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डॉलर के मुकाबले रुपया 4 पैसे फिसला, 95.74 पर पहुंचा; महंगे क्रूड और डॉलर की मांग का दबाव
Digital Desk
शुरुआती कारोबार में रुपये पर दबाव बना रहा, लेकिन RBI के हस्तक्षेप से गिरावट सीमित रही; Brent क्रूड 92 डॉलर के ऊपर कारोबार करता दिखा
भारतीय रुपया मंगलवार, 25 अगस्त 2026 को शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 4 पैसे कमजोर होकर 95.74 रुपये प्रति डॉलर पर आ गया। विदेशी मुद्रा बाजार में रुपये पर महंगे कच्चे तेल, आयातकों की डॉलर मांग और वैश्विक बाजार में जारी अनिश्चितता का असर दिखाई दिया। इंटरबैंक फॉरेक्स मार्केट में रुपया 95.74 के स्तर पर खुला। इससे पहले सोमवार को घरेलू मुद्रा 95.70 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुई थी। कारोबारियों के मुताबिक, फिलहाल USD/INR में 95.50 से 96 रुपये के दायरे में उतार-चढ़ाव बना हुआ है।
कच्चे तेल की कीमत बनी बड़ी वजह
रुपये पर सबसे बड़ा दबाव इस समय कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से है। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड महंगा होने पर देश की डॉलर मांग और आयात बिल दोनों पर असर पड़ता है। 25 अगस्त की सुबह Brent क्रूड फ्यूचर्स करीब 0.30% बढ़कर 92.45 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। ईरान को लेकर बढ़ी भू-राजनीतिक अनिश्चितता भी तेल बाजार और निवेशकों के सेंटीमेंट को प्रभावित कर रही थी।
आयातकों की डॉलर खरीद से भी दबाव
विदेशी मुद्रा कारोबारियों के अनुसार, भारतीय कंपनियों और आयातकों की ओर से डॉलर की मांग रुपये के लिए एक और चुनौती बनी हुई है। तेल कंपनियों की डॉलर जरूरत और कॉरपोरेट हेजिंग गतिविधियों के कारण रुपये में तेज मजबूती की गुंजाइश सीमित हुई है। डॉलर इंडेक्स भी 99 के आसपास बना हुआ था। ईरान को लेकर अमेरिका के नए प्रतिबंधों और वैश्विक स्तर पर बढ़ी अनिश्चितता के बीच सुरक्षित निवेश के तौर पर डॉलर की मांग में मजबूती देखी गई।
RBI की नजर 96 रुपये के स्तर पर
रुपये में बड़ी गिरावट को रोकने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक की भूमिका भी अहम बनी हुई है। रॉयटर्स के मुताबिक, मंगलवार को सरकारी बैंकों को बाजार में डॉलर की पेशकश करते देखा गया और कारोबारियों का अनुमान था कि यह RBI की ओर से किया गया हस्तक्षेप हो सकता है। लगातार हस्तक्षेप के चलते रुपये में हाल के सत्रों में उतार-चढ़ाव सीमित रहा है। कारोबारियों के मुताबिक, केंद्रीय बैंक रुपये को 96 प्रति डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर के ऊपर कमजोर होने से रोकने की कोशिश कर रहा है।
रुपये की चाल का आम लोगों पर असर
डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होने का असर केवल विदेशी मुद्रा बाजार तक सीमित नहीं रहता। कच्चा तेल, इलेक्ट्रॉनिक सामान, मशीनरी और दूसरे आयातित उत्पादों की लागत बढ़ने पर इसका असर कंपनियों की लागत और आगे चलकर उपभोक्ता कीमतों पर भी पड़ सकता है। दूसरी तरफ, कमजोर रुपया भारतीय निर्यातकों के लिए कुछ हद तक फायदेमंद हो सकता है। डॉलर में मिलने वाली कमाई को रुपये में बदलने पर उन्हें अधिक घरेलू मुद्रा प्राप्त होती है। हालांकि इसका वास्तविक फायदा अलग-अलग उद्योगों की आयात और निर्यात पर निर्भरता पर रहता है।
बाजार की नजर किन संकेतों पर?
आने वाले कारोबार में निवेशकों की नजर कच्चे तेल की कीमत, ईरान से जुड़ी भू-राजनीतिक स्थिति, डॉलर की वैश्विक चाल और RBI के हस्तक्षेप पर रहेगी। मंगलवार के शुरुआती कारोबार में भी रुपये की चाल काफी सीमित दायरे में रही और केंद्रीय बैंक की मौजूदगी ने तेज उतार-चढ़ाव को रोकने में मदद की।
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