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होर्मुज स्ट्रेट विवाद गहराया: जापान-ऑस्ट्रेलिया ने वॉरशिप भेजने से किया इनकार, ट्रम्प ने NATO को दी चेतावनी
नेशनल न्यूज
अमेरिका-इजराइल और ईरान युद्ध के बीच वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर तनाव बढ़ा; ईरान ने सेजिल बैलिस्टिक मिसाइल से जवाबी हमला किया, दुबई एयरपोर्ट के पास ड्रोन हमले से हड़कंप।
अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी युद्ध के 17वें दिन वैश्विक राजनीति और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर तनाव और गहरा गया है। होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा को लेकर अमेरिका की अपील के बावजूद जापान और ऑस्ट्रेलिया ने अपने युद्धपोत भेजने से इनकार कर दिया है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सहयोगी देशों पर दबाव बढ़ाते हुए चेतावनी दी कि यदि NATO देश इस रणनीतिक समुद्री मार्ग को खुला रखने में मदद नहीं करते हैं तो गठबंधन का भविष्य प्रभावित हो सकता है।
जापान की प्रधानमंत्री सना ताकाइची ने संसद में स्पष्ट किया कि टोक्यो फिलहाल होर्मुज स्ट्रेट में तेल टैंकरों की सुरक्षा के लिए नौसेना तैनात करने की योजना नहीं बना रहा है। जापान अपनी लगभग 90 प्रतिशत कच्चे तेल की आपूर्ति इसी समुद्री मार्ग से प्राप्त करता है, जिसके कारण क्षेत्र में बढ़ता तनाव उसकी ऊर्जा सुरक्षा के लिए चुनौती बन गया है। युद्ध के कारण तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित होने के बाद जापान ने अपने रणनीतिक तेल भंडार से आपूर्ति जारी करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
ऑस्ट्रेलिया ने भी अमेरिकी अपील से दूरी बनाते हुए कहा कि वह इस क्षेत्र में युद्धपोत नहीं भेजेगा। हालांकि कैनबरा ने संयुक्त अरब अमीरात में मौजूद अपने नागरिकों की सहायता के लिए सैन्य विमान उपलब्ध कराने की बात कही है। ऑस्ट्रेलिया ऊर्जा निर्यातक देश है, लेकिन पेट्रोल, डीजल और जेट ईंधन के लिए वह आयात पर निर्भर रहता है, जिनमें से एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आता है।
दरअसल, होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत इसी संकरे समुद्री रास्ते से गुजरता है। ईरान और ओमान के बीच स्थित यह जलडमरूमध्य मध्य-पूर्व के तेल को एशिया, यूरोप और अमेरिका तक पहुंचाने का प्रमुख मार्ग है। युद्ध के कारण इस मार्ग की सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ गई है।
इसी बीच ईरान ने दावा किया है कि उसने इजराइल के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए ‘सेजिल’ बैलिस्टिक मिसाइल का इस्तेमाल किया है। यह ठोस ईंधन से चलने वाली लंबी दूरी की मिसाइल है, जिसकी मारक क्षमता लगभग 2000 से 2500 किलोमीटर बताई जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार इसकी पहुंच मध्य-पूर्व से लेकर दक्षिणी रूस, पश्चिमी चीन और दक्षिण एशिया के कुछ हिस्सों तक हो सकती है।
तनाव के बीच दुबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास एक ईंधन टैंक को निशाना बनाए जाने से भी क्षेत्र में अफरा-तफरी फैल गई। हमले के बाद सुरक्षा कारणों से कुछ उड़ानों को दूसरे हवाई अड्डों की ओर मोड़ दिया गया। हालांकि अधिकारियों के अनुसार आग पर काबू पा लिया गया और किसी बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है।
इस बीच संयुक्त अरब अमीरात ने सोशल मीडिया पर फर्जी वीडियो और गलत जानकारी फैलाने के आरोप में 35 लोगों की गिरफ्तारी के आदेश दिए हैं, जिनमें 19 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि युद्ध के दौरान अफवाहों और दुष्प्रचार को रोकने के लिए यह कार्रवाई की गई है।
मध्य-पूर्व में बढ़ते सैन्य टकराव और ऊर्जा आपूर्ति की अनिश्चितता के कारण वैश्विक बाजारों पर भी दबाव बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज स्ट्रेट में स्थिति और बिगड़ती है तो इसका सीधा असर तेल कीमतों, वैश्विक व्यापार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है।
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