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आज का पंचांग, चैत्र कृष्ण दशमी तिथि जानें शुभ मुहूर्त, राहुकाल और ग्रहों की स्थिति
धर्म डेस्क
आज शनिवार, 14 मार्च 2026 को चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि प्रातः 08:10 बजे तक रहेगी। इसके बाद एकादशी तिथि प्रारंभ हो जाएगी। आज चंद्रमा उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में रहेंगे, जो अनुशासन और परिश्रम का संकेत देता है।
हिंदू पंचांग के अनुसार शनिवार, 14 मार्च 2026 को चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि प्रातः 08:10 बजे तक रहेगी। इसके बाद एकादशी तिथि का आरंभ होगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार आज चंद्रमा उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में स्थित रहेंगे, जिसका स्वामी सूर्यदेव माने जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह नक्षत्र परिश्रम, अनुशासन और दृढ़ संकल्प का प्रतीक माना जाता है।
पंचांग के मुताबिक आज वरीयान योग का संयोग बन रहा है, जो प्रातः 10:43 बजे तक प्रभावी रहेगा। इसके बाद परिघ योग प्रारंभ होगा। इसी तरह विष्टि करण प्रातः 08:10 बजे तक रहेगा, जिसके बाद बव करण शुरू होगा और यह रात्रि 08:48 बजे तक प्रभावी रहेगा। ज्योतिषीय मान्यता है कि ऐसे योग कई कार्यों को आगे बढ़ाने और योजनाओं को अमल में लाने के लिए अनुकूल माने जाते हैं।
आज सूर्योदय सुबह 06:32 बजे और सूर्यास्त शाम 06:29 बजे होगा। वहीं चंद्रमा का उदय 15 मार्च की सुबह 04:10 बजे और चंद्रास्त दोपहर 01:53 बजे बताया गया है। ग्रहों की स्थिति के अनुसार सूर्य वर्तमान में कुंभ राशि में स्थित हैं और यह स्थिति 15 मार्च की रात 01:08 बजे तक बनी रहेगी। वहीं चंद्रमा सुबह 09:33 बजे तक धनु राशि में रहेंगे, जिसके बाद वे मकर राशि में प्रवेश करेंगे।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनिवार के दिन अभिजीत मुहूर्त का विशेष महत्व होता है। आज यह मुहूर्त दोपहर 12:07 बजे से 12:54 बजे तक रहेगा। इस समय को नए कार्यों की शुरुआत, पूजा-पाठ, निवेश या महत्वपूर्ण निर्णय लेने के लिए शुभ माना जाता है। इसके अलावा रात में 09:56 बजे से 11:40 बजे तक अमृत काल रहेगा, जिसे भी अनुकूल समय माना जाता है।
वहीं कुछ समय ऐसे भी होते हैं जिन्हें ज्योतिष शास्त्र में अशुभ माना जाता है। आज राहुकाल सुबह 09:31 बजे से 11:01 बजे तक रहेगा। इसके अलावा गुलिक काल सुबह 06:32 से 08:02 बजे तक और यमगण्ड दोपहर 02:00 से 03:30 बजे तक रहेगा। मान्यता है कि इन समयों में नए और महत्वपूर्ण कार्यों की शुरुआत करने से बचना चाहिए।
आज चंद्रमा उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में विराजमान रहेंगे, जो 15 मार्च की रात्रि 04:49 बजे तक प्रभावी रहेगा। इस नक्षत्र की देवता विश्वेदेव माने जाते हैं और इसका प्रतीक हाथी का दांत या छोटा पलंग बताया जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यह नक्षत्र व्यक्ति में धैर्य, अनुशासन और लक्ष्य की ओर बढ़ने की प्रेरणा देता है।
धार्मिक परंपराओं में शनिवार को भगवान शनिदेव की पूजा का भी विशेष महत्व माना जाता है। कई श्रद्धालु इस दिन पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाते हैं और दान-पुण्य करते हैं।
पंचांग से जुड़ी जानकारी धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है। विभिन्न क्षेत्रों में समय और परंपराओं में थोड़ा अंतर संभव है।
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