अनिल अंबानी पर 1.5 लाख करोड़ के घोटाले का आरोप: सुप्रीम कोर्ट ने CBI-ED को 10 दिन में रिपोर्ट देने का आदेश

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PIL पर सुनवाई के बाद शीर्ष अदालत सख्त, बैंक फ्रॉड और फंड डायवर्जन की जांच पर निगरानी बढ़ी

नई दिल्ली।सुप्रीम कोर्ट ने उद्योगपति अनिल अंबानी और उनसे जुड़ी कंपनियों पर लगे ₹1.5 लाख करोड़ के कथित बैंकिंग और कॉर्पोरेट फ्रॉड के आरोपों को गंभीर मानते हुए केंद्रीय जांच एजेंसियों को कड़ा निर्देश दिया है। शुक्रवार को पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (PIL) पर सुनवाई के दौरान अदालत ने CBI और प्रवर्तन निदेशालय (ED) से कहा कि वे 10 दिन के भीतर सीलबंद लिफाफे में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करें। यह मामला देश के सबसे बड़े कॉर्पोरेट धोखाधड़ी के आरोपों में से एक माना जा रहा है।

क्या है मामला

यह याचिका पूर्व नौकरशाह ई.ए.एस. सरमा की ओर से दायर की गई है, जिसमें अनिल धीरूभाई अंबानी ग्रुप (ADAG) पर 2007-08 से सार्वजनिक बैंकों और वित्तीय संस्थानों के साथ बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया है। याचिका में कहा गया है कि विभिन्न कंपनियों के जरिए लिए गए कर्ज का गलत इस्तेमाल हुआ और रकम को समूह की अन्य इकाइयों में डायवर्ट किया गया।

सुनवाई के दौरान अदालत की सख्ती

मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची की पीठ ने कहा कि मामले में पहले भी नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन अब बॉम्बे हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को व्यक्तिगत रूप से यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि नोटिस अनिल अंबानी तक विधिवत पहुंचें। अदालत ने जांच एजेंसियों से अब तक की कार्रवाई का पूरा ब्यौरा मांगा है।

याचिकाकर्ता के आरोप

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने अदालत में कहा कि यह “भारत के इतिहास का सबसे बड़ा कॉर्पोरेट फ्रॉड” है। उन्होंने आरोप लगाया कि CBI और ED की मौजूदा जांच केवल फ्रॉड के सीमित हिस्से तक सिमटी है, जबकि बैंकों के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की जांच नहीं की जा रही। भूषण के अनुसार, लोन अप्रूवल की प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी की गई और फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स में भी हेरफेर हुआ।

ED की कार्रवाई और जब्त संपत्तियां

ED अब तक इस मामले में ₹10,117 करोड़ की संपत्तियां जब्त कर चुकी है। इनमें मुंबई के पाली हिल स्थित अनिल अंबानी का आवास, रिलायंस समूह की कई कंपनियों के बैंक बैलेंस, फिक्स्ड डिपॉजिट और अनलिस्टेड निवेश शामिल हैं। एजेंसी का दावा है कि रिलायंस होम फाइनेंस और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस में बड़े पैमाने पर फंड का गलत इस्तेमाल हुआ, जिससे यस बैंक को करीब ₹2,700 करोड़ का नुकसान हुआ।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जांच एजेंसियों की ओर से समय मांगा है। अब सभी की नजरें 10 दिन बाद दाखिल होने वाली रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिसके आधार पर सुप्रीम कोर्ट आगे की कार्रवाई तय करेगा। यह मामला न केवल कॉर्पोरेट गवर्नेंस बल्कि बैंकिंग निगरानी व्यवस्था पर भी अहम सवाल खड़े कर रहा है।

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www.dainikjagranmpcg.com
24 Jan 2026 By Nitin Trivedi

अनिल अंबानी पर 1.5 लाख करोड़ के घोटाले का आरोप: सुप्रीम कोर्ट ने CBI-ED को 10 दिन में रिपोर्ट देने का आदेश

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नई दिल्ली।सुप्रीम कोर्ट ने उद्योगपति अनिल अंबानी और उनसे जुड़ी कंपनियों पर लगे ₹1.5 लाख करोड़ के कथित बैंकिंग और कॉर्पोरेट फ्रॉड के आरोपों को गंभीर मानते हुए केंद्रीय जांच एजेंसियों को कड़ा निर्देश दिया है। शुक्रवार को पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (PIL) पर सुनवाई के दौरान अदालत ने CBI और प्रवर्तन निदेशालय (ED) से कहा कि वे 10 दिन के भीतर सीलबंद लिफाफे में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करें। यह मामला देश के सबसे बड़े कॉर्पोरेट धोखाधड़ी के आरोपों में से एक माना जा रहा है।

क्या है मामला

यह याचिका पूर्व नौकरशाह ई.ए.एस. सरमा की ओर से दायर की गई है, जिसमें अनिल धीरूभाई अंबानी ग्रुप (ADAG) पर 2007-08 से सार्वजनिक बैंकों और वित्तीय संस्थानों के साथ बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया है। याचिका में कहा गया है कि विभिन्न कंपनियों के जरिए लिए गए कर्ज का गलत इस्तेमाल हुआ और रकम को समूह की अन्य इकाइयों में डायवर्ट किया गया।

सुनवाई के दौरान अदालत की सख्ती

मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची की पीठ ने कहा कि मामले में पहले भी नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन अब बॉम्बे हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को व्यक्तिगत रूप से यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि नोटिस अनिल अंबानी तक विधिवत पहुंचें। अदालत ने जांच एजेंसियों से अब तक की कार्रवाई का पूरा ब्यौरा मांगा है।

याचिकाकर्ता के आरोप

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने अदालत में कहा कि यह “भारत के इतिहास का सबसे बड़ा कॉर्पोरेट फ्रॉड” है। उन्होंने आरोप लगाया कि CBI और ED की मौजूदा जांच केवल फ्रॉड के सीमित हिस्से तक सिमटी है, जबकि बैंकों के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की जांच नहीं की जा रही। भूषण के अनुसार, लोन अप्रूवल की प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी की गई और फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स में भी हेरफेर हुआ।

ED की कार्रवाई और जब्त संपत्तियां

ED अब तक इस मामले में ₹10,117 करोड़ की संपत्तियां जब्त कर चुकी है। इनमें मुंबई के पाली हिल स्थित अनिल अंबानी का आवास, रिलायंस समूह की कई कंपनियों के बैंक बैलेंस, फिक्स्ड डिपॉजिट और अनलिस्टेड निवेश शामिल हैं। एजेंसी का दावा है कि रिलायंस होम फाइनेंस और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस में बड़े पैमाने पर फंड का गलत इस्तेमाल हुआ, जिससे यस बैंक को करीब ₹2,700 करोड़ का नुकसान हुआ।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जांच एजेंसियों की ओर से समय मांगा है। अब सभी की नजरें 10 दिन बाद दाखिल होने वाली रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिसके आधार पर सुप्रीम कोर्ट आगे की कार्रवाई तय करेगा। यह मामला न केवल कॉर्पोरेट गवर्नेंस बल्कि बैंकिंग निगरानी व्यवस्था पर भी अहम सवाल खड़े कर रहा है।

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