मंत्रियों के बीच नए “2+2”संवाद तंत्र के तहत बैठक हुई।
यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब दक्षिण-पूर्व एशियाई देश अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच अपनी स्वतंत्र विदेश नीति बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं।
वांग यी ने साझेदारी पर दिया जोर
करीब दो साल बाद पहली बार जकार्ता पहुंचे वांग यी ने कहा कि जटिल वैश्विक परिस्थितियों के बीच दोनों देशों का नए संवाद तंत्र के तहत मिलना महत्वपूर्ण है।
उन्होंने एकतरफावाद और वर्चस्ववादी गतिविधियों को वैश्विक सहयोग और स्थिरता के लिए चुनौती बताया। वांग ने कहा कि चीन इंडोनेशिया के साथ उच्च स्तर पर सहयोग बढ़ाना चाहता है।
बातचीत में आर्थिक संबंधों, राजनीतिक सहयोग, रक्षा साझेदारी और क्षेत्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।
बीजिंग के लिए इंडोनेशिया के साथ मजबूत संबंध दक्षिण-पूर्व एशिया में उसकी रणनीतिक पहुंच बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।
रक्षा सहयोग पर विशेष जोर
शुक्रवार की बातचीत में रक्षा सहयोग प्रमुख मुद्दों में शामिल रहा।
चीनी रक्षा मंत्री डोंग जुन के इंडोनेशिया के रक्षा मंत्रालय पहुंचने पर उन्हें सैन्य सम्मान दिया गया। डोंग ने कहा कि दोनों देशों की सेनाओं के बीच सहयोग की व्यापक संभावनाएं हैं।
उन्होंने कहा कि दोनों सैन्य बल राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने और बाहरी खतरों से निपटने की क्षमता मजबूत करने के लिए मिलकर काम कर सकते हैं।
इंडोनेशिया के रक्षा मंत्री स्जाफ्री स्जामसोएद्दीन ने कहा कि दोनों देशों के बीच सैन्य गतिविधियां बढ़ाई जाएंगी। इनमें संयुक्त सैन्य अभ्यास, अधिकारियों का आदान-प्रदान और रक्षा उद्योग में साझेदारी शामिल है।
जकार्ता साध रहा रणनीतिक संतुलन
चीन के साथ बढ़ता सहयोग इंडोनेशिया की उस नीति का हिस्सा है, जिसमें वह अमेरिका और चीन दोनों के साथ संबंध बनाए रखना चाहता है।
इंडोनेशिया लंबे समय से स्वतंत्र विदेश नीति पर जोर देता रहा है और किसी एक बड़ी शक्ति के साथ औपचारिक रूप से जुड़ने से बचता रहा है।
चीन इंडोनेशिया का एक महत्वपूर्ण आर्थिक साझेदार है, जबकि अमेरिका व्यापार, निवेश और सुरक्षा सहयोग के लिहाज से जकार्ता के लिए महत्वपूर्ण है।
इस संतुलन के जरिए इंडोनेशिया दोनों शक्तियों के साथ सहयोग करते हुए अपनी रणनीतिक स्वतंत्रता बनाए रखना चाहता है।
दक्षिण चीन सागर की चुनौती
चीन और इंडोनेशिया के बीच बढ़ता सहयोग दक्षिण चीन सागर में जारी तनाव के बीच विशेष महत्व रखता है।
चीन दक्षिण चीन सागर के बड़े हिस्से पर अपना दावा करता है, जबकि कई दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के समुद्री क्षेत्रों को लेकर अलग-अलग दावे हैं।
इंडोनेशिया खुद को दक्षिण चीन सागर के मुख्य क्षेत्रीय दावेदारों में शामिल नहीं करता, लेकिन नातुना द्वीपों के आसपास के समुद्री क्षेत्र में चीनी जहाजों की गतिविधियों को लेकर जकार्ता और बीजिंग के बीच तनाव रहा है।
ऐसे में इंडोनेशिया के लिए चीन के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाना और साथ ही अपने समुद्री हितों की रक्षा करना चुनौतीपूर्ण संतुलन है।
चीन-इंडोनेशिया नौसैनिक अभ्यास
ताजा कूटनीतिक बातचीत से कुछ दिन पहले चीन और इंडोनेशिया की नौसेनाओं ने ताइवान के पूर्व में संयुक्त सैन्य अभ्यास किया था।
इस अभ्यास ने इसलिए विशेष ध्यान आकर्षित किया क्योंकि ताइवान ने चीन के साथ सैन्य गतिविधि को लेकर आपत्ति जताई है। चीन ताइवान को अपने क्षेत्र का हिस्सा मानता है।
इंडोनेशिया की नौसेना ने स्पष्ट किया कि उसका सैन्य सहयोग केवल चीन तक सीमित नहीं है। उसने जापान और अमेरिका के साथ भी सैन्य अभ्यास किए हैं।
जकार्ता का यह रुख दिखाता है कि वह किसी एक देश के साथ रक्षा सहयोग को स्थायी रणनीतिक गठबंधन के रूप में पेश करने से बचना चाहता है।
दक्षिण-पूर्व एशिया पर नजर
चीन का इंडोनेशिया के प्रति बढ़ता कूटनीतिक और रक्षा प्रयास ऐसे समय में सामने आया है जब बीजिंग दक्षिण-पूर्व एशिया में अपनी साझेदारी मजबूत करना चाहता है।
इंडोनेशिया के लिए चीन के साथ आर्थिक और रक्षा सहयोग से निवेश, व्यापार और सैन्य आधुनिकीकरण के अवसर बढ़ सकते हैं। वहीं, अमेरिका और अन्य क्षेत्रीय देशों के साथ मजबूत संबंध बनाए रखना भी जकार्ता की प्राथमिकता है।
इंडोनेशिया के सामने मुख्य चुनौती चीन के साथ सहयोग बढ़ाने के बावजूद अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखने की है।
शुक्रवार की बातचीत इसलिए केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है। यह दिखाती है कि दक्षिण-पूर्व एशियाई देश अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच अपनी कूटनीतिक स्वतंत्रता और रणनीतिक विकल्पों को सुरक्षित रखने की कोशिश कर रहे हैं।
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