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केंद्र सरकार ने सोनम वांगचुक पर लगा NSA हटाया, सुप्रीम कोर्ट सुनवाई से पहले बड़ा फैसला
नेशनल न्यूज
170 दिन से जोधपुर जेल में बंद लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता की रिहाई का रास्ता साफ, सरकार ने कहा—संवाद और शांति का माहौल बनाने के लिए उठाया कदम
केंद्र सरकार ने लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता और इंजीनियर Sonam Wangchuk पर लगाया गया राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) हटाने का फैसला किया है। गृह मंत्रालय ने शनिवार को जारी आदेश में कहा कि यह निर्णय तुरंत प्रभाव से लागू होगा। इसके साथ ही लगभग 170 दिनों से जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद वांगचुक की रिहाई का रास्ता साफ हो गया है।
सरकार का यह फैसला उस समय आया है जब उनकी याचिका पर Supreme Court of India में 17 मार्च को अंतिम सुनवाई निर्धारित है। अदालत में उन वीडियो और फोटो को प्रस्तुत किया जाना था, जिनके आधार पर सितंबर 2025 में उन पर National Security Act के तहत कार्रवाई की गई थी।
जोधपुर सेंट्रल जेल के अधीक्षक प्रदीप लखावत ने बताया कि फिलहाल उन्हें इस संबंध में आधिकारिक आदेश प्राप्त नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि मीडिया के माध्यम से जानकारी मिली है और जैसे ही आदेश प्राप्त होगा, जेल नियमों के अनुसार आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
दरअसल, सितंबर 2025 में लद्दाख में चल रहे आंदोलन के दौरान वांगचुक 21 दिनों के अनशन पर बैठे थे। 24 सितंबर को लेह में हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद 26 सितंबर को उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत हिरासत में लिया गया और बाद में जोधपुर जेल स्थानांतरित कर दिया गया। सरकार का आरोप था कि आंदोलन के दौरान हुई हिंसा को भड़काने में उनकी भूमिका थी। उस घटना में चार लोगों की मौत हुई थी और लगभग 90 लोग घायल हुए थे।
राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत सरकार को ऐसे व्यक्तियों को हिरासत में लेने का अधिकार होता है जिनसे देश की सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था को खतरा माना जाता है। इस कानून के तहत किसी व्यक्ति को अधिकतम 12 महीने तक नजरबंद रखा जा सकता है।
केंद्र सरकार ने अपने बयान में कहा कि वांगचुक पर से NSA हटाने का निर्णय लद्दाख में शांति, स्थिरता और संवाद का माहौल बनाने के उद्देश्य से लिया गया है। सरकार के अनुसार, क्षेत्र के विभिन्न समुदायों और संगठनों के साथ लगातार बातचीत जारी है। लंबे समय से चल रहे विरोध और हड़तालों का असर छात्रों, व्यापार, पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा था।
हाल ही में केंद्रीय राज्य मंत्री Nityanand Rai की अध्यक्षता में एक हाई-पावर्ड कमेटी की बैठक भी हुई थी, जिसमें लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस के प्रतिनिधियों ने वांगचुक की रिहाई की मांग दोहराई थी।
सोनम वांगचुक लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने और क्षेत्र के संवैधानिक अधिकारों को मजबूत करने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे थे। लद्दाख के लेह जिले में जन्मे वांगचुक एक प्रसिद्ध शिक्षा सुधारक भी हैं। उन्होंने 1988 में स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख (SECMOL) की स्थापना की थी, जिसका उद्देश्य क्षेत्र के सरकारी स्कूलों में शिक्षा सुधार लाना है।
सरकार के इस फैसले के बाद अब नजरें सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई और वांगचुक की संभावित रिहाई पर टिकी हुई हैं, जो लद्दाख के राजनीतिक माहौल को प्रभावित कर सकती है।
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