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होर्मुज से सुरक्षित निकला भारतीय LPG जहाज ‘शिवालिक’, युद्ध के बीच बड़ी राहत
अंतराष्ट्रीय न्यूज
ईरान-अमेरिका-इजरायल तनाव के बीच भारत के गैस टैंकर की सुरक्षित आवाजाही; ट्रम्प ने खार्ग आइलैंड पर हमले का दावा
ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच जारी संघर्ष के बीच भारत के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। रसोई गैस (LPG) ढोने वाला भारतीय जहाज ‘शिवालिक’ शुक्रवार देर रात होर्मुज स्ट्रेट को सुरक्षित पार कर गया। इस समुद्री रास्ते पर युद्ध के कारण जोखिम बढ़ गया है, इसलिए जहाज का सुरक्षित निकलना भारत के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मरीन ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म के अनुसार यह टैंकर 7 मार्च को कतर से अमेरिका की ओर रवाना हुआ था। यह जहाज भारत की सरकारी कंपनी शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के बेड़े का हिस्सा है और इसमें करीब 55 हजार टन एलपीजी ले जाने की क्षमता है।
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक तेल और गैस सप्लाई का एक बेहद अहम मार्ग है। दुनिया के कुल कच्चे तेल का लगभग पांचवां हिस्सा इसी समुद्री रास्ते से गुजरता है, इसलिए इस क्षेत्र में किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि से वैश्विक ऊर्जा बाजार प्रभावित हो सकता है।
खार्ग आइलैंड पर हमले का अमेरिकी दावा
इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि अमेरिकी बलों ने फारस की खाड़ी में स्थित खार्ग आइलैंड पर ईरान के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि हालात और बिगड़ते हैं तो ईरान के तेल ढांचे को भी निशाना बनाया जा सकता है। खार्ग आइलैंड ईरान के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम है क्योंकि देश के करीब 80 से 90 प्रतिशत कच्चे तेल का निर्यात यहीं से होता है।
इस द्वीप पर बड़े ऑयल टर्मिनल, स्टोरेज टैंक और पाइपलाइन मौजूद हैं, जिनसे प्रतिदिन लाखों बैरल तेल जहाजों में भरा जाता है।
ईरान के नए सुप्रीम लीडर को लेकर चर्चा
अंतरराष्ट्रीय मीडिया की कुछ रिपोर्टों में यह दावा भी किया गया है कि हालिया हमलों में ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई गंभीर रूप से घायल हुए हैं। बताया जा रहा है कि उन्हें तेहरान के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हालांकि इन खबरों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
मुजतबा खामेनेई को हाल ही में ईरान का सर्वोच्च नेता नियुक्त किया गया था। यह फैसला उनके पिता और पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के बाद लिया गया था।
होर्मुज स्ट्रेट में कम हुई जहाजों की आवाजाही
संघर्ष के चलते होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों की संख्या भी कम हो गई है। हालिया आंकड़ों के अनुसार इस महीने अब तक केवल कुछ दर्जन जहाज ही इस मार्ग से गुजर पाए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर क्षेत्रीय तनाव लंबा चलता है तो तेल और गैस की सप्लाई, शिपिंग रूट्स और वैश्विक व्यापार पर बड़ा असर पड़ सकता है।
क्षेत्र में बढ़ी सैन्य गतिविधियां
मिडिल ईस्ट में हालात को देखते हुए कई देशों ने अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है। अमेरिका ने भी अतिरिक्त सैनिकों और युद्धपोतों को इस इलाके में भेजने का फैसला किया है। वहीं क्षेत्रीय देशों में सुरक्षा सतर्कता बढ़ा दी गई है।
ऊर्जा और सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि यह संघर्ष केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकता है, क्योंकि तेल और गैस की सप्लाई का बड़ा हिस्सा इसी इलाके से होकर गुजरता है।
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