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होर्मुज स्ट्रेट में भारतीय नाविकों की नई तैनाती पर रोक, बढ़ते सुरक्षा खतरे के बीच सरकार का बड़ा फैसला
Digital Desk
ईरान-अमेरिका तनाव और लगातार हो रहे समुद्री हमलों के बाद केंद्र सरकार ने जहाजरानी कंपनियों को जारी किए सख्त निर्देश, अब तक 14 भारतीय नाविकों की मौत की खबर।
खाड़ी क्षेत्र में लगातार बिगड़ते सुरक्षा हालात और होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते हमलों के खतरे को देखते हुए भारत सरकार ने बड़ा और एहतियाती फैसला लिया है। केंद्र सरकार ने अगले आदेश तक होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरने वाले जहाजों पर भारतीय नाविकों (सीफेयरर्स) की नई तैनाती पर रोक लगा दी है। यह निर्णय भारतीय नाविकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए लिया गया है, क्योंकि हाल के महीनों में इस संवेदनशील समुद्री मार्ग पर हमलों की घटनाओं में लगातार वृद्धि हुई है।
सरकार की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार यह आदेश सभी भारतीय जहाज मालिकों, जहाज प्रबंधन कंपनियों और रिक्रूटमेंट एंड प्लेसमेंट सर्विस लाइसेंस (RPSL) एजेंसियों पर लागू होगा। इन एजेंसियों को स्पष्ट रूप से कहा गया है कि अगले आदेश तक किसी भी भारतीय नाविक को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर नई नियुक्ति न दी जाए। साथ ही सभी समुद्री कंपनियों को अरब की खाड़ी, होर्मुज स्ट्रेट और आसपास के समुद्री इलाकों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश भी दिए गए हैं।
सरकार ने समुद्री क्षेत्र से जुड़े सभी हितधारकों को नौवहन संबंधी अंतरराष्ट्रीय चेतावनियों और सुरक्षा सलाह का लगातार पालन करने को कहा है। इसके साथ ही इंटरनेशनल शिप एंड पोर्ट फैसिलिटी सिक्योरिटी (ISPS) कोड के सभी सुरक्षा मानकों को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों का मानना है कि मौजूदा हालात में किसी भी तरह की लापरवाही भारतीय नागरिकों की जान के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
यह फैसला ऐसे समय में सामने आया है जब इसी सप्ताह होर्मुज स्ट्रेट और उसके आसपास हुए हमलों में दो भारतीय नाविकों की मौत की खबर आई। वहीं उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार 28 फरवरी से अब तक इस क्षेत्र में हुए अलग-अलग हमलों में कम से कम 14 भारतीय नाविक अपनी जान गंवा चुके हैं। इन घटनाओं ने भारत सरकार की चिंता बढ़ा दी है और इसी कारण सुरक्षा के मद्देनजर यह अहम कदम उठाया गया है।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का सबसे अधिक असर खाड़ी क्षेत्र के समुद्री मार्गों पर दिखाई दे रहा है। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे व्यस्त और रणनीतिक समुद्री मार्गों में से एक है। इसी रास्ते से दुनिया के बड़े हिस्से में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति होती है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव या हमला न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा बल्कि वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को भी प्रभावित करता है।
भारतीय नाविक लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय शिपिंग उद्योग की रीढ़ माने जाते हैं। दुनिया भर के हजारों व्यापारिक जहाजों पर बड़ी संख्या में भारतीय सीफेयरर्स कार्यरत हैं। उनकी पेशेवर क्षमता और अनुभव के कारण अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियां भारतीय नाविकों को प्राथमिकता देती हैं। हालांकि मौजूदा सुरक्षा हालात को देखते हुए सरकार ने उनकी सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह आदेश केवल भारत से होने वाली नई नियुक्तियों पर लागू होगा। यदि कोई विदेशी शिपिंग कंपनी भारत के बाहर से नाविकों की भर्ती करती है, तो भारत सरकार का यह आदेश सीधे तौर पर उस पर लागू नहीं होगा। हालांकि भारतीय अधिकारियों ने सभी संबंधित एजेंसियों को सुरक्षा जोखिमों के प्रति लगातार सतर्क रहने और स्थिति पर नजर बनाए रखने की सलाह दी है। होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते खतरे का असर वैश्विक समुद्री उद्योग पर भी पड़ सकता है। कई शिपिंग कंपनियां पहले ही अपने जहाजों के रूट बदलने, अतिरिक्त सुरक्षा उपाय अपनाने और युद्ध जोखिम बीमा की समीक्षा करने जैसी प्रक्रियाएं शुरू कर चुकी हैं। यदि क्षेत्र में तनाव लंबे समय तक बना रहता है तो समुद्री परिवहन की लागत बढ़ सकती है, जिसका असर वैश्विक व्यापार और तेल की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है।
भारतीय नौवहन उद्योग से जुड़े संगठनों ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि किसी भी आर्थिक गतिविधि से अधिक महत्वपूर्ण भारतीय नागरिकों की सुरक्षा है। विशेषज्ञों के अनुसार, हालात सामान्य होने तक इस तरह की एहतियाती नीति अपनाना जरूरी है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।
इस बीच सरकार लगातार अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों और समुद्री सुरक्षा संगठनों के संपर्क में बनी हुई है। खाड़ी क्षेत्र की स्थिति पर नियमित निगरानी रखी जा रही है और सुरक्षा एजेंसियां समय-समय पर नई सलाह जारी कर रही हैं। यदि भविष्य में हालात में सुधार होता है तो सरकार स्थिति की समीक्षा कर आगे का निर्णय ले सकती है।
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होर्मुज स्ट्रेट में भारतीय नाविकों की नई तैनाती पर रोक, बढ़ते सुरक्षा खतरे के बीच सरकार का बड़ा फैसला
Digital Desk
खाड़ी क्षेत्र में लगातार बिगड़ते सुरक्षा हालात और होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते हमलों के खतरे को देखते हुए भारत सरकार ने बड़ा और एहतियाती फैसला लिया है। केंद्र सरकार ने अगले आदेश तक होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरने वाले जहाजों पर भारतीय नाविकों (सीफेयरर्स) की नई तैनाती पर रोक लगा दी है। यह निर्णय भारतीय नाविकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए लिया गया है, क्योंकि हाल के महीनों में इस संवेदनशील समुद्री मार्ग पर हमलों की घटनाओं में लगातार वृद्धि हुई है।
सरकार की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार यह आदेश सभी भारतीय जहाज मालिकों, जहाज प्रबंधन कंपनियों और रिक्रूटमेंट एंड प्लेसमेंट सर्विस लाइसेंस (RPSL) एजेंसियों पर लागू होगा। इन एजेंसियों को स्पष्ट रूप से कहा गया है कि अगले आदेश तक किसी भी भारतीय नाविक को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर नई नियुक्ति न दी जाए। साथ ही सभी समुद्री कंपनियों को अरब की खाड़ी, होर्मुज स्ट्रेट और आसपास के समुद्री इलाकों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश भी दिए गए हैं।
सरकार ने समुद्री क्षेत्र से जुड़े सभी हितधारकों को नौवहन संबंधी अंतरराष्ट्रीय चेतावनियों और सुरक्षा सलाह का लगातार पालन करने को कहा है। इसके साथ ही इंटरनेशनल शिप एंड पोर्ट फैसिलिटी सिक्योरिटी (ISPS) कोड के सभी सुरक्षा मानकों को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों का मानना है कि मौजूदा हालात में किसी भी तरह की लापरवाही भारतीय नागरिकों की जान के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
यह फैसला ऐसे समय में सामने आया है जब इसी सप्ताह होर्मुज स्ट्रेट और उसके आसपास हुए हमलों में दो भारतीय नाविकों की मौत की खबर आई। वहीं उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार 28 फरवरी से अब तक इस क्षेत्र में हुए अलग-अलग हमलों में कम से कम 14 भारतीय नाविक अपनी जान गंवा चुके हैं। इन घटनाओं ने भारत सरकार की चिंता बढ़ा दी है और इसी कारण सुरक्षा के मद्देनजर यह अहम कदम उठाया गया है।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का सबसे अधिक असर खाड़ी क्षेत्र के समुद्री मार्गों पर दिखाई दे रहा है। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे व्यस्त और रणनीतिक समुद्री मार्गों में से एक है। इसी रास्ते से दुनिया के बड़े हिस्से में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति होती है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव या हमला न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा बल्कि वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को भी प्रभावित करता है।
भारतीय नाविक लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय शिपिंग उद्योग की रीढ़ माने जाते हैं। दुनिया भर के हजारों व्यापारिक जहाजों पर बड़ी संख्या में भारतीय सीफेयरर्स कार्यरत हैं। उनकी पेशेवर क्षमता और अनुभव के कारण अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियां भारतीय नाविकों को प्राथमिकता देती हैं। हालांकि मौजूदा सुरक्षा हालात को देखते हुए सरकार ने उनकी सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह आदेश केवल भारत से होने वाली नई नियुक्तियों पर लागू होगा। यदि कोई विदेशी शिपिंग कंपनी भारत के बाहर से नाविकों की भर्ती करती है, तो भारत सरकार का यह आदेश सीधे तौर पर उस पर लागू नहीं होगा। हालांकि भारतीय अधिकारियों ने सभी संबंधित एजेंसियों को सुरक्षा जोखिमों के प्रति लगातार सतर्क रहने और स्थिति पर नजर बनाए रखने की सलाह दी है। होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते खतरे का असर वैश्विक समुद्री उद्योग पर भी पड़ सकता है। कई शिपिंग कंपनियां पहले ही अपने जहाजों के रूट बदलने, अतिरिक्त सुरक्षा उपाय अपनाने और युद्ध जोखिम बीमा की समीक्षा करने जैसी प्रक्रियाएं शुरू कर चुकी हैं। यदि क्षेत्र में तनाव लंबे समय तक बना रहता है तो समुद्री परिवहन की लागत बढ़ सकती है, जिसका असर वैश्विक व्यापार और तेल की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है।
भारतीय नौवहन उद्योग से जुड़े संगठनों ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि किसी भी आर्थिक गतिविधि से अधिक महत्वपूर्ण भारतीय नागरिकों की सुरक्षा है। विशेषज्ञों के अनुसार, हालात सामान्य होने तक इस तरह की एहतियाती नीति अपनाना जरूरी है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।
इस बीच सरकार लगातार अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों और समुद्री सुरक्षा संगठनों के संपर्क में बनी हुई है। खाड़ी क्षेत्र की स्थिति पर नियमित निगरानी रखी जा रही है और सुरक्षा एजेंसियां समय-समय पर नई सलाह जारी कर रही हैं। यदि भविष्य में हालात में सुधार होता है तो सरकार स्थिति की समीक्षा कर आगे का निर्णय ले सकती है।
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