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भारत जोड़ो यात्रा के चार साल: जयराम रमेश ने बताया ‘निर्णायक मोड़’
Digital Desk
भारत जोड़ो यात्रा की चौथी वर्षगांठ पर जयराम रमेश ने इसे भारतीय राजनीति का निर्णायक मोड़ बताया। जानिए यात्रा की शुरुआत, 4,080 किमी के सफर और कांग्रेस के राजनीतिक संदेश से जुड़ी प्रमुख बातें।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोमवार को भारत जोड़ो यात्रा की शुरुआत के चार साल पूरे होने पर इसे भारतीय राजनीति का एक “निर्णायक मोड़” बताया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व में निकली यह पदयात्रा केवल एक राजनीतिक अभियान नहीं थी, बल्कि देश के लोगों की चिंताओं को सुनने और उनके मुद्दों को राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में लाने का प्रयास थी।
रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर यात्रा की शुरुआत को याद करते हुए कहा कि 7 सितंबर 2022 को कन्याकुमारी से शुरू हुई इस यात्रा ने देश के राजनीतिक माहौल में नई उम्मीद और नई ऊर्जा पैदा की। उनके मुताबिक, यह यात्रा समकालीन भारतीय राजनीति में एक परिवर्तनकारी घटना साबित हुई।
कन्याकुमारी से शुरू हुई यात्रा
भारत जोड़ो यात्रा 7 सितंबर 2022 को तमिलनाडु के कन्याकुमारी से शुरू हुई थी। यात्रा की शुरुआत से पहले राहुल गांधी ने विवेकानंद स्मारक का दौरा किया और इसके बाद अन्य भारत यात्रियों के साथ पदयात्रा शुरू की।
कांग्रेस के अनुसार, यात्रा का उद्देश्य देश में बढ़ती आर्थिक असमानता, सामाजिक ध्रुवीकरण और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को सामने लाना तथा लोगों के साथ सीधा संवाद स्थापित करना था।
4,080 किलोमीटर का सफर
जयराम रमेश ने कहा कि यात्रा ने करीब 4,080 किलोमीटर की दूरी तय की। यह 12 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों से होकर गुजरी और करीब 145 दिनों के बाद जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में समाप्त हुई।
यात्रा के दौरान राहुल गांधी ने अलग-अलग वर्गों के लोगों से मुलाकात की। कांग्रेस ने इसे व्यापक जनसंपर्क अभियान के रूप में पेश किया, जिसमें किसानों, युवाओं, श्रमिकों और आम नागरिकों से संवाद पर जोर दिया गया।
‘जनता की चिंता’ सुनने का दावा
रमेश ने भारत जोड़ो यात्रा के राजनीतिक संदेश को स्पष्ट करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य केवल राजनीतिक भाषण देना नहीं था। उन्होंने कहा कि यात्रा का मूल भाव लोगों की समस्याओं को सुनना था।
कांग्रेस नेता ने कहा कि यात्रा ने उन लोगों को एक मंच दिया जो आर्थिक असमानता, सामाजिक विभाजन और राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर चिंतित थे। पार्टी ने यात्रा को संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं से जुड़े अपने राजनीतिक विमर्श का भी महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया।
संविधान को लेकर कांग्रेस का रुख
रमेश ने कहा कि यात्रा का वैचारिक आधार संविधान के सिद्धांतों और संस्थागत प्रक्रियाओं को लेकर कांग्रेस की चिंताओं से जुड़ा था। उन्होंने RSS और BJP पर संवैधानिक मूल्यों पर हमला करने का आरोप लगाया, जो कांग्रेस के राजनीतिक रुख का हिस्सा रहा है।
हालांकि, ये आरोप कांग्रेस का राजनीतिक दृष्टिकोण हैं। BJP ने समय-समय पर भारत जोड़ो यात्रा और कांग्रेस के इन आरोपों की आलोचना की है।
राहुल गांधी की बदली राजनीतिक छवि
भारत जोड़ो यात्रा के दौरान राहुल गांधी ने बड़ी संख्या में पदयात्रियों और आम नागरिकों के साथ लंबी दूरी तय की। यात्रा ने उनके सार्वजनिक राजनीतिक अभियान और जनसंपर्क शैली को राष्ट्रीय चर्चा में प्रमुखता दी।
यात्रा के दौरान राहुल गांधी ने सार्वजनिक सभाओं, प्रेस कॉन्फ्रेंस और विभिन्न समूहों के साथ संवाद किया। इसमें राजनीतिक नेताओं के अलावा सामाजिक क्षेत्र, मनोरंजन और अन्य क्षेत्रों से जुड़े लोग भी अलग-अलग चरणों में शामिल हुए।
श्रीनगर में हुआ समापन
करीब पांच महीने के सफर के बाद भारत जोड़ो यात्रा का समापन 30 जनवरी 2023 को श्रीनगर में हुआ। अंतिम चरण में जम्मू-कश्मीर में यात्रा के समापन कार्यक्रम ने इसे राष्ट्रीय राजनीतिक अभियान के रूप में व्यापक दृश्यता दी।
इसके बाद कांग्रेस ने भारत जोड़ो न्याय यात्रा भी निकाली, जिसमें रोजगार, किसानों, सामाजिक न्याय और आर्थिक मुद्दों को प्रमुखता दी गई।
चार साल बाद फिर चर्चा
भारत जोड़ो यात्रा की चौथी वर्षगांठ पर जयराम रमेश ने इसे फिर से कांग्रेस की राजनीतिक यात्रा के महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यह वह “निर्णायक मोड़” था जिसने नई उम्मीद, नई ऊर्जा और नए संकल्प को जन्म दिया।
कांग्रेस के लिए यह वर्षगांठ ऐसे समय में आई है जब पार्टी यात्रा से जुड़े जनसंपर्क, संविधान और सामाजिक एकजुटता के मुद्दों को अपने व्यापक राजनीतिक अभियान में लगातार प्रमुखता देती रही है।
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