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महाराष्ट्र में 20 लाख स्कूली बच्चों की होगी आंखों की जांच, 1 लाख मुफ्त चश्मे बांटे जाएंगे
मुंबई, महाराष्ट्र ।
महाराष्ट्र सरकार के स्कूल शिक्षा एवं क्रीड़ा विभाग, वनसाइट एस्सिलोरलक्सोटिका फाउंडेशन और रत्ना निधि चैरिटेबल ट्रस्ट ने राज्य के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को बेहतर नेत्र देखभाल सुविधा उपलब्ध कराने के लिए त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।
इस पहल के तहत अगले तीन वर्षों में करीब 20 लाख स्कूली बच्चों की आंखों की जांच की जाएगी और जरूरतमंद विद्यार्थियों को 1 लाख निःशुल्क प्रिस्क्रिप्शन चश्मे दिए जाएंगे। यह MoU सह्याद्री स्टेट गेस्ट हाउस, मुंबई में महाराष्ट्र के स्कूल शिक्षा एवं क्रीड़ा मंत्री दादाजी भुसे, वरिष्ठ शासकीय अधिकारियों, वनसाइट एस्सिलोरलक्सोटिका फाउंडेशन के डायरेक्टर एवं एस्सिलोरलक्सोटिका में ग्रेटर इंडिया के प्रेसिडेंट वेणु अंबाती और रत्ना निधि चैरिटेबल ट्रस्ट के ट्रस्टी राजीव मेहता की मौजूदगी में हुआ।
अगस्त 2026 से जून 2029 तक चलेगा कार्यक्रम
'विज़न फॉर ऑल' स्कूल नेत्र स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत अगस्त 2026 से जून 2029 तक कक्षा 5वीं से 10वीं तक के विद्यार्थियों की जांच की जाएगी। जिला परिषद और सरकारी स्कूलों में इस अभियान को बड़े स्तर पर लागू किया जाएगा। स्कूल शिक्षा एवं क्रीड़ा विभाग शिक्षकों के प्रशिक्षण और स्कूल स्तर पर नेत्र जांच गतिविधियों का समन्वय करेगा। वहीं रत्ना निधि चैरिटेबल ट्रस्ट कार्यान्वयन भागीदार के तौर पर ऑप्टोमेट्री टीमों की तैनाती, रिफ्रैक्शन सेवाओं और चश्मा वितरण की व्यवस्था संभालेगा। वनसाइट एस्सिलोरलक्सोटिका फाउंडेशन कार्यक्रम को तकनीकी विशेषज्ञता देगा और दृष्टि संबंधी समस्या वाले विद्यार्थियों को 1 लाख मुफ्त प्रिस्क्रिप्शन चश्मे उपलब्ध कराने में सहयोग करेगा।
2019 से जारी है पहल
यह साझेदारी 2019 से चल रही पहल का विस्तार है। अब तक महाराष्ट्र के 18 जिलों के 800 स्कूलों में 6.8 लाख से अधिक बच्चों की नेत्र जांच की जा चुकी है, जबकि 63 हजार से अधिक चश्मे वितरित किए गए हैं।
दादाजी भुसे ने क्या कहा?
महाराष्ट्र के स्कूल शिक्षा एवं क्रीड़ा मंत्री दादाजी भुसे ने कहा कि अच्छी दृष्टि बच्चे की सीखने और विकास की प्रक्रिया की बुनियाद है। उन्होंने कहा कि इस साझेदारी के जरिए सरकारी स्कूलों के बच्चों को समय पर नेत्र जांच और उचित नेत्र देखभाल उपलब्ध कराने के प्रयासों को मजबूत किया जा रहा है। शुरुआती स्तर पर दृष्टि संबंधी समस्याओं की पहचान से विद्यार्थियों के शैक्षणिक प्रदर्शन और आत्मविश्वास को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
वेणु अंबाती ने जताया भरोसा
वेणु अंबाती, प्रेसिडेंट, ग्रेटर इंडिया, एस्सिलोरलक्सोटिका और डायरेक्टर, वनसाइट एस्सिलोरलक्सोटिका फाउंडेशन ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार और रत्ना निधि चैरिटेबल ट्रस्ट के साथ लंबे समय से चली आ रही साझेदारी को मजबूत करने पर उन्हें गर्व है। उन्होंने कहा कि समय रहते बच्चों की दृष्टि संबंधी समस्याओं की पहचान और उचित समाधान उपलब्ध कराना इस पहल का प्रमुख लक्ष्य है।
राजीव मेहता ने कही ये बात
रत्ना निधि चैरिटेबल ट्रस्ट के ट्रस्टी राजीव मेहता ने कहा कि बच्चों तक नेत्र देखभाल की पहुंच बेहतर बनाने के लिए महाराष्ट्र सरकार और वनसाइट एस्सिलोरलक्सोटिका फाउंडेशन के साथ साझेदारी को आगे बढ़ाते हुए ट्रस्ट को गर्व है। उन्होंने कहा कि सभी संस्थाएं मिलकर यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं कि हर बच्चे को स्पष्ट दृष्टि के साथ सीखने, आगे बढ़ने और सफल होने का अवसर मिले।
यह पहल 'ब्लाइंडनेस-फ्री महाराष्ट्र' अभियान को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। सरकारी शिक्षा तंत्र की पहुंच, रत्ना निधि चैरिटेबल ट्रस्ट की कार्यान्वयन क्षमता और वनसाइट एस्सिलोरलक्सोटिका फाउंडेशन की तकनीकी विशेषज्ञता के जरिए राज्यभर में स्कूल नेत्र स्वास्थ्य का टिकाऊ मॉडल तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।
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