CBSE 12वीं रिजल्ट में सरकारी स्कूलों ने बनाया दबदबा, प्राइवेट स्कूल पीछे हुए

नेशनल डेस्क

By Rohit.P
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CBSE 12वीं रिजल्ट 2026 में JNV और KV का दबदबा, निजी स्कूल पिछड़े। भोपाल रीजन 19वें स्थान पर, छात्राओं ने हर कैटेगरी में बेहतर प्रदर्शन किया।

सीबीएसई 12वीं रिजल्ट 2026 ने मध्य प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था की तस्वीर को काफी हद तक स्पष्ट कर दिया है। जब रिजल्ट आया, तो जो आंकड़े सामने आए, उनसे पता चला कि सरकारी स्कूलों का प्रदर्शन निजी स्कूलों की तुलना में काफी बेहतर रहा। खासकर जवाहर नवोदय विद्यालय (JNV) और केंद्रीय विद्यालय (KV) ने एक बार फिर से शानदार नतीजे हासिल कर सबको चौंकाया है, और अपने पिछले प्रदर्शन को भी बरकरार रखा है। दूसरी ओर, सबसे ज्यादा छात्रों वाले स्वतंत्र यानी निजी स्कूलों का प्रदर्शन सबसे खराब रहा। इसका असर भोपाल रीजन की रैंकिंग पर भी पड़ा, जिससे यह देश के 22 रीजन में 19वें स्थान पर पहुंच गया। इस पूरे परिणाम में एक और बात साफ नजर आई कि हर श्रेणी में लड़कियों ने लड़कों से बेहतर प्रदर्शन किया और लगभग हर जगह लड़कियां आगे रहीं।

जवाहर नवोदय विद्यालयों ने सबसे अच्छा प्रदर्शन किया है। आंकड़ों के अनुसार, JNV का कुल पास प्रतिशत 98.16% रहा, जो सभी श्रेणियों में सबसे ऊपर है। यहां लड़कों का रिजल्ट 97.81% और लड़कियों का 98.73% रहा, हालांकि फर्क थोड़ा था, पर लगातार बेहतर नतीजे देखने को मिले। वहीं, केंद्रीय विद्यालयों ने भी अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखी और 97.90% पास प्रतिशत हासिल किया। KV में लड़कों का परिणाम 97.66% और लड़कियों का 98.11% रहा। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इन दोनों स्कूलों में अनुशासन, नियमित पढ़ाई और लगातार मॉनिटरिंग जैसे पहलू नतीजों को बेहतर बनाते हैं। दूसरी ओर, एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल (EMRS) का परिणाम 85.47% रहा, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बेहतर माना जाता है। यहां भी लड़कियों ने 86.89% के साथ बढ़त बनाई। सरकारी स्कूलों का कुल पास प्रतिशत 80.60% रहा, जिसमें लड़कों का 79.86% और लड़कियों का 80.88% था। कई विशेषज्ञ इसे संतोषजनक मानते हैं, हालांकि सुधार की काफी गुंजाइश अभी भी है।

निजी स्कूलों के प्रदर्शन पर सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है। आंकड़े बताते हैं कि सीबीएसई से जुड़े स्वतंत्र स्कूलों में 61,419 छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया था और 61,242 परीक्षा में शामिल हुए, मगर फिर भी पास प्रतिशत सिर्फ 76.85% रहा, जो सभी श्रेणियों में सबसे कम है। यहां लड़कों का रिजल्ट 74.12% और लड़कियों का 80.02% रहा। विशेषज्ञों का कहना है कि यह अंतर महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये स्कूल आमतौर पर ज्यादा फीस लेते हैं और बेहतर सुविधाओं का दावा करते हैं। फिर भी, नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे। शिक्षा जगत से जुड़े लोगों का मानना है कि पढ़ाई का दबाव, परीक्षा की तैयारी की कमी और छात्रों पर मानसिक तनाव जैसे कारण भी इस गिरावट के पीछे हो सकते हैं।

भोपाल रीजन में एक गंभीर बात यह सामने आई कि करीब 12.14% छात्र सभी विषयों में फेल हो गए। वहीं, लड़कों का पास प्रतिशत 76.87% और लड़कियों का 82.19% रहा, जिससे यह ट्रेंड साफ हो गया कि लड़कियां हर स्तर पर आगे रहीं। कुल मिलाकर, 1291 स्कूलों वाले भोपाल रीजन, जो देश का दूसरा सबसे बड़ा रीजन है, इस बार का रिजल्ट कई सवाल छोड़ गया, खासकर निजी स्कूलों की गुणवत्ता और छात्रों की सीखने की प्रक्रिया को लेकर।

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14 May 2026 By Rohit.P

CBSE 12वीं रिजल्ट में सरकारी स्कूलों ने बनाया दबदबा, प्राइवेट स्कूल पीछे हुए

नेशनल डेस्क

सीबीएसई 12वीं रिजल्ट 2026 ने मध्य प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था की तस्वीर को काफी हद तक स्पष्ट कर दिया है। जब रिजल्ट आया, तो जो आंकड़े सामने आए, उनसे पता चला कि सरकारी स्कूलों का प्रदर्शन निजी स्कूलों की तुलना में काफी बेहतर रहा। खासकर जवाहर नवोदय विद्यालय (JNV) और केंद्रीय विद्यालय (KV) ने एक बार फिर से शानदार नतीजे हासिल कर सबको चौंकाया है, और अपने पिछले प्रदर्शन को भी बरकरार रखा है। दूसरी ओर, सबसे ज्यादा छात्रों वाले स्वतंत्र यानी निजी स्कूलों का प्रदर्शन सबसे खराब रहा। इसका असर भोपाल रीजन की रैंकिंग पर भी पड़ा, जिससे यह देश के 22 रीजन में 19वें स्थान पर पहुंच गया। इस पूरे परिणाम में एक और बात साफ नजर आई कि हर श्रेणी में लड़कियों ने लड़कों से बेहतर प्रदर्शन किया और लगभग हर जगह लड़कियां आगे रहीं।

जवाहर नवोदय विद्यालयों ने सबसे अच्छा प्रदर्शन किया है। आंकड़ों के अनुसार, JNV का कुल पास प्रतिशत 98.16% रहा, जो सभी श्रेणियों में सबसे ऊपर है। यहां लड़कों का रिजल्ट 97.81% और लड़कियों का 98.73% रहा, हालांकि फर्क थोड़ा था, पर लगातार बेहतर नतीजे देखने को मिले। वहीं, केंद्रीय विद्यालयों ने भी अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखी और 97.90% पास प्रतिशत हासिल किया। KV में लड़कों का परिणाम 97.66% और लड़कियों का 98.11% रहा। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इन दोनों स्कूलों में अनुशासन, नियमित पढ़ाई और लगातार मॉनिटरिंग जैसे पहलू नतीजों को बेहतर बनाते हैं। दूसरी ओर, एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल (EMRS) का परिणाम 85.47% रहा, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बेहतर माना जाता है। यहां भी लड़कियों ने 86.89% के साथ बढ़त बनाई। सरकारी स्कूलों का कुल पास प्रतिशत 80.60% रहा, जिसमें लड़कों का 79.86% और लड़कियों का 80.88% था। कई विशेषज्ञ इसे संतोषजनक मानते हैं, हालांकि सुधार की काफी गुंजाइश अभी भी है।

निजी स्कूलों के प्रदर्शन पर सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है। आंकड़े बताते हैं कि सीबीएसई से जुड़े स्वतंत्र स्कूलों में 61,419 छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया था और 61,242 परीक्षा में शामिल हुए, मगर फिर भी पास प्रतिशत सिर्फ 76.85% रहा, जो सभी श्रेणियों में सबसे कम है। यहां लड़कों का रिजल्ट 74.12% और लड़कियों का 80.02% रहा। विशेषज्ञों का कहना है कि यह अंतर महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये स्कूल आमतौर पर ज्यादा फीस लेते हैं और बेहतर सुविधाओं का दावा करते हैं। फिर भी, नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे। शिक्षा जगत से जुड़े लोगों का मानना है कि पढ़ाई का दबाव, परीक्षा की तैयारी की कमी और छात्रों पर मानसिक तनाव जैसे कारण भी इस गिरावट के पीछे हो सकते हैं।

भोपाल रीजन में एक गंभीर बात यह सामने आई कि करीब 12.14% छात्र सभी विषयों में फेल हो गए। वहीं, लड़कों का पास प्रतिशत 76.87% और लड़कियों का 82.19% रहा, जिससे यह ट्रेंड साफ हो गया कि लड़कियां हर स्तर पर आगे रहीं। कुल मिलाकर, 1291 स्कूलों वाले भोपाल रीजन, जो देश का दूसरा सबसे बड़ा रीजन है, इस बार का रिजल्ट कई सवाल छोड़ गया, खासकर निजी स्कूलों की गुणवत्ता और छात्रों की सीखने की प्रक्रिया को लेकर।

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