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मिडिल ईस्ट संकट के बीच RBI का बड़ा फैसला, सरकार को मिलेगा रिकॉर्ड मुनाफा
बिजनेस डेस्क
मिडिल ईस्ट संकट के बीच RBI सरकार को अब तक का सबसे बड़ा डिविडेंड देने की तैयारी में है, सरकारी खजाने को बड़ी राहत मिलेगी।
मिडिल ईस्ट में तनाव और वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता के बीच भारत के लिए एक राहत भरी खबर आई है। भारतीय रिजर्व बैंक, जिसे हम RBI कहते हैं, इस बार केंद्र सरकार को अब तक का सबसे बड़ा लाभांश देने की योजना बना रहा है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, इस महीने होने वाली RBI बोर्ड की बैठक में इस पर अंतिम फैसला हो सकता है। ऐसा माना जा रहा है कि यह राशि पिछले साल के रिकॉर्ड को भी पार कर सकती है। जब दुनिया के कई देशों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है, तब भारत के सरकारी खजाने में आने वाला ये पैसा एक बड़ी ताकत साबित हो सकता है। आर्थिक मामलों से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि इससे सरकार को खर्च बढ़ाने और विकास परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
दरअसल, RBI हर साल अपने सरप्लस फंड का एक हिस्सा केंद्र सरकार को ट्रांसफर करता है। यह प्रक्रिया ‘इकोनॉमिक कैपिटल फ्रेमवर्क’ यानी ECF के तहत होती है। इसके मुताबिक, रिजर्व बैंक को अपनी बैलेंस शीट का एक हिस्सा जोखिम सुरक्षा फंड के तौर पर अलग रखना होता है। बाकी की राशि सरकार को दी जाती है। पिछले वित्त वर्ष में RBI ने सरकार को 2.69 लाख करोड़ रुपये का डिविडेंड दिया था, जिसने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए थे। इससे पहले यह आंकड़ा 2.11 लाख करोड़ रुपये था। अब जो संकेत मिल रहे हैं, उनके अनुसार इस बार आंकड़ा और बढ़ सकता है। वित्त मंत्रालय से जुड़े सूत्रों का कहना है कि विदेशी मुद्रा भंडार से मिली कमाई, बॉंड बाजार और ब्याज आय ने RBI की कमाई को मजबूत किया है। यही वजह है कि सरकार को इस बार ज्यादा लाभ मिलने की उम्मीद है।
वहीं, सरकारी बैंकों का प्रदर्शन भी सरकार के लिए राहत लेकर आया है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने लगातार चौथे साल अच्छा मुनाफा दर्ज किया है। वित्त वर्ष 2025-26 में इन बैंकों का कुल शुद्ध लाभ लगभग 1.98 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। खराब कर्ज में कमी और लोन ग्रोथ बढ़ने का असर अब साफ दिखाई दे रहा है। कई सरकारी बैंक अब रिकॉर्ड स्तर पर कमाई कर रहे हैं। इसी वजह से सरकार को RBI से ही नहीं, बल्कि बैंकों से भी बड़ा लाभांश मिलने वाला है। बजट में सरकार ने RBI और सरकारी बैंकों से 3.16 लाख करोड़ रुपये मिलने का अनुमान लगाया था, लेकिन मौजूदा हालात के मद्देनजर यह आंकड़ा और बढ़ सकता है। आर्थिक जानकार मानते हैं कि अगर वैश्विक हालात और खराब होते हैं, तब भी भारत के पास खर्च करने के लिए पर्याप्त वित्तीय ताकत बनी रहेगी।
सरकार के लिए यह पैसा इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे बिना नए टैक्स लगाए इंफ्रास्ट्रक्चर, ग्रामीण योजनाओं और सामाजिक योजनाओं पर खर्च बढ़ाया जा सकता है। मिडिल ईस्ट संकट के चलते कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है और इसका असर दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ रहा है। हालांकि, भारत की स्थिति अभी संतुलित नजर आ रही है। टैक्स कलेक्शन में भी बढ़ोतरी हो रही है और गैर-कर राजस्व लगातार मजबूत हो रहा है। ऐसे में सरकार के पास विकास योजनाओं को जारी रखने का अतिरिक्त स्पेस बनता दिख रहा है।
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मिडिल ईस्ट संकट के बीच RBI का बड़ा फैसला, सरकार को मिलेगा रिकॉर्ड मुनाफा
बिजनेस डेस्क
मिडिल ईस्ट में तनाव और वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता के बीच भारत के लिए एक राहत भरी खबर आई है। भारतीय रिजर्व बैंक, जिसे हम RBI कहते हैं, इस बार केंद्र सरकार को अब तक का सबसे बड़ा लाभांश देने की योजना बना रहा है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, इस महीने होने वाली RBI बोर्ड की बैठक में इस पर अंतिम फैसला हो सकता है। ऐसा माना जा रहा है कि यह राशि पिछले साल के रिकॉर्ड को भी पार कर सकती है। जब दुनिया के कई देशों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है, तब भारत के सरकारी खजाने में आने वाला ये पैसा एक बड़ी ताकत साबित हो सकता है। आर्थिक मामलों से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि इससे सरकार को खर्च बढ़ाने और विकास परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
दरअसल, RBI हर साल अपने सरप्लस फंड का एक हिस्सा केंद्र सरकार को ट्रांसफर करता है। यह प्रक्रिया ‘इकोनॉमिक कैपिटल फ्रेमवर्क’ यानी ECF के तहत होती है। इसके मुताबिक, रिजर्व बैंक को अपनी बैलेंस शीट का एक हिस्सा जोखिम सुरक्षा फंड के तौर पर अलग रखना होता है। बाकी की राशि सरकार को दी जाती है। पिछले वित्त वर्ष में RBI ने सरकार को 2.69 लाख करोड़ रुपये का डिविडेंड दिया था, जिसने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए थे। इससे पहले यह आंकड़ा 2.11 लाख करोड़ रुपये था। अब जो संकेत मिल रहे हैं, उनके अनुसार इस बार आंकड़ा और बढ़ सकता है। वित्त मंत्रालय से जुड़े सूत्रों का कहना है कि विदेशी मुद्रा भंडार से मिली कमाई, बॉंड बाजार और ब्याज आय ने RBI की कमाई को मजबूत किया है। यही वजह है कि सरकार को इस बार ज्यादा लाभ मिलने की उम्मीद है।
वहीं, सरकारी बैंकों का प्रदर्शन भी सरकार के लिए राहत लेकर आया है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने लगातार चौथे साल अच्छा मुनाफा दर्ज किया है। वित्त वर्ष 2025-26 में इन बैंकों का कुल शुद्ध लाभ लगभग 1.98 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। खराब कर्ज में कमी और लोन ग्रोथ बढ़ने का असर अब साफ दिखाई दे रहा है। कई सरकारी बैंक अब रिकॉर्ड स्तर पर कमाई कर रहे हैं। इसी वजह से सरकार को RBI से ही नहीं, बल्कि बैंकों से भी बड़ा लाभांश मिलने वाला है। बजट में सरकार ने RBI और सरकारी बैंकों से 3.16 लाख करोड़ रुपये मिलने का अनुमान लगाया था, लेकिन मौजूदा हालात के मद्देनजर यह आंकड़ा और बढ़ सकता है। आर्थिक जानकार मानते हैं कि अगर वैश्विक हालात और खराब होते हैं, तब भी भारत के पास खर्च करने के लिए पर्याप्त वित्तीय ताकत बनी रहेगी।
सरकार के लिए यह पैसा इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे बिना नए टैक्स लगाए इंफ्रास्ट्रक्चर, ग्रामीण योजनाओं और सामाजिक योजनाओं पर खर्च बढ़ाया जा सकता है। मिडिल ईस्ट संकट के चलते कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है और इसका असर दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ रहा है। हालांकि, भारत की स्थिति अभी संतुलित नजर आ रही है। टैक्स कलेक्शन में भी बढ़ोतरी हो रही है और गैर-कर राजस्व लगातार मजबूत हो रहा है। ऐसे में सरकार के पास विकास योजनाओं को जारी रखने का अतिरिक्त स्पेस बनता दिख रहा है।
