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हर घर तिरंगा: फिजी से सैन फ्रांसिस्को तक सूरज के साथ निकला झंडा, पीएम मोदी ने की 8 करोड़ की आजादी का निशान
भारत
‘मन की बात’ की 137वीं कड़ी में प्रधानमंत्री ने सूर्यपथ तिरंगा पहल की सराहना की, 54 भारतीय मिशनों और पोस्ट के जरिए तिरंगे की वैश्विक यात्रा कराई गई, जिसकी शुरुआत फिजी से हुई और समापन सैन फ्रांसिस्को में हुआ
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ‘मन की बात’ की 137वीं कड़ी में हर घर तिरंगा अभियान की व्यापक भागीदारी और इसके वैश्विक स्वरूप का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस वर्ष तिरंगे से जुड़ी गतिविधियां भारत तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि सूर्यपथ तिरंगा पहल के जरिए राष्ट्रीय ध्वज ने अलग-अलग समय क्षेत्रों में सूरज की दिशा के साथ एक विस्तृत वैश्विक यात्रा पूरी की। प्रधानमंत्री ने बताया कि सुवा, फिजी में सूरज की पहली किरण के साथ तिरंगा फहराया गया। इसके बाद एशिया, अफ्रीका और यूरोप में स्थित भारतीय मिशनों और पोस्ट पर क्रमशः तिरंगा फहराया गया और यह तटीय अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को तक पहुंचा।
54 मिशनों और पोस्ट से जुड़ी पहल
सूर्यपथ तिरंगा को हर घर तिरंगा 2026 के तहत वैश्विक स्तर पर आयोजित किया गया था। संस्कृति मंत्रालय के अनुसार इस पहल में 54 भारतीय मिशन और पोस्ट जुड़े थे। तिरंगे की यात्रा फिजी के सुवा से शुरू हुई और अलग-अलग समय क्षेत्रों में आगे बढ़ते हुए सैन फ्रांसिस्को तक पहुंची। सरकारी जानकारी के मुताबिक, फिजी में तिरंगा भारतीय समयानुसार रात 1:30 बजे फहराया गया था, जबकि सैन फ्रांसिस्को में यह क्रम रात 8:30 बजे IST तक पहुंचा। इस तरह सूरज के पूर्व से पश्चिम की ओर बढ़ने के साथ तिरंगे को भी एक मिशन से दूसरे मिशन तक पहुंचाने की प्रतीकात्मक तस्वीर सामने आई।
एशिया से अफ्रीका और यूरोप तक पहुंचा तिरंगा
सूर्यपथ तिरंगा में फिजी के बाद न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, जापान, दक्षिण कोरिया, चीन, इंडोनेशिया, वियतनाम, सिंगापुर, मलेशिया, थाईलैंड, म्यांमार, बांग्लादेश, भूटान, नेपाल, श्रीलंका और कृष्णा सहित कई स्थान शामिल रहे। इसके बाद तिरंगे की यात्रा अन्य महाद्वीपों में स्थित भारतीय मिशनों और पोस्ट तक आगे बढ़ेगी। यह पहल भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के वैश्विक समारोहों का हिस्सा थी। इसका उद्देश्य अलग-अलग देशों में मौजूद भारतीय समुदाय और भारतीय मिशनों को एक साझा राष्ट्रीय प्रतीक के जरिए जोड़ना था।
8 करोड़ से ज्यादा तिरंगा सेल्फी का जिक्र
प्रधानमंत्री मोदी ने 'मन की बात' में इस साल 8 करोड़ से ज्यादा तिरंगे सेल्फी अपलोड होने की जानकारी भी साझा की। उन्होंने देश में तिरंगे के प्रति लोगों की भागीदारी और उत्साह से उम्मीद जताई कि हर घर तिरंगे ने राष्ट्रीय भावना को और मजबूत किया है। इस साल अगस्त का महत्व कई राष्ट्रीय अवसरों के कारण भी रहा। प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय हथकरघा दिवस, भारत छोड़ो आंदोलन की वर्षगांठ, विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस, स्वतंत्रता दिवस और राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस का उल्लेख किया। उन्होंने यह भी कहा कि वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ के कारण यह साल और खास है।
‘सूरज जहां गया, तिरंगा भी वहां लहराया’
प्रधानमंत्री ने Suryapath Tiranga की कल्पना को सूरज की गति से जोड़ते हुए बताया कि जैसे-जैसे दिन दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में आगे बढ़ा, वैसे-वैसे भारतीय मिशनों और पोस्ट पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया। उन्होंने इस पहल में शामिल लोगों को बधाई दी। सरकार के अनुसार, यह केवल अलग-अलग देशों में स्वतंत्रता दिवस समारोह आयोजित करने तक सीमित पहल नहीं थी, बल्कि इसे एक सतत वैश्विक तिरंगा रिले के रूप में तैयार किया गया था। इसके जरिए भारतीय ध्वज को एक समय क्षेत्र से दूसरे समय क्षेत्र तक प्रतीकात्मक रूप से आगे बढ़ाया गया।
वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ से भी जुड़ाव अभियान
इस वर्ष वंदे मातरम की 150वीं वर्षगाँठ के सन्दर्भ में हर घर तिरंगा अभियान भी विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री ने 'मन की बात' में कहा कि गणतंत्र में स्वतंत्रता दिवस से जुड़े कार्यक्रमों और तिरंगे के प्रति लोगों की भागीदारी को इसी व्यापक राष्ट्रीय भावना से जोड़ा जाएगा।
सूर्यपथ तिरंगा के दौरान विभिन्न भारतीय मिशनों पर केवल ध्वजारोहण ही नहीं, बल्कि वंदे मातरम और जन गण मन के सामूहिक गायन जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। संस्कृति मंत्रालय ने इसे विदेशों में भारतीय समुदाय और मिशनों की भागीदारी वाली विशेष पहल के तौर पर दर्ज किया है।
दुनिया भर में भारतीय समुदाय की भागीदारी
विदेशों में रहने वाले भारतीयों के लिए स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर तिरंगा समारोह पहले से ही समुदाय को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण आयोजन रहा है। Suryapath Tiranga ने इसी गतिविधि को एक साझा समय-क्रम से जोड़ दिया, जिसमें अलग-अलग देशों में स्थित भारतीय मिशन अपने स्थानीय समय के अनुसार इस वैश्विक रिले का हिस्सा बने। इस पहल के जरिए भारत के स्वतंत्रता दिवस समारोह को एक ऐसी वैश्विक श्रृंखला के रूप में प्रस्तुत किया गया, जिसमें पहले सूर्योदय वाले स्थान से लेकर पश्चिमी तट पर स्थित सैन फ्रांसिस्को तक तिरंगे का क्रम बना रहा।
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