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सावन के प्रथम सोमवार पर उमड़ा आस्था का महासागर, हजारों श्रद्धालुओं ने लिए स्वामी कैलाशानंद गिरी जी महाराज के दर्शन, लाखों ने यूट्यूब पर देखी दिव्य साधना
Digital Desk
सावन के प्रथम सोमवार पर शिवभक्ति अपने चरम पर दिखाई दी। एक ओर देशभर के शिवालयों और ज्योतिर्लिंगों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी, वहीं दक्षिण काली मंदिर में परम पूज्य आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी जी महाराज के दर्शन और आशीर्वाद के लिए हजारों श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा।
मंदिर परिसर सुबह से देर रात तक "हर-हर महादेव" और "बम-बम भोले" के जयघोष से गुंजायमान रहा।
देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों से भी लाखों श्रद्धालु यूट्यूब के माध्यम से लाइव जुड़े और स्वामी कैलाशानंद गिरी जी महाराज की कठोर साधना, दिव्य रुद्राभिषेक और विश्व कल्याण की प्रार्थना के साक्षी बने। ऑनलाइन माध्यम से जुड़े भक्तों ने इसे जीवन का दुर्लभ आध्यात्मिक अनुभव बताया।
श्रद्धालुओं का कहना था कि गुरुदेव की तपस्या, अनुशासन और भगवान शिव के प्रति अनन्य समर्पण ने सावन के प्रथम सोमवार को एक ऐतिहासिक आध्यात्मिक पर्व में बदल दिया। मंदिर में दर्शन करने पहुंचे भक्तों ने इसे "अद्भुत, अलौकिक और अकल्पनीय" बताते हुए कहा कि ऐसी दिव्य अनुभूति शब्दों में व्यक्त करना संभव नहीं है।
सावन मास के दौरान प्रतिदिन होने वाले रुद्राभिषेक और शिव आराधना में देश-दुनिया के अधिक से अधिक श्रद्धालुओं के जुड़ने की अपेक्षा व्यक्त की जा रही है। प्रथम सोमवार की यह अभूतपूर्व आस्था इस बात का प्रमाण रही कि भगवान शिव के प्रति श्रद्धा और सनातन संस्कृति की चेतना निरंतर नई ऊंचाइयों को प्राप्त कर रही है।
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सावन के प्रथम सोमवार पर उमड़ा आस्था का महासागर, हजारों श्रद्धालुओं ने लिए स्वामी कैलाशानंद गिरी जी महाराज के दर्शन, लाखों ने यूट्यूब पर देखी दिव्य साधना
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मंदिर परिसर सुबह से देर रात तक "हर-हर महादेव" और "बम-बम भोले" के जयघोष से गुंजायमान रहा।
देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों से भी लाखों श्रद्धालु यूट्यूब के माध्यम से लाइव जुड़े और स्वामी कैलाशानंद गिरी जी महाराज की कठोर साधना, दिव्य रुद्राभिषेक और विश्व कल्याण की प्रार्थना के साक्षी बने। ऑनलाइन माध्यम से जुड़े भक्तों ने इसे जीवन का दुर्लभ आध्यात्मिक अनुभव बताया।
श्रद्धालुओं का कहना था कि गुरुदेव की तपस्या, अनुशासन और भगवान शिव के प्रति अनन्य समर्पण ने सावन के प्रथम सोमवार को एक ऐतिहासिक आध्यात्मिक पर्व में बदल दिया। मंदिर में दर्शन करने पहुंचे भक्तों ने इसे "अद्भुत, अलौकिक और अकल्पनीय" बताते हुए कहा कि ऐसी दिव्य अनुभूति शब्दों में व्यक्त करना संभव नहीं है।
सावन मास के दौरान प्रतिदिन होने वाले रुद्राभिषेक और शिव आराधना में देश-दुनिया के अधिक से अधिक श्रद्धालुओं के जुड़ने की अपेक्षा व्यक्त की जा रही है। प्रथम सोमवार की यह अभूतपूर्व आस्था इस बात का प्रमाण रही कि भगवान शिव के प्रति श्रद्धा और सनातन संस्कृति की चेतना निरंतर नई ऊंचाइयों को प्राप्त कर रही है।
