नई दिल्ली। केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ को आधिकारिक आयोजनों में अनिवार्य करने संबंधी नए निर्देशों पर विवाद तेज हो गया है। जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने आदेश का विरोध करते हुए कहा कि गीत के सभी छंद गाने को अनिवार्य बनाना धार्मिक स्वतंत्रता पर हस्तक्षेप है। यह मुद्दा आज की ताज़ा ख़बरें और भारत समाचार अपडेट में प्रमुख रूप से उभरा है।
गृह मंत्रालय की गाइडलाइन के अनुसार सरकारी कार्यक्रमों, शैक्षणिक संस्थानों और औपचारिक आयोजनों में राष्ट्रगीत को राष्ट्रगान के समान सम्मान दिया जाएगा। राष्ट्रगीत बजने या गाए जाने पर उपस्थित लोगों का सावधान मुद्रा में खड़ा होना आवश्यक होगा। निर्देशों में कहा गया है कि आधिकारिक अवसरों पर वंदे मातरम के सभी छह अंतरे गाए जा सकते हैं।
मौलाना मदनी ने कहा कि मुसलमान किसी को वंदे मातरम गाने से नहीं रोकते, लेकिन गीत के कुछ अंश धार्मिक मान्यताओं से मेल नहीं खाते। उन्होंने इसे एकतरफा निर्णय बताते हुए कहा कि देशभक्ति को बाध्यकारी रूप में लागू करना संविधान के अनुच्छेद 25 की भावना के विपरीत है।
सिख संगठन दल खालसा ने भी निर्णय पर आपत्ति जताई है। संगठन के अनुसार यह आदेश धार्मिक पहचान से जुड़ा संवेदनशील विषय है और इसे अनिवार्य बनाना उचित नहीं है।
सरकारी सूत्रों का कहना है कि यह निर्णय वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में सांस्कृतिक सम्मान के उद्देश्य से लिया गया है। नए प्रोटोकॉल के तहत राष्ट्रपति या राज्यपाल की उपस्थिति वाले कार्यक्रमों, ध्वजारोहण और अन्य आधिकारिक आयोजनों में राष्ट्रगीत गाया जा सकेगा। सिनेमाघरों को इस अनिवार्यता से बाहर रखा गया है।
-----------------
हमारे आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स से जुड़ें –
🔴 व्हाट्सएप चैनल: https://whatsapp.com/channel/0029VbATlF0KQuJB6tvUrN3V
🔴 फेसबुक: Dainik Jagran MP/CG Official
🟣 इंस्टाग्राम: @dainikjagranmp.cg
🔴 यूट्यूब: Dainik Jagran MPCG Digital
📲 सोशल मीडिया पर जुड़ें और बने जागरूक पाठक।
👉 आज ही जुड़िए!
