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सोशल बलूनी पब्लिक स्कूल, देहरादून, उत्तराखंड की कक्षाओं तक पहुँचा भारत का पहला मानसिक स्वास्थ्य शिक्षा पाठ्यक्रम
डिजिटल डेस्क
देहरादून के सोशल बलूनी पब्लिक स्कूल में मानसिक स्वास्थ्य शिक्षा की नई शुरुआत
ऊपर दिखाई दे रही तस्वीर देहरादून के सोशल बलूनी पब्लिक स्कूल, देहरादून, उत्तराखंड के शिक्षकों की एक महत्वपूर्ण पहल को दर्शाती है। इन शिक्षकों ने The Mind Sync द्वारा तैयार किए गए भारत के पहले मानसिक स्वास्थ्य शिक्षा पाठ्यक्रम को अपने विद्यालय में लागू करके छात्रों को सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। ऐसे समय में जब स्कूलों में मानसिक स्वास्थ्य पर अभी भी कम ही चर्चा होती है, यह पहल एक स्पष्ट संदेश देती है — आज की शिक्षा बच्चों को केवल परीक्षाओं के लिए नहीं, बल्कि जीवन के लिए भी तैयार करनी चाहिए।
इस पहल को अपनाकर शिक्षक पारंपरिक शिक्षण की सीमाओं से आगे बढ़ रहे हैं। वे प्रमाणित मानसिक स्वास्थ्य शिक्षकों के रूप में स्वयं को प्रशिक्षित कर रहे हैं, ताकि वे छात्रों को अपनी भावनाओं को समझने, धैर्य विकसित करने और जीवन की चुनौतियों का सामना करने में मार्गदर्शन दे सकें। इस प्रक्रिया में वे केवल अच्छे विद्यार्थी ही नहीं, बल्कि एक मजबूत और स्वस्थ समाज का निर्माण भी कर रहे हैं।
विकसित भारत 2047 का सपना — एक पूर्ण विकसित, आत्मनिर्भर और समृद्ध राष्ट्र — केवल शैक्षणिक उत्कृष्टता के आधार पर पूरा नहीं हो सकता। देश को ऐसे युवाओं की आवश्यकता है जो आत्मविश्वासी हों, भावनात्मक रूप से मजबूत हों, चुनौतियों का सामना कर सकें और सोच-समझकर निर्णय ले सकें। यही दृष्टि The Mind Sync साकार करना चाहता है। इस मिशन से जुड़कर सोशल बलूनी पब्लिक स्कूल ने एक महत्वपूर्ण सच्चाई को पहचाना है — बुद्धिमत्ता और भावनात्मक मजबूती का विकास साथ-साथ होना चाहिए।
आज भारत के छात्रों के सामने जो वास्तविकताएँ हैं, वे चिंताजनक हैं। बहुत कम उम्र से ही बच्चों पर पढ़ाई का भारी दबाव होता है। अच्छे अंक, रैंक और प्रतियोगी परीक्षाओं की दौड़ बहुत जल्दी शुरू हो जाती है। इसके साथ-साथ सोशल मीडिया ने भी नई चुनौतियाँ पैदा कर दी हैं। लगातार स्क्रीन टाइम, सोशल मीडिया पर तुलना, साइबर-बुलिंग, साथियों का दबाव और असफलता का डर लाखों छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहे हैं।
फिर भी अधिकांश बच्चों को यह नहीं सिखाया जाता कि वे तनाव को कैसे संभालें, अपनी भावनाओं को कैसे व्यक्त करें, स्वस्थ रिश्ते कैसे बनाएं या असफलता का सामना कैसे करें। कई बच्चे चुपचाप इन दबावों से जूझते रहते हैं। यह मौन संकट हर साल बढ़ता जा रहा है, जिससे मानसिक स्वास्थ्य शिक्षा की आवश्यकता और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। इसी आवश्यकता को समझते हुए सोशल बलूनी पब्लिक स्कूल ने मानसिक स्वास्थ्य शिक्षा को नियमित पढ़ाई का हिस्सा बनाकर अगली पीढ़ी को भविष्य के लिए तैयार करने की दिशा में निर्णायक कदम उठाया है।
भारत के पहले मानसिक स्वास्थ्य शिक्षा पाठ्यक्रम को अपनी कक्षाओं में लाकर सोशल बलूनी पब्लिक स्कूल, देहरादून, उत्तराखंड इस परिवर्तन का नेतृत्व करने वाले संस्थानों में शामिल हो गया है। संदेश स्पष्ट है — सबसे मजबूत छात्र वे नहीं हैं जो केवल अधिक अंक प्राप्त करते हैं, बल्कि वे हैं जिनमें आत्मविश्वास, भावनात्मक शक्ति और जीवन की चुनौतियों का सामना करने की क्षमता होती है।
वास्तविक बदलाव के लिए परिवारों की भागीदारी भी आवश्यक है। इसे सुनिश्चित करने के लिए अभिभावकों के लिए विशेष सत्र आयोजित किए जाते हैं, जिनमें उन्हें यह समझाया जाता है कि वे घर पर अपने बच्चों का भावनात्मक रूप से कैसे सहयोग कर सकते हैं। छात्रों और अभिभावकों को MindSyncKids App का भी उपयोग मिलेगा, जिसमें रोज़मर्रा की सरल गतिविधियाँ और अभ्यास शामिल हैं, जो भावनात्मक बुद्धिमत्ता को एक आदत के रूप में विकसित करने में मदद करते हैं।
इस कार्यक्रम में कौशल-आधारित मूल्यांकन भी शामिल हैं, जो प्रत्येक छात्र के भावनात्मक विकास को मापते हैं। इन आकलनों से यह पता चलता है कि किन छात्रों को अतिरिक्त सहयोग की आवश्यकता है, जिससे शिक्षक समय पर मार्गदर्शन और सहायता प्रदान कर सकें। इससे यह सुनिश्चित होता है कि हर बच्चे को ध्यान और समर्थन मिले और कोई भी छात्र पीछे न रह जाए। यह पहल केवल एक बार की कार्यशाला नहीं, बल्कि एक निरंतर विकास की यात्रा है।
हार्वर्ड प्रशिक्षित मनोचिकित्सक डॉ. शिवम दुबे द्वारा परिकल्पित और भारत में संस्थापक श्री मानस दुबे के नेतृत्व में संचालित The Mind Sync, कक्षा 1 से 10 तक के छात्रों के लिए तैयार किया गया भारत का पहला संरचित 30-सप्ताह का मानसिक स्वास्थ्य शिक्षा पाठ्यक्रम है।
इस कार्यक्रम के माध्यम से छात्र जीवन के महत्वपूर्ण कौशल सीखते हैं, जैसे धैर्य, तनाव प्रबंधन, स्वस्थ संबंध बनाना, एकाग्रता और प्रभावी अध्ययन आदतें। यह सीख केवल सिद्धांत तक सीमित नहीं है। संवादात्मक गतिविधियाँ, वास्तविक जीवन की चर्चाएँ और व्यावहारिक अभ्यास यह सुनिश्चित करते हैं कि छात्र जो सीखते हैं उसे केवल कक्षा में ही नहीं, बल्कि घर और अपने समुदाय में भी लागू करें।
न्यूरोसाइंस और मनोविज्ञान पर आधारित यह पाठ्यक्रम सामाजिक-भावनात्मक सीखने की पाँच मुख्य क्षमताओं पर केंद्रित है, जिन्हें The Mind Sync के तीन स्तंभों — माइंडफुलनेस, समस्या-समाधान और पॉजिटिव साइकोलॉजी — के माध्यम से सिखाया जाता है। ये स्तंभ छात्रों को भावनात्मक जागरूकता, सहानुभूति, संचार कौशल और रोज़मर्रा की चुनौतियों का सोच-समझकर सामना करने की क्षमता विकसित करने में मदद करते हैं।
सोशल बलूनी पब्लिक स्कूल, देहरादून, उत्तराखंड के प्रधानाचार्य श्री पंकज नौटियाल के अनुसार,
“यह The Mind Sync की एक बहुत ही सराहनीय पहल है। आज के समय में हम बच्चों में कई चिंताजनक समस्याएँ देख रहे हैं — जैसे अवसाद, आत्महत्या के प्रयास, बच्चों का घर से भाग जाना और कभी-कभी अपने ही माता-पिता को नुकसान पहुँचाना। इन्हीं चिंताओं के कारण हम सब एक साथ आए। हमें लगा कि यदि समय रहते कुछ किया जाए तो परिणाम सकारात्मक हो सकते हैं। इस पहल के माध्यम से हमें विश्वास है कि बच्चे भावनात्मक रूप से अधिक मजबूत बनेंगे और अपनी शिक्षा तथा जीवन दोनों में बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे।”
Ms. Rashika Khandelwal, सीनियर प्रोग्राम मैनेजर और मनोवैज्ञानिक, इस कार्यक्रम के सुचारु क्रियान्वयन की निगरानी करेंगी। वे शिक्षक प्रशिक्षण से लेकर प्रगति की निगरानी और कक्षा में कार्यक्रम के संचालन तक निरंतर मार्गदर्शन और सहयोग प्रदान करेंगी।
यदि अधिक स्कूल इस दिशा में आगे बढ़ते हैं, तो भारत की कक्षाओं में एक शांत लेकिन महत्वपूर्ण परिवर्तन दिखाई दे सकता है — जो यह सिद्ध करेगा कि देश का भविष्य केवल शैक्षणिक उपलब्धियों पर नहीं, बल्कि भावनात्मक रूप से मजबूत और सशक्त युवा पीढ़ी पर भी आधारित होगा।
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सोशल बलूनी पब्लिक स्कूल, देहरादून, उत्तराखंड की कक्षाओं तक पहुँचा भारत का पहला मानसिक स्वास्थ्य शिक्षा पाठ्यक्रम
डिजिटल डेस्क
ऊपर दिखाई दे रही तस्वीर देहरादून के सोशल बलूनी पब्लिक स्कूल, देहरादून, उत्तराखंड के शिक्षकों की एक महत्वपूर्ण पहल को दर्शाती है। इन शिक्षकों ने The Mind Sync द्वारा तैयार किए गए भारत के पहले मानसिक स्वास्थ्य शिक्षा पाठ्यक्रम को अपने विद्यालय में लागू करके छात्रों को सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। ऐसे समय में जब स्कूलों में मानसिक स्वास्थ्य पर अभी भी कम ही चर्चा होती है, यह पहल एक स्पष्ट संदेश देती है — आज की शिक्षा बच्चों को केवल परीक्षाओं के लिए नहीं, बल्कि जीवन के लिए भी तैयार करनी चाहिए।
इस पहल को अपनाकर शिक्षक पारंपरिक शिक्षण की सीमाओं से आगे बढ़ रहे हैं। वे प्रमाणित मानसिक स्वास्थ्य शिक्षकों के रूप में स्वयं को प्रशिक्षित कर रहे हैं, ताकि वे छात्रों को अपनी भावनाओं को समझने, धैर्य विकसित करने और जीवन की चुनौतियों का सामना करने में मार्गदर्शन दे सकें। इस प्रक्रिया में वे केवल अच्छे विद्यार्थी ही नहीं, बल्कि एक मजबूत और स्वस्थ समाज का निर्माण भी कर रहे हैं।
विकसित भारत 2047 का सपना — एक पूर्ण विकसित, आत्मनिर्भर और समृद्ध राष्ट्र — केवल शैक्षणिक उत्कृष्टता के आधार पर पूरा नहीं हो सकता। देश को ऐसे युवाओं की आवश्यकता है जो आत्मविश्वासी हों, भावनात्मक रूप से मजबूत हों, चुनौतियों का सामना कर सकें और सोच-समझकर निर्णय ले सकें। यही दृष्टि The Mind Sync साकार करना चाहता है। इस मिशन से जुड़कर सोशल बलूनी पब्लिक स्कूल ने एक महत्वपूर्ण सच्चाई को पहचाना है — बुद्धिमत्ता और भावनात्मक मजबूती का विकास साथ-साथ होना चाहिए।
आज भारत के छात्रों के सामने जो वास्तविकताएँ हैं, वे चिंताजनक हैं। बहुत कम उम्र से ही बच्चों पर पढ़ाई का भारी दबाव होता है। अच्छे अंक, रैंक और प्रतियोगी परीक्षाओं की दौड़ बहुत जल्दी शुरू हो जाती है। इसके साथ-साथ सोशल मीडिया ने भी नई चुनौतियाँ पैदा कर दी हैं। लगातार स्क्रीन टाइम, सोशल मीडिया पर तुलना, साइबर-बुलिंग, साथियों का दबाव और असफलता का डर लाखों छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहे हैं।
फिर भी अधिकांश बच्चों को यह नहीं सिखाया जाता कि वे तनाव को कैसे संभालें, अपनी भावनाओं को कैसे व्यक्त करें, स्वस्थ रिश्ते कैसे बनाएं या असफलता का सामना कैसे करें। कई बच्चे चुपचाप इन दबावों से जूझते रहते हैं। यह मौन संकट हर साल बढ़ता जा रहा है, जिससे मानसिक स्वास्थ्य शिक्षा की आवश्यकता और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। इसी आवश्यकता को समझते हुए सोशल बलूनी पब्लिक स्कूल ने मानसिक स्वास्थ्य शिक्षा को नियमित पढ़ाई का हिस्सा बनाकर अगली पीढ़ी को भविष्य के लिए तैयार करने की दिशा में निर्णायक कदम उठाया है।
भारत के पहले मानसिक स्वास्थ्य शिक्षा पाठ्यक्रम को अपनी कक्षाओं में लाकर सोशल बलूनी पब्लिक स्कूल, देहरादून, उत्तराखंड इस परिवर्तन का नेतृत्व करने वाले संस्थानों में शामिल हो गया है। संदेश स्पष्ट है — सबसे मजबूत छात्र वे नहीं हैं जो केवल अधिक अंक प्राप्त करते हैं, बल्कि वे हैं जिनमें आत्मविश्वास, भावनात्मक शक्ति और जीवन की चुनौतियों का सामना करने की क्षमता होती है।
वास्तविक बदलाव के लिए परिवारों की भागीदारी भी आवश्यक है। इसे सुनिश्चित करने के लिए अभिभावकों के लिए विशेष सत्र आयोजित किए जाते हैं, जिनमें उन्हें यह समझाया जाता है कि वे घर पर अपने बच्चों का भावनात्मक रूप से कैसे सहयोग कर सकते हैं। छात्रों और अभिभावकों को MindSyncKids App का भी उपयोग मिलेगा, जिसमें रोज़मर्रा की सरल गतिविधियाँ और अभ्यास शामिल हैं, जो भावनात्मक बुद्धिमत्ता को एक आदत के रूप में विकसित करने में मदद करते हैं।
इस कार्यक्रम में कौशल-आधारित मूल्यांकन भी शामिल हैं, जो प्रत्येक छात्र के भावनात्मक विकास को मापते हैं। इन आकलनों से यह पता चलता है कि किन छात्रों को अतिरिक्त सहयोग की आवश्यकता है, जिससे शिक्षक समय पर मार्गदर्शन और सहायता प्रदान कर सकें। इससे यह सुनिश्चित होता है कि हर बच्चे को ध्यान और समर्थन मिले और कोई भी छात्र पीछे न रह जाए। यह पहल केवल एक बार की कार्यशाला नहीं, बल्कि एक निरंतर विकास की यात्रा है।
हार्वर्ड प्रशिक्षित मनोचिकित्सक डॉ. शिवम दुबे द्वारा परिकल्पित और भारत में संस्थापक श्री मानस दुबे के नेतृत्व में संचालित The Mind Sync, कक्षा 1 से 10 तक के छात्रों के लिए तैयार किया गया भारत का पहला संरचित 30-सप्ताह का मानसिक स्वास्थ्य शिक्षा पाठ्यक्रम है।
इस कार्यक्रम के माध्यम से छात्र जीवन के महत्वपूर्ण कौशल सीखते हैं, जैसे धैर्य, तनाव प्रबंधन, स्वस्थ संबंध बनाना, एकाग्रता और प्रभावी अध्ययन आदतें। यह सीख केवल सिद्धांत तक सीमित नहीं है। संवादात्मक गतिविधियाँ, वास्तविक जीवन की चर्चाएँ और व्यावहारिक अभ्यास यह सुनिश्चित करते हैं कि छात्र जो सीखते हैं उसे केवल कक्षा में ही नहीं, बल्कि घर और अपने समुदाय में भी लागू करें।
न्यूरोसाइंस और मनोविज्ञान पर आधारित यह पाठ्यक्रम सामाजिक-भावनात्मक सीखने की पाँच मुख्य क्षमताओं पर केंद्रित है, जिन्हें The Mind Sync के तीन स्तंभों — माइंडफुलनेस, समस्या-समाधान और पॉजिटिव साइकोलॉजी — के माध्यम से सिखाया जाता है। ये स्तंभ छात्रों को भावनात्मक जागरूकता, सहानुभूति, संचार कौशल और रोज़मर्रा की चुनौतियों का सोच-समझकर सामना करने की क्षमता विकसित करने में मदद करते हैं।
सोशल बलूनी पब्लिक स्कूल, देहरादून, उत्तराखंड के प्रधानाचार्य श्री पंकज नौटियाल के अनुसार,
“यह The Mind Sync की एक बहुत ही सराहनीय पहल है। आज के समय में हम बच्चों में कई चिंताजनक समस्याएँ देख रहे हैं — जैसे अवसाद, आत्महत्या के प्रयास, बच्चों का घर से भाग जाना और कभी-कभी अपने ही माता-पिता को नुकसान पहुँचाना। इन्हीं चिंताओं के कारण हम सब एक साथ आए। हमें लगा कि यदि समय रहते कुछ किया जाए तो परिणाम सकारात्मक हो सकते हैं। इस पहल के माध्यम से हमें विश्वास है कि बच्चे भावनात्मक रूप से अधिक मजबूत बनेंगे और अपनी शिक्षा तथा जीवन दोनों में बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे।”
Ms. Rashika Khandelwal, सीनियर प्रोग्राम मैनेजर और मनोवैज्ञानिक, इस कार्यक्रम के सुचारु क्रियान्वयन की निगरानी करेंगी। वे शिक्षक प्रशिक्षण से लेकर प्रगति की निगरानी और कक्षा में कार्यक्रम के संचालन तक निरंतर मार्गदर्शन और सहयोग प्रदान करेंगी।
यदि अधिक स्कूल इस दिशा में आगे बढ़ते हैं, तो भारत की कक्षाओं में एक शांत लेकिन महत्वपूर्ण परिवर्तन दिखाई दे सकता है — जो यह सिद्ध करेगा कि देश का भविष्य केवल शैक्षणिक उपलब्धियों पर नहीं, बल्कि भावनात्मक रूप से मजबूत और सशक्त युवा पीढ़ी पर भी आधारित होगा।
