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महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न केस में बृजभूषण सिंह बरी, दिल्ली कोर्ट का बड़ा फैसला
Digital Desk
राउज एवेन्यू कोर्ट का बड़ा फैसला, सह-आरोपी विनोद तोमर भी दोषमुक्त; 2023 के चर्चित पहलवान आंदोलन से जुड़ा था मामला
महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों से जुड़े चर्चित मामले में पूर्व भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट से बड़ी कानूनी राहत मिली है। सोमवार को अदालत ने मामले में फैसला सुनाते हुए बृजभूषण शरण सिंह और सह-आरोपी विनोद तोमर को आरोपों से बरी कर दिया। अदालत ने दोनों के खिलाफ लगाए गए आरोपों में पर्याप्त आधार नहीं मिलने पर उन्हें दोषमुक्त घोषित किया। यह मामला पिछले कुछ वर्षों से देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ था। अदालत ने दोनों पक्षों की अंतिम दलीलें सुनने के बाद 2 जुलाई को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे अब 3 अगस्त को सुनाया गया।
लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद आया फैसला
इस मामले की सुनवाई कई चरणों में हुई। जांच, दस्तावेजों और दोनों पक्षों की दलीलों के बाद अदालत ने अपना निर्णय सुनाया। फैसले के साथ ही लंबे समय से चल रही न्यायिक प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण अध्याय समाप्त हो गया। अदालत ने अपने आदेश में बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर को आरोपों से मुक्त कर दिया। इस फैसले के बाद दोनों को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अदालत के निर्णय के बाद बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि जिस दिन उन पर आरोप लगाए गए थे, उसी दिन उन्होंने कहा था कि यदि आरोप सिद्ध हो जाएं तो वह किसी भी सजा का सामना करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने अदालत के फैसले का सम्मान करते हुए कहा कि न्यायिक प्रक्रिया पर उन्हें पूरा विश्वास था और अब अदालत ने उन्हें सम्मानपूर्वक बरी किया है। उन्होंने कहा कि अदालत के निर्णय के बाद उनके मन में संतोष है और वह न्यायपालिका के फैसले का सम्मान करते हैं।
फैसले के बाद बृजभूषण शरण सिंह के निवास पर समर्थकों में खुशी का माहौल देखने को मिला। कई समर्थकों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी जाहिर की। अदालत के निर्णय के बाद लोगों ने उन्हें बधाई भी दी। सहयोगियों ने भी इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था और अदालत का निर्णय उसी विश्वास को मजबूत करता है।
क्या था पूरा मामला
यह मामला महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों से जुड़ा था। इन आरोपों के बाद दिल्ली पुलिस ने शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज की थी। इसके बाद पूरे मामले की जांच की गई और संबंधित पक्षों के बयान दर्ज किए गए। जांच पूरी होने के बाद दिल्ली पुलिस ने विस्तृत चार्जशीट अदालत में प्रस्तुत की थी। इसके बाद अदालत में नियमित सुनवाई शुरू हुई, जिसमें सभी पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने वर्ष 2024 में कुछ आरोपों के संबंध में आदेश जारी किए थे। वहीं एक शिकायत में बृजभूषण शरण सिंह को पहले ही राहत मिल चुकी थी। इसके बाद अन्य आरोपों पर सुनवाई जारी रही। अंतिम बहस पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा और अब अपना अंतिम निर्णय सुनाया।
इस चर्चित मामले में अदालत का फैसला न्यायिक प्रक्रिया का अहम पड़ाव माना जा रहा है। लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और प्रस्तुत तथ्यों के आधार पर अपना निर्णय दिया।
यह मामला भारतीय कुश्ती जगत में लंबे समय तक चर्चा का विषय बना रहा। जांच और सुनवाई के दौरान कई बार इस मामले से जुड़ी सुनवाई पर देशभर की नजरें रहीं। अब अदालत का फैसला आने के बाद इस मामले के कानूनी पक्ष पर स्पष्टता आ गई है। हालांकि, यदि किसी पक्ष को अदालत के निर्णय पर आपत्ति होती है तो भारतीय कानून के तहत उच्च न्यायालय में अपील करने का अधिकार उपलब्ध रहता है।
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महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न केस में बृजभूषण सिंह बरी, दिल्ली कोर्ट का बड़ा फैसला
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महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों से जुड़े चर्चित मामले में पूर्व भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट से बड़ी कानूनी राहत मिली है। सोमवार को अदालत ने मामले में फैसला सुनाते हुए बृजभूषण शरण सिंह और सह-आरोपी विनोद तोमर को आरोपों से बरी कर दिया। अदालत ने दोनों के खिलाफ लगाए गए आरोपों में पर्याप्त आधार नहीं मिलने पर उन्हें दोषमुक्त घोषित किया। यह मामला पिछले कुछ वर्षों से देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ था। अदालत ने दोनों पक्षों की अंतिम दलीलें सुनने के बाद 2 जुलाई को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे अब 3 अगस्त को सुनाया गया।
लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद आया फैसला
इस मामले की सुनवाई कई चरणों में हुई। जांच, दस्तावेजों और दोनों पक्षों की दलीलों के बाद अदालत ने अपना निर्णय सुनाया। फैसले के साथ ही लंबे समय से चल रही न्यायिक प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण अध्याय समाप्त हो गया। अदालत ने अपने आदेश में बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर को आरोपों से मुक्त कर दिया। इस फैसले के बाद दोनों को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अदालत के निर्णय के बाद बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि जिस दिन उन पर आरोप लगाए गए थे, उसी दिन उन्होंने कहा था कि यदि आरोप सिद्ध हो जाएं तो वह किसी भी सजा का सामना करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने अदालत के फैसले का सम्मान करते हुए कहा कि न्यायिक प्रक्रिया पर उन्हें पूरा विश्वास था और अब अदालत ने उन्हें सम्मानपूर्वक बरी किया है। उन्होंने कहा कि अदालत के निर्णय के बाद उनके मन में संतोष है और वह न्यायपालिका के फैसले का सम्मान करते हैं।
फैसले के बाद बृजभूषण शरण सिंह के निवास पर समर्थकों में खुशी का माहौल देखने को मिला। कई समर्थकों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी जाहिर की। अदालत के निर्णय के बाद लोगों ने उन्हें बधाई भी दी। सहयोगियों ने भी इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था और अदालत का निर्णय उसी विश्वास को मजबूत करता है।
क्या था पूरा मामला
यह मामला महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों से जुड़ा था। इन आरोपों के बाद दिल्ली पुलिस ने शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज की थी। इसके बाद पूरे मामले की जांच की गई और संबंधित पक्षों के बयान दर्ज किए गए। जांच पूरी होने के बाद दिल्ली पुलिस ने विस्तृत चार्जशीट अदालत में प्रस्तुत की थी। इसके बाद अदालत में नियमित सुनवाई शुरू हुई, जिसमें सभी पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने वर्ष 2024 में कुछ आरोपों के संबंध में आदेश जारी किए थे। वहीं एक शिकायत में बृजभूषण शरण सिंह को पहले ही राहत मिल चुकी थी। इसके बाद अन्य आरोपों पर सुनवाई जारी रही। अंतिम बहस पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा और अब अपना अंतिम निर्णय सुनाया।
इस चर्चित मामले में अदालत का फैसला न्यायिक प्रक्रिया का अहम पड़ाव माना जा रहा है। लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और प्रस्तुत तथ्यों के आधार पर अपना निर्णय दिया।
यह मामला भारतीय कुश्ती जगत में लंबे समय तक चर्चा का विषय बना रहा। जांच और सुनवाई के दौरान कई बार इस मामले से जुड़ी सुनवाई पर देशभर की नजरें रहीं। अब अदालत का फैसला आने के बाद इस मामले के कानूनी पक्ष पर स्पष्टता आ गई है। हालांकि, यदि किसी पक्ष को अदालत के निर्णय पर आपत्ति होती है तो भारतीय कानून के तहत उच्च न्यायालय में अपील करने का अधिकार उपलब्ध रहता है।
