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कैलिफोर्निया में दिवाली अवकाश पर अदालत की रोक, धार्मिक मान्यता को लेकर छिड़ी नई बहस
Digital Desk
राज्य सरकार ने दिवाली को आधिकारिक अवकाश घोषित किया था, लेकिन अदालत ने कानून के प्रमुख प्रावधान रद्द किए; अब अपील और नए विधेयक की तैयारी
कैलिफोर्निया में दिवाली को आधिकारिक राज्य अवकाश का दर्जा देने वाले कानून पर अदालत की रोक के बाद अमेरिका में धार्मिक स्वतंत्रता और संवैधानिक व्यवस्था को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। पिछले साल बड़े उत्साह के साथ लागू किए गए इस कानून के प्रमुख प्रावधानों को अब अदालत ने असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया है। इस फैसले का असर केवल दिवाली अवकाश तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भविष्य में धार्मिक और सांस्कृतिक पर्वों को सरकारी मान्यता देने के तरीके पर भी दूरगामी प्रभाव डाल सकता है।
कैलिफोर्निया के सुपीरियर कोर्ट के न्यायाधीश स्टीफन अक्विस्टो ने जुलाई में दिए अपने फैसले में कहा कि विधानसभा विधेयक AB 268 के कई प्रावधान अमेरिकी संघीय संविधान और कैलिफोर्निया राज्य के संविधान में मौजूद Establishment Clause का उल्लंघन करते हैं। अदालत का मानना है कि इस कानून में दिवाली को उसकी धार्मिक महत्ता के आधार पर विशेष दर्जा दिया गया, जबकि इसके पीछे पर्याप्त धर्मनिरपेक्ष या प्रशासनिक आधार प्रस्तुत नहीं किया गया।
दरअसल, कैलिफोर्निया के गवर्नर गेविन न्यूजॉम ने अक्टूबर 2025 में इस विधेयक पर हस्ताक्षर किए थे। इसके बाद 1 जनवरी 2026 से यह कानून प्रभावी हुआ और कैलिफोर्निया, पेनसिल्वेनिया तथा कनेक्टिकट के बाद दिवाली को आधिकारिक राज्य अवकाश मान्यता देने वाला तीसरा अमेरिकी राज्य बन गया। भारतीय मूल के विधायक अश कलरा ने यह विधेयक विधानसभा में पेश किया था। इसका उद्देश्य भारतीय मूल के लोगों और दक्षिण एशियाई समुदाय को उनकी प्रमुख सांस्कृतिक और धार्मिक परंपरा के सम्मान के रूप में आधिकारिक पहचान देना था।
हालांकि अदालत ने अपने फैसले में कहा कि कानून की भाषा में दिवाली की धार्मिक और आध्यात्मिक विरासत पर अधिक जोर दिया गया है, जबकि इसे प्रशासनिक सुविधा, सांस्कृतिक विविधता या सार्वजनिक हित के आधार पर पर्याप्त रूप से प्रस्तुत नहीं किया गया। न्यायालय के अनुसार, किसी एक धार्मिक पर्व को उसकी धार्मिक पहचान के आधार पर सरकारी विशेषाधिकार देना संविधान के धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों के विपरीत माना जा सकता है।
इस फैसले के बाद राज्य के कई स्कूल जिलों, सामुदायिक कॉलेजों और सरकारी विभागों में असमंजस की स्थिति बन गई है। जिन संस्थानों ने AB 268 के आधार पर अपने शैक्षणिक कैलेंडर या अवकाश नीति में बदलाव किए थे, अब उन्हें आगे की कानूनी स्थिति स्पष्ट होने तक नई व्यवस्था का इंतजार करना होगा। राज्य कर्मचारियों की छुट्टियों से जुड़े कुछ प्रावधान भी फिलहाल प्रभावहीन हो गए हैं।
अदालत के इस निर्णय पर भारतीय-अमेरिकी संगठनों और नागरिक अधिकार समूहों ने चिंता जताई है। हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन (HAF) ने कहा कि अदालत ने कानून के वास्तविक उद्देश्य को समझने के बजाय केवल उसकी भाषा पर अधिक ध्यान दिया। संगठन का कहना है कि इस कानून का मकसद किसी धर्म को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि उन छात्रों और कर्मचारियों को सुविधा देना था जो दिवाली मनाने के कारण पढ़ाई या नौकरी में नुकसान नहीं उठाना चाहते।
अमेरिका में क्रिसमस जैसे त्योहारों को लंबे समय से सार्वजनिक अवकाश का दर्जा प्राप्त है क्योंकि समय के साथ उन्हें धार्मिक के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक स्वरूप भी मिल गया है। वहीं दिवाली जैसे अपेक्षाकृत नए धार्मिक पर्वों को सरकारी मान्यता देने के लिए अदालतें अधिक कठोर संवैधानिक परीक्षण अपनाती हैं और उनसे मजबूत धर्मनिरपेक्ष आधार की अपेक्षा करती हैं।
फैसले के बाद कैलिफोर्निया की एशियन-अमेरिकन विधायी कॉकस और कई जनप्रतिनिधि अब दो विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। पहला, इस फैसले को कैलिफोर्निया कोर्ट ऑफ अपील में चुनौती दी जाए। दूसरा, नए शब्दों और संशोधित प्रावधानों के साथ ऐसा विधेयक तैयार किया जाए जिसमें धार्मिक महत्व के बजाय सांस्कृतिक विविधता, सामाजिक समावेशन और प्रशासनिक सुविधा को आधार बनाया जाए।
दिवाली को लेकर अमेरिका में लगातार स्वीकार्यता बढ़ती रही है। पेनसिल्वेनिया और कनेक्टिकट ने इसे आधिकारिक राज्य अवकाश घोषित किया है। न्यूयॉर्क सिटी के सरकारी स्कूलों में भी दिवाली की छुट्टी लागू है। इसके अलावा न्यू जर्सी, मैसाचुसेट्स, टेक्सास और वर्जीनिया के कई स्कूल जिलों में स्थानीय स्तर पर छात्रों को दिवाली की छुट्टी दी जाती है। लॉस एंजिल्स काउंटी भी 2022 से इस पर्व को आधिकारिक मान्यता दे चुकी है।
व्हाइट हाउस में भी पिछले दो दशकों में दिवाली का महत्व लगातार बढ़ा है। जॉर्ज डब्ल्यू. बुश के कार्यकाल में पहली बार व्हाइट हाउस में आधिकारिक दिवाली समारोह आयोजित हुआ। बराक ओबामा ने राष्ट्रपति रहते हुए ओवल ऑफिस में दीप जलाने की परंपरा शुरू की। डोनाल्ड ट्रम्प और जो बाइडेन प्रशासन ने भी इस परंपरा को आगे बढ़ाया। बाइडेन प्रशासन के दौरान व्हाइट हाउस में अब तक का सबसे बड़ा दिवाली समारोह आयोजित किया गया, जिसमें सांसदों, राजनयिकों और भारतीय-अमेरिकी समुदाय के प्रमुख प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
इस बीच अमेरिकी संसद में भी दिवाली डे एक्ट को लेकर समय-समय पर प्रस्ताव पेश किए जाते रहे हैं। इस विधेयक का उद्देश्य दिवाली को संघीय सार्वजनिक अवकाशों की सूची में शामिल करना है, हालांकि इस पर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।
कैलिफोर्निया में भारतीय मूल की आबादी लगातार बढ़ रही है और यह संख्या करीब दस लाख के आसपास पहुंच चुकी है। ऐसे में दिवाली अवकाश से जुड़ा यह मामला केवल एक त्योहार तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह इस बात की भी परीक्षा बन गया है कि अमेरिका जैसे बहुसांस्कृतिक लोकतंत्र में विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को संवैधानिक सीमाओं के भीतर किस प्रकार सरकारी मान्यता दी जा सकती है। आने वाले समय में इस मामले पर होने वाली अपील और संभावित नए कानून पर पूरे देश की नजर रहेगी।
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कैलिफोर्निया में दिवाली अवकाश पर अदालत की रोक, धार्मिक मान्यता को लेकर छिड़ी नई बहस
Digital Desk
कैलिफोर्निया में दिवाली को आधिकारिक राज्य अवकाश का दर्जा देने वाले कानून पर अदालत की रोक के बाद अमेरिका में धार्मिक स्वतंत्रता और संवैधानिक व्यवस्था को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। पिछले साल बड़े उत्साह के साथ लागू किए गए इस कानून के प्रमुख प्रावधानों को अब अदालत ने असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया है। इस फैसले का असर केवल दिवाली अवकाश तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भविष्य में धार्मिक और सांस्कृतिक पर्वों को सरकारी मान्यता देने के तरीके पर भी दूरगामी प्रभाव डाल सकता है।
कैलिफोर्निया के सुपीरियर कोर्ट के न्यायाधीश स्टीफन अक्विस्टो ने जुलाई में दिए अपने फैसले में कहा कि विधानसभा विधेयक AB 268 के कई प्रावधान अमेरिकी संघीय संविधान और कैलिफोर्निया राज्य के संविधान में मौजूद Establishment Clause का उल्लंघन करते हैं। अदालत का मानना है कि इस कानून में दिवाली को उसकी धार्मिक महत्ता के आधार पर विशेष दर्जा दिया गया, जबकि इसके पीछे पर्याप्त धर्मनिरपेक्ष या प्रशासनिक आधार प्रस्तुत नहीं किया गया।
दरअसल, कैलिफोर्निया के गवर्नर गेविन न्यूजॉम ने अक्टूबर 2025 में इस विधेयक पर हस्ताक्षर किए थे। इसके बाद 1 जनवरी 2026 से यह कानून प्रभावी हुआ और कैलिफोर्निया, पेनसिल्वेनिया तथा कनेक्टिकट के बाद दिवाली को आधिकारिक राज्य अवकाश मान्यता देने वाला तीसरा अमेरिकी राज्य बन गया। भारतीय मूल के विधायक अश कलरा ने यह विधेयक विधानसभा में पेश किया था। इसका उद्देश्य भारतीय मूल के लोगों और दक्षिण एशियाई समुदाय को उनकी प्रमुख सांस्कृतिक और धार्मिक परंपरा के सम्मान के रूप में आधिकारिक पहचान देना था।
हालांकि अदालत ने अपने फैसले में कहा कि कानून की भाषा में दिवाली की धार्मिक और आध्यात्मिक विरासत पर अधिक जोर दिया गया है, जबकि इसे प्रशासनिक सुविधा, सांस्कृतिक विविधता या सार्वजनिक हित के आधार पर पर्याप्त रूप से प्रस्तुत नहीं किया गया। न्यायालय के अनुसार, किसी एक धार्मिक पर्व को उसकी धार्मिक पहचान के आधार पर सरकारी विशेषाधिकार देना संविधान के धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों के विपरीत माना जा सकता है।
इस फैसले के बाद राज्य के कई स्कूल जिलों, सामुदायिक कॉलेजों और सरकारी विभागों में असमंजस की स्थिति बन गई है। जिन संस्थानों ने AB 268 के आधार पर अपने शैक्षणिक कैलेंडर या अवकाश नीति में बदलाव किए थे, अब उन्हें आगे की कानूनी स्थिति स्पष्ट होने तक नई व्यवस्था का इंतजार करना होगा। राज्य कर्मचारियों की छुट्टियों से जुड़े कुछ प्रावधान भी फिलहाल प्रभावहीन हो गए हैं।
अदालत के इस निर्णय पर भारतीय-अमेरिकी संगठनों और नागरिक अधिकार समूहों ने चिंता जताई है। हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन (HAF) ने कहा कि अदालत ने कानून के वास्तविक उद्देश्य को समझने के बजाय केवल उसकी भाषा पर अधिक ध्यान दिया। संगठन का कहना है कि इस कानून का मकसद किसी धर्म को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि उन छात्रों और कर्मचारियों को सुविधा देना था जो दिवाली मनाने के कारण पढ़ाई या नौकरी में नुकसान नहीं उठाना चाहते।
अमेरिका में क्रिसमस जैसे त्योहारों को लंबे समय से सार्वजनिक अवकाश का दर्जा प्राप्त है क्योंकि समय के साथ उन्हें धार्मिक के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक स्वरूप भी मिल गया है। वहीं दिवाली जैसे अपेक्षाकृत नए धार्मिक पर्वों को सरकारी मान्यता देने के लिए अदालतें अधिक कठोर संवैधानिक परीक्षण अपनाती हैं और उनसे मजबूत धर्मनिरपेक्ष आधार की अपेक्षा करती हैं।
फैसले के बाद कैलिफोर्निया की एशियन-अमेरिकन विधायी कॉकस और कई जनप्रतिनिधि अब दो विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। पहला, इस फैसले को कैलिफोर्निया कोर्ट ऑफ अपील में चुनौती दी जाए। दूसरा, नए शब्दों और संशोधित प्रावधानों के साथ ऐसा विधेयक तैयार किया जाए जिसमें धार्मिक महत्व के बजाय सांस्कृतिक विविधता, सामाजिक समावेशन और प्रशासनिक सुविधा को आधार बनाया जाए।
दिवाली को लेकर अमेरिका में लगातार स्वीकार्यता बढ़ती रही है। पेनसिल्वेनिया और कनेक्टिकट ने इसे आधिकारिक राज्य अवकाश घोषित किया है। न्यूयॉर्क सिटी के सरकारी स्कूलों में भी दिवाली की छुट्टी लागू है। इसके अलावा न्यू जर्सी, मैसाचुसेट्स, टेक्सास और वर्जीनिया के कई स्कूल जिलों में स्थानीय स्तर पर छात्रों को दिवाली की छुट्टी दी जाती है। लॉस एंजिल्स काउंटी भी 2022 से इस पर्व को आधिकारिक मान्यता दे चुकी है।
व्हाइट हाउस में भी पिछले दो दशकों में दिवाली का महत्व लगातार बढ़ा है। जॉर्ज डब्ल्यू. बुश के कार्यकाल में पहली बार व्हाइट हाउस में आधिकारिक दिवाली समारोह आयोजित हुआ। बराक ओबामा ने राष्ट्रपति रहते हुए ओवल ऑफिस में दीप जलाने की परंपरा शुरू की। डोनाल्ड ट्रम्प और जो बाइडेन प्रशासन ने भी इस परंपरा को आगे बढ़ाया। बाइडेन प्रशासन के दौरान व्हाइट हाउस में अब तक का सबसे बड़ा दिवाली समारोह आयोजित किया गया, जिसमें सांसदों, राजनयिकों और भारतीय-अमेरिकी समुदाय के प्रमुख प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
इस बीच अमेरिकी संसद में भी दिवाली डे एक्ट को लेकर समय-समय पर प्रस्ताव पेश किए जाते रहे हैं। इस विधेयक का उद्देश्य दिवाली को संघीय सार्वजनिक अवकाशों की सूची में शामिल करना है, हालांकि इस पर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।
कैलिफोर्निया में भारतीय मूल की आबादी लगातार बढ़ रही है और यह संख्या करीब दस लाख के आसपास पहुंच चुकी है। ऐसे में दिवाली अवकाश से जुड़ा यह मामला केवल एक त्योहार तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह इस बात की भी परीक्षा बन गया है कि अमेरिका जैसे बहुसांस्कृतिक लोकतंत्र में विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को संवैधानिक सीमाओं के भीतर किस प्रकार सरकारी मान्यता दी जा सकती है। आने वाले समय में इस मामले पर होने वाली अपील और संभावित नए कानून पर पूरे देश की नजर रहेगी।
