- Hindi News
- देश विदेश
- दिल्ली दंगा केस में बड़ा फैसला, IB अधिकारी अंकित शर्मा हत्याकांड में ताहिर हुसैन समेत 5 दोषियों को उ...
दिल्ली दंगा केस में बड़ा फैसला, IB अधिकारी अंकित शर्मा हत्याकांड में ताहिर हुसैन समेत 5 दोषियों को उम्रकैद
Digital Desk
कड़कड़डूमा कोर्ट ने हत्या, दंगा और अपहरण सहित कई धाराओं में सुनाई सजा, कहा- यह घटना समाज को झकझोर देने वाली थी
दिल्ली दंगों से जुड़े चर्चित आईबी अधिकारी अंकित शर्मा हत्याकांड में शुक्रवार को बड़ा कानूनी फैसला सामने आया। दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। अदालत ने इस मामले को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि यह ऐसी घटना थी, जिसने पूरे समाज को झकझोर दिया। अदालत ने माना कि दोषियों की भूमिका हत्या, दंगा, अपहरण और सांप्रदायिक वैमनस्य फैलाने जैसे गंभीर अपराधों में साबित हुई है। इस फैसले के साथ करीब छह साल पुराने इस बहुचर्चित मामले में ट्रायल कोर्ट स्तर पर एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रक्रिया पूरी हुई।
अदालत ने जिन पांच लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई, उनमें पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन के अलावा नाजिम, काशिम, अनस और जावेद शामिल हैं। इससे पहले 13 जुलाई को अदालत ने इन सभी को दोषी ठहराया था, जबकि इसी मामले में आरोपित 11 लोगों में से छह को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया था। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि दोषियों के खिलाफ प्रस्तुत साक्ष्य और गवाहों के बयान अपराध को सिद्ध करने के लिए पर्याप्त हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि कानून के दायरे में रहते हुए अपराध की गंभीरता को देखते हुए उम्रकैद की सजा उचित है।
फैसला सुनाते समय अदालत ने अपने आदेश में कहा कि ताहिर हुसैन उस भीड़ का हिस्सा थे, जो हथियारों से लैस होकर हिंसा, आगजनी और लूटपाट की घटनाओं में शामिल हुई थी। अदालत के अनुसार, अभियोजन पक्ष यह साबित करने में सफल रहा कि हिंसक भीड़ ने आईबी अधिकारी अंकित शर्मा पर लगातार हमला किया और उनकी हत्या कर दी। अदालत ने इस घटना को न केवल एक व्यक्ति की हत्या बल्कि समाज में भय और अस्थिरता फैलाने वाला अपराध बताया।
सजा पर बहस के दौरान दिल्ली पुलिस ने अदालत से दोषियों के लिए मृत्युदंड की मांग की थी। अभियोजन पक्ष का कहना था कि अंकित शर्मा की हत्या अत्यंत क्रूर और योजनाबद्ध तरीके से की गई। पुलिस ने दलील दी कि हत्या के बाद भी उनके शरीर पर हमला जारी रखा गया, जो अपराध की गंभीरता को दर्शाता है। इसलिए यह मामला दुर्लभतम श्रेणी यानी "रेयरेस्ट ऑफ रेयर" के अंतर्गत आता है और दोषियों को फांसी की सजा दी जानी चाहिए।
दूसरी ओर बचाव पक्ष ने अदालत के सामने अलग पक्ष रखा। ताहिर हुसैन के वकील ने कहा कि हर हत्या का मामला मृत्युदंड का आधार नहीं बन सकता। उनका तर्क था कि प्रत्येक आरोपी की व्यक्तिगत भूमिका स्पष्ट रूप से अलग-अलग साबित नहीं हुई है। इसलिए इस मामले को दुर्लभतम श्रेणी में नहीं रखा जाना चाहिए। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद उम्रकैद की सजा सुनाने का निर्णय दिया।
यह मामला फरवरी 2020 में हुए दिल्ली दंगों के दौरान सामने आया था। 25 फरवरी 2020 को आईबी अधिकारी अंकित शर्मा अपने घर से निकले थे, लेकिन देर तक वापस नहीं लौटे। परिवार ने उनकी तलाश शुरू की। बाद में स्थानीय लोगों से सूचना मिली कि चांदबाग पुलिया के पास स्थित खजूरी खास नाले में एक शव पड़ा हुआ है। अगले दिन पुलिस ने नाले से अंकित शर्मा का शव बरामद किया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उनके शरीर पर कई गंभीर चोटों के निशान पाए गए। यह मामला पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया था।
अंकित शर्मा के पिता ने दयालपुर थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए तत्कालीन पार्षद ताहिर हुसैन और उनके साथियों पर हत्या का आरोप लगाया था। शिकायत में कहा गया था कि आरोपी एक स्थान पर इकट्ठा हुए थे और घटना के बाद शव को नाले में फेंक दिया गया। इसके बाद दिल्ली पुलिस की विशेष जांच टीम ने मामले की विस्तृत जांच शुरू की। जांच के दौरान कई गवाहों के बयान, फॉरेंसिक रिपोर्ट, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और अन्य दस्तावेज अदालत में प्रस्तुत किए गए।
दिल्ली दंगे 23 फरवरी 2020 को नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के समर्थन और विरोध के दौरान शुरू हुए थे। शुरुआती विवाद धीरे-धीरे हिंसक झड़पों में बदल गया। कई इलाकों में आगजनी, पथराव और हिंसा की घटनाएं हुईं। यह सिलसिला 26 फरवरी तक जारी रहा। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार इन दंगों में 53 लोगों की जान गई थी, जबकि 250 से अधिक लोग घायल हुए थे। बड़ी संख्या में दुकानें, मकान और अन्य संपत्तियां भी क्षतिग्रस्त हुई थीं।
दिल्ली दंगों से जुड़े कई मामलों की सुनवाई अब भी विभिन्न अदालतों में जारी है। अंकित शर्मा हत्याकांड उन मामलों में शामिल रहा, जिस पर पूरे देश की नजर बनी रही। इस मामले में अदालत का फैसला आने के बाद कानूनी प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण पूरा हो गया है। हालांकि दोषियों के पास उच्च न्यायालय में अपील करने का कानूनी अधिकार उपलब्ध रहेगा।
Recommended for You
-----------------
हमारे आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स से जुड़ें –
🔴 व्हाट्सएप चैनल: https://whatsapp.com/channel/0029VbATlF0KQuJB6tvUrN3V
🔴 फेसबुक: Dainik Jagran MP/CG Official
🟣 इंस्टाग्राम: @dainikjagranmp.cg
🔴 यूट्यूब: Dainik Jagran MPCG Digital
📲 सोशल मीडिया पर जुड़ें और बने जागरूक पाठक।
👉 आज ही जुड़िए
दिल्ली दंगा केस में बड़ा फैसला, IB अधिकारी अंकित शर्मा हत्याकांड में ताहिर हुसैन समेत 5 दोषियों को उम्रकैद
Digital Desk
दिल्ली दंगों से जुड़े चर्चित आईबी अधिकारी अंकित शर्मा हत्याकांड में शुक्रवार को बड़ा कानूनी फैसला सामने आया। दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। अदालत ने इस मामले को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि यह ऐसी घटना थी, जिसने पूरे समाज को झकझोर दिया। अदालत ने माना कि दोषियों की भूमिका हत्या, दंगा, अपहरण और सांप्रदायिक वैमनस्य फैलाने जैसे गंभीर अपराधों में साबित हुई है। इस फैसले के साथ करीब छह साल पुराने इस बहुचर्चित मामले में ट्रायल कोर्ट स्तर पर एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रक्रिया पूरी हुई।
अदालत ने जिन पांच लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई, उनमें पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन के अलावा नाजिम, काशिम, अनस और जावेद शामिल हैं। इससे पहले 13 जुलाई को अदालत ने इन सभी को दोषी ठहराया था, जबकि इसी मामले में आरोपित 11 लोगों में से छह को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया था। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि दोषियों के खिलाफ प्रस्तुत साक्ष्य और गवाहों के बयान अपराध को सिद्ध करने के लिए पर्याप्त हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि कानून के दायरे में रहते हुए अपराध की गंभीरता को देखते हुए उम्रकैद की सजा उचित है।
फैसला सुनाते समय अदालत ने अपने आदेश में कहा कि ताहिर हुसैन उस भीड़ का हिस्सा थे, जो हथियारों से लैस होकर हिंसा, आगजनी और लूटपाट की घटनाओं में शामिल हुई थी। अदालत के अनुसार, अभियोजन पक्ष यह साबित करने में सफल रहा कि हिंसक भीड़ ने आईबी अधिकारी अंकित शर्मा पर लगातार हमला किया और उनकी हत्या कर दी। अदालत ने इस घटना को न केवल एक व्यक्ति की हत्या बल्कि समाज में भय और अस्थिरता फैलाने वाला अपराध बताया।
सजा पर बहस के दौरान दिल्ली पुलिस ने अदालत से दोषियों के लिए मृत्युदंड की मांग की थी। अभियोजन पक्ष का कहना था कि अंकित शर्मा की हत्या अत्यंत क्रूर और योजनाबद्ध तरीके से की गई। पुलिस ने दलील दी कि हत्या के बाद भी उनके शरीर पर हमला जारी रखा गया, जो अपराध की गंभीरता को दर्शाता है। इसलिए यह मामला दुर्लभतम श्रेणी यानी "रेयरेस्ट ऑफ रेयर" के अंतर्गत आता है और दोषियों को फांसी की सजा दी जानी चाहिए।
दूसरी ओर बचाव पक्ष ने अदालत के सामने अलग पक्ष रखा। ताहिर हुसैन के वकील ने कहा कि हर हत्या का मामला मृत्युदंड का आधार नहीं बन सकता। उनका तर्क था कि प्रत्येक आरोपी की व्यक्तिगत भूमिका स्पष्ट रूप से अलग-अलग साबित नहीं हुई है। इसलिए इस मामले को दुर्लभतम श्रेणी में नहीं रखा जाना चाहिए। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद उम्रकैद की सजा सुनाने का निर्णय दिया।
यह मामला फरवरी 2020 में हुए दिल्ली दंगों के दौरान सामने आया था। 25 फरवरी 2020 को आईबी अधिकारी अंकित शर्मा अपने घर से निकले थे, लेकिन देर तक वापस नहीं लौटे। परिवार ने उनकी तलाश शुरू की। बाद में स्थानीय लोगों से सूचना मिली कि चांदबाग पुलिया के पास स्थित खजूरी खास नाले में एक शव पड़ा हुआ है। अगले दिन पुलिस ने नाले से अंकित शर्मा का शव बरामद किया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उनके शरीर पर कई गंभीर चोटों के निशान पाए गए। यह मामला पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया था।
अंकित शर्मा के पिता ने दयालपुर थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए तत्कालीन पार्षद ताहिर हुसैन और उनके साथियों पर हत्या का आरोप लगाया था। शिकायत में कहा गया था कि आरोपी एक स्थान पर इकट्ठा हुए थे और घटना के बाद शव को नाले में फेंक दिया गया। इसके बाद दिल्ली पुलिस की विशेष जांच टीम ने मामले की विस्तृत जांच शुरू की। जांच के दौरान कई गवाहों के बयान, फॉरेंसिक रिपोर्ट, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और अन्य दस्तावेज अदालत में प्रस्तुत किए गए।
दिल्ली दंगे 23 फरवरी 2020 को नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के समर्थन और विरोध के दौरान शुरू हुए थे। शुरुआती विवाद धीरे-धीरे हिंसक झड़पों में बदल गया। कई इलाकों में आगजनी, पथराव और हिंसा की घटनाएं हुईं। यह सिलसिला 26 फरवरी तक जारी रहा। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार इन दंगों में 53 लोगों की जान गई थी, जबकि 250 से अधिक लोग घायल हुए थे। बड़ी संख्या में दुकानें, मकान और अन्य संपत्तियां भी क्षतिग्रस्त हुई थीं।
दिल्ली दंगों से जुड़े कई मामलों की सुनवाई अब भी विभिन्न अदालतों में जारी है। अंकित शर्मा हत्याकांड उन मामलों में शामिल रहा, जिस पर पूरे देश की नजर बनी रही। इस मामले में अदालत का फैसला आने के बाद कानूनी प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण पूरा हो गया है। हालांकि दोषियों के पास उच्च न्यायालय में अपील करने का कानूनी अधिकार उपलब्ध रहेगा।
