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बिहार BPSC Protest: छात्रों का पुलिस से टकराव क्यों हुआ, जानें पूरी वजह
Sandeep Patel
पटना में BPSC और TRE-4 अभ्यर्थियों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस से टकराव हुआ। जानें 70वीं BPSC, TRE-4, परीक्षा पैटर्न और भर्ती में देरी को लेकर छात्रों की मांगें।
पटना में BPSC और शिक्षक भर्ती परीक्षा के अभ्यर्थियों का प्रदर्शन 25 अगस्त को उस समय तनावपूर्ण हो गया, जब छात्रों ने बैरिकेड तोड़कर मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ने की कोशिश की। पुलिस ने वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया और कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। बिहार में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों का आंदोलन मंगलवार को पटना की सड़कों पर तेज हो गया। BPSC और अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, TRE-4 के परीक्षा पैटर्न, भर्ती में देरी और 70वीं BPSC परीक्षा को लेकर उठे सवालों के बीच सैकड़ों छात्र गांधी मैदान से आगे बढ़े। डाकबंगला चौराहे के पास पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बैरिकेड लगाए थे। छात्रों के बैरिकेड पार करने के बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हुआ। पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया और कई लोगों को हिरासत में लिया।
पटना में क्या हुआ?
प्रदर्शनकारी गांधी मैदान से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के आवास और राजभवन की ओर मार्च कर रहे थे। डाकबंगला चौराहे पर पुलिस ने सुरक्षा घेरा बनाया और छात्रों को प्रतिबंधित क्षेत्र में आगे बढ़ने से रोका। स्थिति तब बिगड़ी जब कुछ प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड पार कर लिए। पुलिस ने वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया। कुछ रिपोर्टों में पुलिस पर पथराव और पुलिसकर्मियों के घायल होने की भी जानकारी दी गई है। प्रदर्शन के कारण पटना के कई प्रमुख मार्गों पर यातायात भी प्रभावित हुआ।
TRE-4 को लेकर नाराजगी
आंदोलन का एक बड़ा मुद्दा बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा-4 (TRE-4) का प्रस्तावित परीक्षा प्रारूप है। अभ्यर्थियों का एक वर्ग TRE-4 को सिंगल-स्टेज परीक्षा के रूप में कराने की मांग कर रहा है। छात्रों ने नकारात्मक अंक व्यवस्था और चयन प्रक्रिया से जुड़े अन्य मुद्दों पर भी आपत्ति जताई है। अभ्यर्थियों का कहना है कि परीक्षा प्रणाली में स्पष्टता और समान अवसर जरूरी है। उनका यह भी आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में बार-बार बदलाव से तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के सामने अनिश्चितता बढ़ती है।
70वीं BPSC पर विवाद
प्रदर्शनकारियों की दूसरी प्रमुख मांग 70वीं BPSC परीक्षा को रद्द करने की है। अभ्यर्थियों ने परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक जैसे आरोपों को लेकर सवाल उठाए हैं। हालांकि, इन आरोपों को जांच के जरिए स्थापित किया जाना बाकी है। BPSC की ओर से परीक्षा रद्द करने की मांग को स्वीकार नहीं किया गया है। इसलिए छात्रों के आरोप और आयोग का आधिकारिक पक्ष अलग-अलग हैं।
भर्ती में देरी से दबाव
बिहार में बड़ी संख्या में युवा सरकारी नौकरी की परीक्षाओं पर निर्भर हैं। ऐसे में भर्ती विज्ञापन, परीक्षा और परिणाम में देरी का सीधा असर अभ्यर्थियों की तैयारी और अवसरों पर पड़ सकता है। प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि सरकार और भर्ती एजेंसियां लंबित प्रक्रियाओं के लिए स्पष्ट समयसीमा जारी करें। उनका कहना है कि परीक्षा केवल समय पर आयोजित होना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और भरोसेमंद भी होनी चाहिए।
छात्रों की मुख्य मांगें
पटना में चल रहे आंदोलन में अलग-अलग भर्ती परीक्षाओं से जुड़े कई मुद्दे शामिल हैं। अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगों में TRE-4 को सिंगल-स्टेज परीक्षा बनाना, भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता, नकारात्मक अंकन पर पुनर्विचार, कथित परीक्षा अनियमितताओं की जांच और 70वीं BPSC परीक्षा को लेकर कार्रवाई शामिल हैं। कुछ छात्र संगठनों ने हिंदी माध्यम के अभ्यर्थियों के लिए समान अवसर और भर्ती नियमों में स्पष्टता की भी मांग उठाई है।
आंदोलन क्यों बढ़ा?
यह प्रदर्शन अचानक शुरू नहीं हुआ। अभ्यर्थी कई दिनों से पटना के गर्दनीबाग इलाके में धरना दे रहे हैं। 25 अगस्त का मार्च इसी लंबे आंदोलन का अगला चरण था। स्थिति उस समय और संवेदनशील हो गई जब छात्रों ने सीधे मुख्यमंत्री तक अपनी मांग पहुंचाने के लिए उनके आवास की ओर मार्च करने का फैसला किया। सरकार और छात्रों के बीच संवाद की मांग भी आंदोलन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई है। इसी बीच BPSC के परीक्षा नियंत्रक राजेश कुमार सिंह को प्रदर्शनकारियों पर की गई विवादित टिप्पणी के बाद राज्य सरकार ने निलंबित कर दिया।
सरकार के सामने चुनौती
बिहार सरकार के सामने अब दोहरी चुनौती है—एक तरफ परीक्षा और भर्ती से जुड़े छात्रों के सवालों का समाधान करना और दूसरी तरफ विरोध प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना। 25 अगस्त की घटना के बाद सरकार पर छात्रों के साथ सीधे संवाद करने का दबाव बढ़ा है। वहीं प्रशासन के लिए मुख्यमंत्री आवास और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना भी जरूरी है। इस आंदोलन का समाधान केवल पुलिस कार्रवाई से नहीं, बल्कि परीक्षा प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट जानकारी और विश्वसनीय संवाद से निकलने की संभावना है।
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