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अमेरिका-ईरान के बीच आज होगी बड़ी वार्ता, हॉर्मुज और परमाणु मुद्दे पर टिकी दुनिया की नजर
Digital Desk
हॉर्मुज जलडमरूमध्य खोलने और परमाणु मुद्दे पर कूटनीतिक प्रयास तेज, ओमान की मध्यस्थता से समाधान की उम्मीद
भारत समेत पूरी दुनिया की निगाहें आज अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली अहम बातचीत पर टिकी हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि सोमवार को दोनों देशों के बीच वार्ता होगी, हालांकि उन्होंने किसी समझौते के लिए कोई समयसीमा तय करने से इनकार किया है। यह बातचीत ऐसे समय हो रही है, जब हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर तनाव और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर लंबे समय से जारी गतिरोध वैश्विक चिंता का विषय बना हुआ है।
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि वह किसी तय समय सीमा के दबाव में नहीं हैं, लेकिन उम्मीद है कि बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ेगी। उन्होंने इससे पहले यह भी कहा था कि संभावित सैन्य कार्रवाई को फिलहाल रोक दिया गया है, ताकि कूटनीतिक समाधान की संभावनाओं को पूरा अवसर मिल सके। उनके अनुसार कई पश्चिम एशियाई देशों ने भी बातचीत को सफल बनाने के लिए समय देने का अनुरोध किया था।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कहा था कि यदि समझौता होता है तो हॉर्मुज जलडमरूमध्य को तुरंत और पूरी तरह से खोलने का रास्ता साफ हो सकता है। साथ ही ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर लंबे समय से चली आ रही चिंताओं का भी समाधान निकल सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान को जल्द निर्णय लेना होगा।
दूसरी ओर ईरान भी लगातार कूटनीतिक स्तर पर सक्रिय दिखाई दे रहा है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने हाल के दिनों में कई महत्वपूर्ण नेताओं से बातचीत की है। उन्होंने सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान और पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर से भी फोन पर चर्चा कर क्षेत्रीय हालात और कूटनीतिक प्रयासों पर विचार-विमर्श किया।
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए के अनुसार, हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान और ओमान के बीच चल रही बातचीत अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। ओमान लंबे समय से क्षेत्रीय विवादों में मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है और इस बार भी वही दोनों पक्षों के बीच संवाद स्थापित करने में अहम भूमिका निभा रहा है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक माना जाता है। वैश्विक स्तर पर तेल और प्राकृतिक गैस की बड़ी मात्रा इसी रास्ते से होकर गुजरती है। यदि यहां किसी तरह का अवरोध पैदा होता है तो उसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है। यही वजह है कि इस क्षेत्र में किसी भी तरह का तनाव पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर प्रभाव डालता है।
यदि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत सफल रहती है तो इससे केवल दोनों देशों के रिश्तों में सुधार की संभावना नहीं बढ़ेगी, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया में स्थिरता आने की उम्मीद भी मजबूत होगी। इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार को राहत मिल सकती है और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा।
ईरान का परमाणु कार्यक्रम लंबे समय से अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ विवाद का कारण रहा है। अमेरिका लगातार यह चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर अंतरराष्ट्रीय निगरानी स्वीकार करे और ऐसे कदम उठाए जिससे परमाणु हथियार विकसित करने की आशंकाएं समाप्त हों। वहीं ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और वह अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन कर रहा है।
पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच कई दौर की बातचीत हुई, लेकिन कोई स्थायी समाधान सामने नहीं आ सका। कई बार तनाव इतना बढ़ गया कि सैन्य कार्रवाई की आशंका भी पैदा हुई। हालांकि हाल के घटनाक्रम यह संकेत दे रहे हैं कि दोनों पक्ष फिलहाल बातचीत के माध्यम से समाधान तलाशने की कोशिश कर रहे हैं।
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अमेरिका-ईरान के बीच आज होगी बड़ी वार्ता, हॉर्मुज और परमाणु मुद्दे पर टिकी दुनिया की नजर
Digital Desk
भारत समेत पूरी दुनिया की निगाहें आज अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली अहम बातचीत पर टिकी हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि सोमवार को दोनों देशों के बीच वार्ता होगी, हालांकि उन्होंने किसी समझौते के लिए कोई समयसीमा तय करने से इनकार किया है। यह बातचीत ऐसे समय हो रही है, जब हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर तनाव और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर लंबे समय से जारी गतिरोध वैश्विक चिंता का विषय बना हुआ है।
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि वह किसी तय समय सीमा के दबाव में नहीं हैं, लेकिन उम्मीद है कि बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ेगी। उन्होंने इससे पहले यह भी कहा था कि संभावित सैन्य कार्रवाई को फिलहाल रोक दिया गया है, ताकि कूटनीतिक समाधान की संभावनाओं को पूरा अवसर मिल सके। उनके अनुसार कई पश्चिम एशियाई देशों ने भी बातचीत को सफल बनाने के लिए समय देने का अनुरोध किया था।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कहा था कि यदि समझौता होता है तो हॉर्मुज जलडमरूमध्य को तुरंत और पूरी तरह से खोलने का रास्ता साफ हो सकता है। साथ ही ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर लंबे समय से चली आ रही चिंताओं का भी समाधान निकल सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान को जल्द निर्णय लेना होगा।
दूसरी ओर ईरान भी लगातार कूटनीतिक स्तर पर सक्रिय दिखाई दे रहा है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने हाल के दिनों में कई महत्वपूर्ण नेताओं से बातचीत की है। उन्होंने सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान और पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर से भी फोन पर चर्चा कर क्षेत्रीय हालात और कूटनीतिक प्रयासों पर विचार-विमर्श किया।
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए के अनुसार, हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान और ओमान के बीच चल रही बातचीत अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। ओमान लंबे समय से क्षेत्रीय विवादों में मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है और इस बार भी वही दोनों पक्षों के बीच संवाद स्थापित करने में अहम भूमिका निभा रहा है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक माना जाता है। वैश्विक स्तर पर तेल और प्राकृतिक गैस की बड़ी मात्रा इसी रास्ते से होकर गुजरती है। यदि यहां किसी तरह का अवरोध पैदा होता है तो उसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है। यही वजह है कि इस क्षेत्र में किसी भी तरह का तनाव पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर प्रभाव डालता है।
यदि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत सफल रहती है तो इससे केवल दोनों देशों के रिश्तों में सुधार की संभावना नहीं बढ़ेगी, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया में स्थिरता आने की उम्मीद भी मजबूत होगी। इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार को राहत मिल सकती है और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा।
ईरान का परमाणु कार्यक्रम लंबे समय से अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ विवाद का कारण रहा है। अमेरिका लगातार यह चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर अंतरराष्ट्रीय निगरानी स्वीकार करे और ऐसे कदम उठाए जिससे परमाणु हथियार विकसित करने की आशंकाएं समाप्त हों। वहीं ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और वह अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन कर रहा है।
पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच कई दौर की बातचीत हुई, लेकिन कोई स्थायी समाधान सामने नहीं आ सका। कई बार तनाव इतना बढ़ गया कि सैन्य कार्रवाई की आशंका भी पैदा हुई। हालांकि हाल के घटनाक्रम यह संकेत दे रहे हैं कि दोनों पक्ष फिलहाल बातचीत के माध्यम से समाधान तलाशने की कोशिश कर रहे हैं।
