NCERT की कक्षा 8 की किताब पर विवाद, ‘ज्यूडीशियल करप्शन’ अध्याय हटेगा, बिक्री पर रोक

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नई दिल्ली में स्पष्टीकरण: अनजाने में हुई त्रुटि; Exploring Society: India and Beyond Part 2 का संशोधित संस्करण सत्र 2026–27 से

नई दिल्ली में राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की नई पाठ्यपुस्तक में शामिल ‘ज्यूडीशियल करप्शन’ विषय पर उठे विवाद के बाद किताब की बिक्री और वितरण पर रोक लगा दी है। परिषद ने स्वीकार किया कि संबंधित अध्याय में कुछ सामग्री अनजाने में शामिल हो गई थी, जिसे अब विशेषज्ञों से परामर्श लेकर संशोधित किया जाएगा। संशोधित संस्करण शैक्षणिक सत्र 2026–27 से छात्रों को उपलब्ध कराने की योजना है।

कौन, क्या, कब और क्यों—NCERT ने 24 फरवरी को नई पाठ्यपुस्तक जारी की थी, जिसका उपयोग आगामी शैक्षणिक सत्र से होना था। पुस्तक के एक अध्याय में न्यायिक व्यवस्था की चुनौतियों के संदर्भ में भ्रष्टाचार, लंबित मामलों और न्यायाधीशों की कमी का उल्लेख किया गया था। सामग्री सार्वजनिक होने के बाद विभिन्न स्तरों पर आपत्तियाँ उठीं। इसके बाद शिक्षा मंत्रालय ने समीक्षा कर वितरण रोकने के निर्देश दिए और परिषद ने औपचारिक रूप से खेद व्यक्त किया।

कैसे और आगे क्या—NCERT ने अपने बयान में कहा कि पाठ्यपुस्तकों का उद्देश्य संवैधानिक मूल्यों, संस्थागत सम्मान और लोकतांत्रिक भागीदारी की समझ विकसित करना है। परिषद ने स्पष्ट किया कि किसी संवैधानिक संस्था की गरिमा को कमतर दिखाने का कोई इरादा नहीं था। विवादित सामग्री की समीक्षा कर अध्याय को पुनर्लेखित किया जाएगा और मानक शैक्षणिक प्रक्रिया के तहत अनुमोदन के बाद ही पुस्तक फिर से जारी होगी।

पृष्ठभूमि—नई पाठ्यपुस्तकें राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा के अनुरूप तैयार की जा रही हैं। महामारी के बाद पाठ्यक्रमों का पुनर्गठन किया गया है, जिसके तहत कई विषयों को अद्यतन किया गया। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि संस्थागत विषयों पर सामग्री तैयार करते समय संतुलन और संदर्भ का विशेष ध्यान आवश्यक होता है, ताकि छात्रों में तथ्यात्मक समझ विकसित हो और संस्थाओं के प्रति भरोसा भी बना रहे।

प्रतिक्रिया और विश्लेषण—कानूनी और शैक्षणिक समुदाय के एक वर्ग ने निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि संवेदनशील विषयों पर अकादमिक प्रस्तुति सटीक और संतुलित होनी चाहिए। वहीं, शिक्षा क्षेत्र के कुछ विशेषज्ञों ने पारदर्शी समीक्षा प्रक्रिया और सार्वजनिक संवाद की आवश्यकता पर जोर दिया है, ताकि पाठ्यक्रम निर्माण में भरोसा मजबूत हो।

पब्लिक इंटरेस्ट—यह घटनाक्रम शिक्षा प्रणाली, पाठ्यक्रम निर्माण और संस्थागत विश्वसनीयता से जुड़े व्यापक सवालों को सामने लाता है। आज की ताज़ा ख़बरें, भारत समाचार अपडेट और सरकारी अपडेट के संदर्भ में यह मामला शिक्षा नीति और शैक्षणिक सामग्री की गुणवत्ता पर राष्ट्रीय स्तर की बहस को प्रभावित कर सकता है।

आगे की स्थिति—NCERT के अनुसार संशोधित अध्याय विशेषज्ञों की सलाह से तैयार होगा और अंतिम स्वीकृति के बाद ही स्कूलों में लागू किया जाएगा। तब तक संबंधित पुस्तक का वितरण स्थगित रहेगा और स्कूलों को अद्यतन संस्करण की प्रतीक्षा करनी होगी।

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