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रूबियो बोले- फिलहाल ईरान पर नए हमले नहीं, अमेरिका ने कसे आर्थिक शिकंजा
Sandeep Patel
अमेरिका ने फिलहाल ईरान पर नए बड़े हमले रोकने की रणनीति अपनाई है। रूबियो के अनुसार वॉशिंगटन प्रतिबंध, आर्थिक दबाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर दबाव बढ़ाएगा।
अमेरिका ने फिलहाल ईरान पर नए बड़े सैन्य हमले रोकने का फैसला किया है। विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने सहयोगी देशों को कथित तौर पर बताया है कि वॉशिंगटन अब प्रतिबंधों, आर्थिक दबाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में समुद्री दबाव के जरिए तेहरान पर दबाव बढ़ाएगा।
अमेरिका फिलहाल ईरान पर नए बड़े सैन्य हमले करने की योजना को रोककर आर्थिक और समुद्री दबाव बढ़ाने की रणनीति पर आगे बढ़ रहा है। Axios की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने हाल की फोन बातचीत में कई सहयोगी देशों के विदेश मंत्रियों को वॉशिंगटन की बदली रणनीति की जानकारी दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ईरान की अर्थव्यवस्था को कमजोर करने के लिए प्रतिबंधों का दायरा बढ़ाएगा और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में समुद्री दबाव बनाए रखेगा। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि अमेरिका ने सैन्य कार्रवाई का विकल्प पूरी तरह छोड़ दिया है।
ईरान पर नए हमले फिलहाल रुके
Axios के अनुसार, ट्रंप प्रशासन फिलहाल ईरान के खिलाफ नए बड़े सैन्य हमले की तैयारी नहीं कर रहा है। यह बदलाव अमेरिकी रणनीति में महत्वपूर्ण परिवर्तन का संकेत है। वॉशिंगटन अब तत्काल बड़े हवाई हमलों के बजाय आर्थिक प्रतिबंध, वित्तीय दबाव और समुद्री नियंत्रण पर अधिक जोर दे रहा है। हालांकि, सैन्य विकल्प अभी भी खुला रखा गया है। रिपोर्ट के अनुसार रूबियो ने सहयोगी देशों से कहा है कि यदि ईरान पहले हमला करता है तो अमेरिका सैन्य जवाब देने के लिए तैयार रहेगा। इससे संकेत मिलता है कि अमेरिका फिलहाल सैन्य कार्रवाई को रोककर आर्थिक दबाव को प्राथमिक हथियार बनाना चाहता है।
आर्थिक शिकंजा होगा मुख्य हथियार
अमेरिकी रणनीति का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट पहले ही ईरान की वित्तीय और तेल आय से जुड़े नेटवर्क पर व्यापक प्रतिबंध अभियान चला रहे हैं। ट्रंप प्रशासन ने इस रणनीति को ईरानी शासन का “आर्थिक दम घोंटने” वाला अभियान बताया है। इसका उद्देश्य ईरान की विदेशी मुद्रा, तेल से होने वाली आय और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय नेटवर्क तक पहुंच को सीमित करना है। वॉशिंगटन का मानना है कि आर्थिक दबाव बढ़ाकर ईरान की सैन्य और क्षेत्रीय गतिविधियों के लिए उपलब्ध वित्तीय संसाधनों को कम किया जा सकता है।
दूसरे देशों पर भी प्रतिबंध
अमेरिका केवल ईरानी कंपनियों को निशाना नहीं बना रहा है। उसकी रणनीति में द्वितीयक प्रतिबंध भी शामिल हैं। इन प्रतिबंधों के तहत ईरान के साथ कारोबार जारी रखने वाली विदेशी कंपनियों, वित्तीय संस्थानों और अन्य संस्थाओं पर भी कार्रवाई का खतरा रहेगा। इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को तेहरान के साथ व्यापारिक और वित्तीय संबंध बनाए रखने से हतोत्साहित करना है। यदि यह नीति लंबे समय तक जारी रहती है तो ईरान के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों और वित्तीय संस्थानों तक पहुंच और मुश्किल हो सकती है।
होर्मुज पर अमेरिका की नजर
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अमेरिकी रणनीति का दूसरा महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है। यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल और गैस इसी क्षेत्र से होकर गुजरता है। Axios की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि अमेरिकी नौसेना की समुद्री बारूदी सुरंग हटाने की कार्रवाई से होर्मुज के दक्षिणी हिस्से में वाणिज्यिक टैंकरों की आवाजाही बहाल करने में मदद मिली है। अमेरिका का आकलन है कि इससे ईरान की वैश्विक तेल और ऊर्जा आपूर्ति को बाधित करने की क्षमता कम हुई है।
ईरान-ओमान समझौते से नया समीकरण
अमेरिकी रणनीति ऐसे समय सामने आई है जब ईरान और ओमान ने होर्मुज क्षेत्र में एक अस्थायी समुद्री मार्ग बनाने पर सहमति जताई है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह दोबारा खोलने के बराबर नहीं है। प्रस्तावित मार्ग का इस्तेमाल वाणिज्यिक जहाजों के लिए किया जाना है, जबकि सैन्य जहाजों को लेकर प्रतिबंध जारी रहने की बात ईरान ने कही है। यदि यह व्यवस्था प्रभावी होती है तो वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर तत्काल चिंता कुछ कम हो सकती है। हालांकि, क्षेत्र की सैन्य स्थिति अब भी अस्थिर बनी हुई है।
सैन्य विकल्प अभी खुला
नए हमलों को फिलहाल रोकने के बावजूद अमेरिका ने सैन्य विकल्प खत्म नहीं किया है। रिपोर्ट के अनुसार, रूबियो ने सहयोगी देशों को संकेत दिया है कि ईरान की ओर से अमेरिकी सैनिकों या ठिकानों पर हमला होने की स्थिति में वॉशिंगटन सैन्य जवाब दे सकता है। इसका अर्थ है कि अमेरिका की मौजूदा रणनीति आर्थिक दबाव और सैन्य प्रतिरोध दोनों को साथ लेकर चल रही है। वॉशिंगटन तत्काल बड़े अभियान से बचते हुए प्रतिबंधों के असर को देखने और ईरान की प्रतिक्रिया का आकलन करने का प्रयास कर रहा है।
दबाव कई महीने चल सकता है
Axios द्वारा उद्धृत एक अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, मौजूदा रणनीति अमेरिका के मध्यावधि चुनावों के बाद तक जारी रह सकती है। इस दौरान अमेरिका कम स्तर का सैन्य दबाव बनाए रखते हुए ईरान के खिलाफ प्रतिबंधों को और कड़ा कर सकता है। इसके बाद प्रशासन स्थिति की समीक्षा कर यह तय कर सकता है कि व्यापक सैन्य कार्रवाई की जरूरत है या नहीं। इस रणनीति से वॉशिंगटन को ईरान पर दबाव बनाए रखने के साथ तत्काल बड़े युद्ध में जाने से बचने का अवसर मिल सकता है।
राजनयिक मौजूदगी भी बढ़ी
आर्थिक और सैन्य दबाव के साथ अमेरिका ने पश्चिम एशिया में अपनी राजनयिक मौजूदगी बहाल करने की प्रक्रिया भी शुरू की है। इससे संकेत मिलता है कि वॉशिंगटन सैन्य और आर्थिक दबाव के साथ कूटनीतिक रास्ते भी खुले रखना चाहता है।भविष्य में प्रतिबंधों, समुद्री सुरक्षा, ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय तनाव जैसे मुद्दों पर बातचीत की जरूरत पड़ सकती है। कूटनीतिक चैनल ऐसे समय में महत्वपूर्ण हो सकते हैं जब दोनों देशों के बीच तनाव लगातार ऊंचा बना हुआ है।
आगे क्या होगा
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या अमेरिका बड़े सैन्य हमलों के बिना ईरान पर दबाव बनाए रखने में सफल होता है। वॉशिंगटन के प्रतिबंध अभियान में ईरान के साथ कारोबार करने वाली विदेशी कंपनियों और वित्तीय संस्थानों पर भी दबाव बढ़ सकता है।
साथ ही, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास अमेरिकी नौसैनिक गतिविधियां जारी रहने की संभावना है। इस क्षेत्र में किसी भी नए हमले या जहाजों की आवाजाही में बड़े व्यवधान से वैश्विक तेल बाजार प्रभावित हो सकता है। ईरान की प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी। यदि तेहरान अमेरिकी बलों या क्षेत्र में अमेरिकी हितों पर हमला करता है, तो मौजूदा रणनीति तेजी से बदल सकती है।
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