- Hindi News
- देश विदेश
- ट्रंप की धमकी के आगे यूरोप ने दिखाई ताकत: 10% टैरिफ हटाने पर मजबूर
ट्रंप की धमकी के आगे यूरोप ने दिखाई ताकत: 10% टैरिफ हटाने पर मजबूर
अंतराष्ट्रीय न्यूज
‘ट्रेड बाजूका’ कानून से डरते ट्रंप ने अमेरिका की धमकी वापस ली
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को यूरोपीय देशों से टकराव के बजाय झुकना पड़ा। स्विट्जरलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान ट्रंप ने यूरोप पर 1 फरवरी से 10% टैरिफ लगाने की धमकी दी थी, लेकिन यूरोप के 27 देशों ने जवाबी कदम उठाने की चेतावनी दी। परिणामस्वरूप ट्रंप ने अपने टैरिफ प्रस्ताव को वापस ले लिया।
ट्रंप की यह धमकी दावोस में हुई थी, जहां यूरोपीय नेताओं ने एकजुट होकर जवाब दिया। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और अन्य EU सदस्य देशों ने अमेरिका को आर्थिक ‘ट्रेड बाजूका’ का सामना करने के लिए तैयार रहने की चेतावनी दी।
ट्रेड बाजूका क्या है
यूरोपीय यूनियन का यह कानून—एंटी-कोएर्शन इंस्ट्रूमेंट—किसी देश या उसकी कंपनियों द्वारा EU या उसके सदस्यों पर गलत दबाव डालने पर सख्त आर्थिक कदम उठाने की अनुमति देता है। इसके तहत EU अमेरिकी कंपनियों के इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट, सरकारी टेंडर और निवेश पर पाबंदी लगा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे अमेरिका को अरबों डॉलर का नुकसान हो सकता था।
क्यों यूरोप ने जवाब दिया
यूरोप ने पिछले अनुभवों से सीखा है कि बड़े देश छोटे देशों पर दबाव बना सकते हैं। 2021 में चीन ने लिथुआनिया पर आर्थिक दबाव डाला था, जिससे EU ने इस कानून को तैयार किया। दावोस में ट्रंप की धमकी ने यूरोप को एकजुट कर दिया।
कैसे ट्रंप झुका
अमेरिका की धमकी के सामने यूरोप ने स्पष्ट संकेत दिया कि यदि टैरिफ लगाए गए तो जवाबी आर्थिक कार्रवाई की जाएगी। ट्रंप ने इसके बाद ग्रीनलैंड पर कब्जे की अपनी मांग पर भी नरमी दिखाई और टैरिफ लगाने से पीछे हट गए।
कौन प्रभावित हुआ
अमेरिका के इस कदम से EU के 27 सदस्य देश सीधे प्रभावित हो सकते थे, लेकिन अब उन्हें आर्थिक नुकसान से बचाया गया। यूरोप के नेताओं ने दिखाया कि संयुक्त रूप से बड़े देशों के दबाव का मुकाबला किया जा सकता है।
इतिहास और वर्तमान स्थिति
यूरोप ने सेकेंड वर्ल्ड वॉर के बाद सैन्य और आर्थिक सुरक्षा के लिए अमेरिका पर निर्भरता बढ़ाई थी। लेकिन अब EU खुद को अधिक स्वतंत्र और मजबूत बनाने के लिए रक्षा और व्यापार नीति में सक्रिय कदम उठा रहा है। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा कि सख्ती, तैयारी और एकजुटता ही अमेरिका जैसे बड़े देशों से निपटने का तरीका है।
--------------
हमारे आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स से जुड़ें –
🔴 व्हाट्सएप चैनल: https://whatsapp.com/channel/0029VbATlF0KQuJB6tvUrN3V
🔴 फेसबुक: Dainik Jagran MP/CG Official
🟣 इंस्टाग्राम: @dainikjagranmp.cg
🔴 यूट्यूब: Dainik Jagran MPCG Digital
📲 सोशल मीडिया पर जुड़ें और बने जागरूक पाठक।
👉 आज ही जुड़िए!
-----------------
हमारे आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स से जुड़ें –
🔴 व्हाट्सएप चैनल: https://whatsapp.com/channel/0029VbATlF0KQuJB6tvUrN3V
🔴 फेसबुक: Dainik Jagran MP/CG Official
🟣 इंस्टाग्राम: @dainikjagranmp.cg
🔴 यूट्यूब: Dainik Jagran MPCG Digital
📲 सोशल मीडिया पर जुड़ें और बने जागरूक पाठक।
👉 आज ही जुड़िए
ट्रंप की धमकी के आगे यूरोप ने दिखाई ताकत: 10% टैरिफ हटाने पर मजबूर
अंतराष्ट्रीय न्यूज
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को यूरोपीय देशों से टकराव के बजाय झुकना पड़ा। स्विट्जरलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान ट्रंप ने यूरोप पर 1 फरवरी से 10% टैरिफ लगाने की धमकी दी थी, लेकिन यूरोप के 27 देशों ने जवाबी कदम उठाने की चेतावनी दी। परिणामस्वरूप ट्रंप ने अपने टैरिफ प्रस्ताव को वापस ले लिया।
ट्रंप की यह धमकी दावोस में हुई थी, जहां यूरोपीय नेताओं ने एकजुट होकर जवाब दिया। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और अन्य EU सदस्य देशों ने अमेरिका को आर्थिक ‘ट्रेड बाजूका’ का सामना करने के लिए तैयार रहने की चेतावनी दी।
ट्रेड बाजूका क्या है
यूरोपीय यूनियन का यह कानून—एंटी-कोएर्शन इंस्ट्रूमेंट—किसी देश या उसकी कंपनियों द्वारा EU या उसके सदस्यों पर गलत दबाव डालने पर सख्त आर्थिक कदम उठाने की अनुमति देता है। इसके तहत EU अमेरिकी कंपनियों के इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट, सरकारी टेंडर और निवेश पर पाबंदी लगा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे अमेरिका को अरबों डॉलर का नुकसान हो सकता था।
क्यों यूरोप ने जवाब दिया
यूरोप ने पिछले अनुभवों से सीखा है कि बड़े देश छोटे देशों पर दबाव बना सकते हैं। 2021 में चीन ने लिथुआनिया पर आर्थिक दबाव डाला था, जिससे EU ने इस कानून को तैयार किया। दावोस में ट्रंप की धमकी ने यूरोप को एकजुट कर दिया।
कैसे ट्रंप झुका
अमेरिका की धमकी के सामने यूरोप ने स्पष्ट संकेत दिया कि यदि टैरिफ लगाए गए तो जवाबी आर्थिक कार्रवाई की जाएगी। ट्रंप ने इसके बाद ग्रीनलैंड पर कब्जे की अपनी मांग पर भी नरमी दिखाई और टैरिफ लगाने से पीछे हट गए।
कौन प्रभावित हुआ
अमेरिका के इस कदम से EU के 27 सदस्य देश सीधे प्रभावित हो सकते थे, लेकिन अब उन्हें आर्थिक नुकसान से बचाया गया। यूरोप के नेताओं ने दिखाया कि संयुक्त रूप से बड़े देशों के दबाव का मुकाबला किया जा सकता है।
इतिहास और वर्तमान स्थिति
यूरोप ने सेकेंड वर्ल्ड वॉर के बाद सैन्य और आर्थिक सुरक्षा के लिए अमेरिका पर निर्भरता बढ़ाई थी। लेकिन अब EU खुद को अधिक स्वतंत्र और मजबूत बनाने के लिए रक्षा और व्यापार नीति में सक्रिय कदम उठा रहा है। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा कि सख्ती, तैयारी और एकजुटता ही अमेरिका जैसे बड़े देशों से निपटने का तरीका है।
--------------
हमारे आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स से जुड़ें –
🔴 व्हाट्सएप चैनल: https://whatsapp.com/channel/0029VbATlF0KQuJB6tvUrN3V
🔴 फेसबुक: Dainik Jagran MP/CG Official
🟣 इंस्टाग्राम: @dainikjagranmp.cg
🔴 यूट्यूब: Dainik Jagran MPCG Digital
📲 सोशल मीडिया पर जुड़ें और बने जागरूक पाठक।
👉 आज ही जुड़िए!
