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संसद बजट सत्र में LPG संकट पर तीखी बहस: कीर्ति आजाद के सवाल पर मनसुख मांडविया का जवाब, सदन में बढ़ा सियासी तापमान
National
लोकसभा में प्रश्नकाल बिना व्यवधान चला, लेकिन LPG कीमतों और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर सरकार-विपक्ष आमने-सामने; स्पीकर ओम बिरला ने सांसदों से मर्यादा बनाए रखने की अपील की।
नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण के छठे दिन सोमवार को लोकसभा में एक बार फिर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक नोकझोंक देखने को मिली। प्रश्नकाल के दौरान तृणमूल कांग्रेस सांसद कीर्ति आजाद द्वारा उठाए गए सवाल पर केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया ने जवाब दिया, जिसके बाद सदन में कुछ समय के लिए सियासी माहौल गरमा गया। इस बीच विपक्षी दल देश में कथित एलपीजी संकट और रसोई गैस की बढ़ती कीमतों को लेकर सरकार पर लगातार दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
सोमवार को लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही कुछ विपक्षी सांसदों ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और उसके भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ने वाले असर को लेकर तत्काल चर्चा की मांग की। हालांकि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने स्पष्ट किया कि प्रश्नकाल के बाद उन्हें अपनी बात रखने का अवसर दिया जाएगा। इसके बाद लंबे समय बाद प्रश्नकाल बिना किसी बड़े व्यवधान के पूरा हो सका।
प्रश्नकाल के दौरान टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने एलपीजी आपूर्ति और कीमतों से जुड़े मुद्दे उठाए। इस पर केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया ने सरकार की ओर से जवाब देते हुए कहा कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता और पश्चिम एशिया की स्थिति के बावजूद भारत में गैस आपूर्ति बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार घरेलू उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ न पड़े, इसके लिए विभिन्न विकल्पों पर काम कर रही है। मंत्री के जवाब के बाद कुछ विपक्षी सांसदों ने सरकार की नीति पर सवाल उठाए, जिससे सदन में हल्की नोकझोंक भी हुई।
दरअसल, पिछले सप्ताह से विपक्षी दल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी, ऊर्जा सुरक्षा और महंगाई के मुद्दे को लेकर सरकार पर हमलावर हैं। 13 मार्च को भी इसी मुद्दे पर विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर में प्रदर्शन किया था और आठ निलंबित सांसदों की बहाली की मांग उठाई थी। हंगामे के कारण कई बार सदन की कार्यवाही बाधित भी हुई थी।
इससे पहले विपक्ष ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पद से हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव भी लाया था। हालांकि दो दिन चली बहस के बाद यह प्रस्ताव सदन में खारिज हो गया। विपक्ष का आरोप था कि अध्यक्ष सदन की कार्यवाही में सरकार के पक्ष में पक्षपात कर रहे हैं, जबकि सरकार ने इन आरोपों को निराधार बताया।
संसद में लगातार हो रहे व्यवधानों के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने रविवार को सभी सांसदों को एक खुला पत्र लिखकर संसदीय परंपराओं और मर्यादा को बनाए रखने की अपील की। अपने पत्र में उन्होंने कहा कि बैनर, पोस्टर और नारेबाजी जैसी गतिविधियां संसद की गरिमा को प्रभावित करती हैं। उन्होंने सभी दलों के नेताओं से अपने सदस्यों में अनुशासन बनाए रखने का आग्रह किया।
राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और उसके कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में आई अनिश्चितता आने वाले दिनों में संसद में बहस का बड़ा मुद्दा बनी रह सकती है। सरकार का कहना है कि वह स्थिति पर नजर रखे हुए है, जबकि विपक्ष महंगाई और गैस की कीमतों को लेकर संसद और सड़क दोनों जगह सरकार को घेरने की तैयारी में है।
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