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भारत-EU की ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’: लग्जरी कारों पर टैरिफ 110% से घटकर 10%, प्रीमियम शराब होगी सस्ती
अंतराष्ट्रीय न्यूज
16वें भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन में ऐलान, 200 करोड़ लोगों का साझा बाजार बनेगा; वैश्विक GDP का 25% कवर करेगा समझौता
भारत और यूरोपीय यूनियन (EU) के बीच लंबे समय से लंबित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर आखिरकार मुहर लग गई है। 16वें भारत-EU शिखर सम्मेलन के दौरान मंगलवार को दोनों पक्षों ने इस ऐतिहासिक ट्रेड डील का औपचारिक ऐलान किया। समझौते के तहत भारत में यूरोप से आयात होने वाली लग्जरी कारों—जैसे BMW और मर्सिडीज—पर आयात शुल्क को मौजूदा 110% से चरणबद्ध तरीके से घटाकर 10% तक लाया जाएगा। साथ ही यूरोपीय शराब, वाइन और बीयर पर लगने वाला ऊंचा टैरिफ भी कम होगा, जिससे ये उत्पाद भारतीय बाजार में सस्ते हो सकते हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समझौते को “दुनिया में चर्चा का विषय” बताते हुए कहा कि भारत-EU FTA वैश्विक व्यापार के लिए एक नया मानक स्थापित करेगा। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ करार दिया और कहा कि यह अब तक का सबसे व्यापक भारत-EU समझौता है।
क्या है समझौते का दायरा
यह डील करीब 200 करोड़ लोगों के साझा बाजार का निर्माण करती है और दुनिया की कुल GDP के लगभग 25% हिस्से को कवर करती है। समझौते के तहत 90% से अधिक वस्तुओं पर टैरिफ को 5 से 10 वर्षों में चरणबद्ध तरीके से समाप्त किया जाएगा। यूरोप से आने वाले मेडिकल और सर्जिकल उपकरणों के लगभग 90% आयात को टैक्स-फ्री किया गया है। विमानन, अंतरिक्ष, मशीनरी और रसायन जैसे क्षेत्रों में भी आयात शुल्क में बड़ी राहत दी गई है।
भारत को क्या फायदा
सरकार के मुताबिक, इस समझौते से भारतीय टेक्सटाइल, चमड़ा, फुटवियर, जेम्स-ज्वेलरी और हस्तशिल्प जैसे श्रम आधारित उद्योगों को यूरोपीय बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी। फार्मा और केमिकल सेक्टर में व्यापार के 20–30% तक बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। इसके अलावा, डिफेंस और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग में यूरोपीय निवेश बढ़ने से भारत में रोजगार के नए अवसर बन सकते हैं।
यूरोप के लिए क्या बदलेगा
EU को भारत जैसे तेजी से बढ़ते उपभोक्ता बाजार तक व्यापक पहुंच मिलेगी। प्रीमियम कार, शराब, वाइन और औद्योगिक उत्पादों पर शुल्क घटने से यूरोपीय कंपनियों की भारत में बिक्री बढ़ने की उम्मीद है। साथ ही IT, इंजीनियरिंग और बिजनेस सर्विसेज में यूरोपीय कंपनियों के लिए नए अवसर खुलेंगे।
क्यों अहम है यह डील
यह समझौता ऐसे समय हुआ है जब वैश्विक स्तर पर व्यापार तनाव बढ़ा हुआ है और देश वैकल्पिक सप्लाई चेन तलाश रहे हैं। अमेरिका और चीन पर निर्भरता कम करने की रणनीति के तहत भारत और EU दोनों के लिए यह डील रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
हालांकि कृषि और डेयरी सेक्टर को इस समझौते से बाहर रखा गया है, लेकिन निवेश सुरक्षा, GI टैग और रक्षा सहयोग जैसे मुद्दों पर बातचीत आगे भी जारी रहेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समझौते को प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो आने वाले वर्षों में भारत-EU व्यापार दोगुना हो सकता है।
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भारत और यूरोपीय यूनियन (EU) के बीच लंबे समय से लंबित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर आखिरकार मुहर लग गई है। 16वें भारत-EU शिखर सम्मेलन के दौरान मंगलवार को दोनों पक्षों ने इस ऐतिहासिक ट्रेड डील का औपचारिक ऐलान किया। समझौते के तहत भारत में यूरोप से आयात होने वाली लग्जरी कारों—जैसे BMW और मर्सिडीज—पर आयात शुल्क को मौजूदा 110% से चरणबद्ध तरीके से घटाकर 10% तक लाया जाएगा। साथ ही यूरोपीय शराब, वाइन और बीयर पर लगने वाला ऊंचा टैरिफ भी कम होगा, जिससे ये उत्पाद भारतीय बाजार में सस्ते हो सकते हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समझौते को “दुनिया में चर्चा का विषय” बताते हुए कहा कि भारत-EU FTA वैश्विक व्यापार के लिए एक नया मानक स्थापित करेगा। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ करार दिया और कहा कि यह अब तक का सबसे व्यापक भारत-EU समझौता है।
क्या है समझौते का दायरा
यह डील करीब 200 करोड़ लोगों के साझा बाजार का निर्माण करती है और दुनिया की कुल GDP के लगभग 25% हिस्से को कवर करती है। समझौते के तहत 90% से अधिक वस्तुओं पर टैरिफ को 5 से 10 वर्षों में चरणबद्ध तरीके से समाप्त किया जाएगा। यूरोप से आने वाले मेडिकल और सर्जिकल उपकरणों के लगभग 90% आयात को टैक्स-फ्री किया गया है। विमानन, अंतरिक्ष, मशीनरी और रसायन जैसे क्षेत्रों में भी आयात शुल्क में बड़ी राहत दी गई है।
भारत को क्या फायदा
सरकार के मुताबिक, इस समझौते से भारतीय टेक्सटाइल, चमड़ा, फुटवियर, जेम्स-ज्वेलरी और हस्तशिल्प जैसे श्रम आधारित उद्योगों को यूरोपीय बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी। फार्मा और केमिकल सेक्टर में व्यापार के 20–30% तक बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। इसके अलावा, डिफेंस और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग में यूरोपीय निवेश बढ़ने से भारत में रोजगार के नए अवसर बन सकते हैं।
यूरोप के लिए क्या बदलेगा
EU को भारत जैसे तेजी से बढ़ते उपभोक्ता बाजार तक व्यापक पहुंच मिलेगी। प्रीमियम कार, शराब, वाइन और औद्योगिक उत्पादों पर शुल्क घटने से यूरोपीय कंपनियों की भारत में बिक्री बढ़ने की उम्मीद है। साथ ही IT, इंजीनियरिंग और बिजनेस सर्विसेज में यूरोपीय कंपनियों के लिए नए अवसर खुलेंगे।
क्यों अहम है यह डील
यह समझौता ऐसे समय हुआ है जब वैश्विक स्तर पर व्यापार तनाव बढ़ा हुआ है और देश वैकल्पिक सप्लाई चेन तलाश रहे हैं। अमेरिका और चीन पर निर्भरता कम करने की रणनीति के तहत भारत और EU दोनों के लिए यह डील रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
हालांकि कृषि और डेयरी सेक्टर को इस समझौते से बाहर रखा गया है, लेकिन निवेश सुरक्षा, GI टैग और रक्षा सहयोग जैसे मुद्दों पर बातचीत आगे भी जारी रहेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समझौते को प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो आने वाले वर्षों में भारत-EU व्यापार दोगुना हो सकता है।
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