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UPI पर भविष्य में लग सकता है शुल्क, लोकसभा से बिल पास; फिलहाल लेनदेन रहेगा मुफ्त
Digital Desk
सरकार को डिजिटल भुगतान के कुछ माध्यमों पर शुल्क लागू करने का अधिकार, अभी UPI यूजर्स के लिए किसी तरह का चार्ज नहीं
देश में डिजिटल भुगतान करने वाले करोड़ों लोगों के लिए अहम खबर सामने आई है। लोकसभा ने कराधान एवं अन्य कानून (संशोधन) विधेयक-2026 को मंजूरी दे दी है। इस संशोधन के बाद केंद्र सरकार को भविष्य में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) सहित कुछ डिजिटल भुगतान माध्यमों पर शुल्क लागू करने का कानूनी अधिकार मिल जाएगा। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस फैसले का मतलब यह नहीं है कि अभी से UPI ट्रांजैक्शन पर कोई शुल्क लगने जा रहा है। मौजूदा व्यवस्था के तहत उपभोक्ता पहले की तरह बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के UPI के जरिए भुगतान कर सकेंगे।
नए संशोधन के जरिए सरकार ने ऐसा कानूनी ढांचा तैयार किया है, जिसके तहत जरूरत पड़ने पर भविष्य में कुछ इलेक्ट्रॉनिक भुगतान प्रणालियों पर शुल्क लगाने की अधिसूचना जारी की जा सकेगी। यानी फिलहाल किसी भी डिजिटल भुगतान पर नई फीस लागू नहीं हुई है। यदि आगे चलकर सरकार किसी विशेष भुगतान प्रणाली पर शुल्क लगाने का निर्णय लेती है, तो उसके लिए अलग से अधिसूचना जारी करनी होगी। उसी में यह तय होगा कि शुल्क किस तरह के लेनदेन पर लागू होगा, कितना होगा और किसे उसका भुगतान करना होगा।
यह संशोधन पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 के कुछ प्रावधानों में बदलाव के बाद संभव हुआ है। पहले कानून में ऐसी व्यवस्था थी, जिसके कारण कुछ निर्धारित इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों पर बैंक और भुगतान सेवा प्रदाता मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) नहीं लगा सकते थे। संशोधित कानून के बाद सरकार के पास यह अधिकार होगा कि वह आवश्यकता के अनुसार किसी एक या अधिक डिजिटल भुगतान प्रणालियों के लिए नई व्यवस्था लागू कर सके।
इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर हो रही है। यह वह शुल्क होता है, जो किसी डिजिटल भुगतान को प्रोसेस करने के बदले व्यापारी बैंक या भुगतान सेवा प्रदाता को देता है। फिलहाल इस बारे में सरकार की ओर से कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भविष्य में किसी तरह का शुल्क लागू किया जाता है तो उसकी संभावना सामान्य व्यक्ति-से-व्यक्ति (Peer-to-Peer) UPI भुगतान की बजाय व्यापारिक लेनदेन पर अधिक हो सकती है। हालांकि सरकार ने अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक मॉडल या शुल्क संरचना घोषित नहीं की है।
पिछले कुछ वर्षों में UPI दुनिया की सबसे बड़ी रियल-टाइम डिजिटल भुगतान प्रणालियों में शामिल हो चुका है। हर महीने अरबों ट्रांजैक्शन इस प्लेटफॉर्म के जरिए किए जाते हैं। डिजिटल भुगतान का दायरा बढ़ने के साथ बैंक, फिनटेक कंपनियां और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर लगातार तकनीकी ढांचे, साइबर सुरक्षा, धोखाधड़ी रोकने वाली प्रणालियों और नेटवर्क क्षमता पर बड़ा निवेश कर रहे हैं। उद्योग से जुड़े कई संगठनों का कहना रहा है कि इतनी बड़ी भुगतान प्रणाली को लंबे समय तक सुचारु रूप से चलाने के लिए स्थायी वित्तीय मॉडल की आवश्यकता होगी।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा भी हाल ही में इस विषय पर संकेत दे चुके हैं कि डिजिटल भुगतान के बढ़ते नेटवर्क को बनाए रखने के लिए लगातार निवेश जरूरी है। उनके अनुसार, भविष्य में भुगतान व्यवस्था को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाए रखने के लिए किसी दीर्घकालिक वित्तीय व्यवस्था पर विचार करना पड़ सकता है। हालांकि उन्होंने भी यह नहीं कहा कि आम उपभोक्ताओं से तत्काल कोई शुल्क लिया जाएगा।
सरकार की ओर से अब तक यह साफ किया गया है कि रोजमर्रा के UPI उपयोगकर्ताओं के लिए फिलहाल कोई बदलाव नहीं है। मोबाइल से दुकानों पर भुगतान करना, दोस्तों या परिवार के लोगों को पैसे भेजना और अन्य सामान्य UPI लेनदेन पहले की तरह बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के जारी रहेंगे। यदि भविष्य में किसी तरह का शुल्क लागू करने का फैसला लिया जाता है, तो उसके लिए अलग से नियम, दायरा और लागू होने की तारीख घोषित की जाएगी।
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UPI पर भविष्य में लग सकता है शुल्क, लोकसभा से बिल पास; फिलहाल लेनदेन रहेगा मुफ्त
Digital Desk
देश में डिजिटल भुगतान करने वाले करोड़ों लोगों के लिए अहम खबर सामने आई है। लोकसभा ने कराधान एवं अन्य कानून (संशोधन) विधेयक-2026 को मंजूरी दे दी है। इस संशोधन के बाद केंद्र सरकार को भविष्य में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) सहित कुछ डिजिटल भुगतान माध्यमों पर शुल्क लागू करने का कानूनी अधिकार मिल जाएगा। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस फैसले का मतलब यह नहीं है कि अभी से UPI ट्रांजैक्शन पर कोई शुल्क लगने जा रहा है। मौजूदा व्यवस्था के तहत उपभोक्ता पहले की तरह बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के UPI के जरिए भुगतान कर सकेंगे।
नए संशोधन के जरिए सरकार ने ऐसा कानूनी ढांचा तैयार किया है, जिसके तहत जरूरत पड़ने पर भविष्य में कुछ इलेक्ट्रॉनिक भुगतान प्रणालियों पर शुल्क लगाने की अधिसूचना जारी की जा सकेगी। यानी फिलहाल किसी भी डिजिटल भुगतान पर नई फीस लागू नहीं हुई है। यदि आगे चलकर सरकार किसी विशेष भुगतान प्रणाली पर शुल्क लगाने का निर्णय लेती है, तो उसके लिए अलग से अधिसूचना जारी करनी होगी। उसी में यह तय होगा कि शुल्क किस तरह के लेनदेन पर लागू होगा, कितना होगा और किसे उसका भुगतान करना होगा।
यह संशोधन पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 के कुछ प्रावधानों में बदलाव के बाद संभव हुआ है। पहले कानून में ऐसी व्यवस्था थी, जिसके कारण कुछ निर्धारित इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों पर बैंक और भुगतान सेवा प्रदाता मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) नहीं लगा सकते थे। संशोधित कानून के बाद सरकार के पास यह अधिकार होगा कि वह आवश्यकता के अनुसार किसी एक या अधिक डिजिटल भुगतान प्रणालियों के लिए नई व्यवस्था लागू कर सके।
इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर हो रही है। यह वह शुल्क होता है, जो किसी डिजिटल भुगतान को प्रोसेस करने के बदले व्यापारी बैंक या भुगतान सेवा प्रदाता को देता है। फिलहाल इस बारे में सरकार की ओर से कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भविष्य में किसी तरह का शुल्क लागू किया जाता है तो उसकी संभावना सामान्य व्यक्ति-से-व्यक्ति (Peer-to-Peer) UPI भुगतान की बजाय व्यापारिक लेनदेन पर अधिक हो सकती है। हालांकि सरकार ने अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक मॉडल या शुल्क संरचना घोषित नहीं की है।
पिछले कुछ वर्षों में UPI दुनिया की सबसे बड़ी रियल-टाइम डिजिटल भुगतान प्रणालियों में शामिल हो चुका है। हर महीने अरबों ट्रांजैक्शन इस प्लेटफॉर्म के जरिए किए जाते हैं। डिजिटल भुगतान का दायरा बढ़ने के साथ बैंक, फिनटेक कंपनियां और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर लगातार तकनीकी ढांचे, साइबर सुरक्षा, धोखाधड़ी रोकने वाली प्रणालियों और नेटवर्क क्षमता पर बड़ा निवेश कर रहे हैं। उद्योग से जुड़े कई संगठनों का कहना रहा है कि इतनी बड़ी भुगतान प्रणाली को लंबे समय तक सुचारु रूप से चलाने के लिए स्थायी वित्तीय मॉडल की आवश्यकता होगी।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा भी हाल ही में इस विषय पर संकेत दे चुके हैं कि डिजिटल भुगतान के बढ़ते नेटवर्क को बनाए रखने के लिए लगातार निवेश जरूरी है। उनके अनुसार, भविष्य में भुगतान व्यवस्था को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाए रखने के लिए किसी दीर्घकालिक वित्तीय व्यवस्था पर विचार करना पड़ सकता है। हालांकि उन्होंने भी यह नहीं कहा कि आम उपभोक्ताओं से तत्काल कोई शुल्क लिया जाएगा।
सरकार की ओर से अब तक यह साफ किया गया है कि रोजमर्रा के UPI उपयोगकर्ताओं के लिए फिलहाल कोई बदलाव नहीं है। मोबाइल से दुकानों पर भुगतान करना, दोस्तों या परिवार के लोगों को पैसे भेजना और अन्य सामान्य UPI लेनदेन पहले की तरह बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के जारी रहेंगे। यदि भविष्य में किसी तरह का शुल्क लागू करने का फैसला लिया जाता है, तो उसके लिए अलग से नियम, दायरा और लागू होने की तारीख घोषित की जाएगी।
