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ट्रंप की ईरान पर नजर, बोले- जरूरत पड़ी तो फिर करेंगे हमला
Digital Desk
ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका ईरान की सैन्य गतिविधियों पर नजर रख रहा है और तेहरान के जवाबी हमले पर फिर कार्रवाई के लिए तैयार है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका ईरान की सैन्य गतिविधियों पर करीबी नजर रख रहा है। उन्होंने तेहरान की ओर से जवाबी कार्रवाई होने पर फिर हमला करने की चेतावनी दी है।
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिख रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियां ईरान की गतिविधियों पर इतनी करीबी नजर रख रही हैं कि तेहरान के लिए कोई भी बड़ा सैन्य कदम छिपाना मुश्किल है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि ईरान ने अमेरिकी सैनिकों या ठिकानों पर हमला किया तो अमेरिका जरूरत पड़ने पर दोबारा सैन्य कार्रवाई कर सकता है।
ट्रंप ने ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ये टिप्पणियां कीं। उनका बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका ने ईरान के सैन्य ढांचे के खिलाफ फिर कार्रवाई की है और इसके जवाब में ईरान ने क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने की कोशिश की है।
ईरान की गतिविधियों पर नजर
ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका ईरान की ओर से रडार और मिसाइल क्षमताओं को फिर से मजबूत करने की कोशिशों को लगातार ट्रैक कर रहा है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी निगरानी व्यवस्था ईरान की सैन्य तैयारियों के बारे में विस्तृत जानकारी जुटा रही है।
ट्रंप के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों को ऐसे रॉकेट सिस्टम की तैयारियों का भी पता चला था, जिनका इस्तेमाल हॉर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाने के लिए किया जा सकता था।
उन्होंने कहा कि अमेरिकी बलों ने ईरान के कुछ ऐसे उपकरणों को नष्ट किया है जिन्हें अमेरिकी प्रशासन संभावित खतरे से जोड़कर देख रहा था।
लारक द्वीप पर अमेरिकी हमला
तनाव में ताजा बढ़ोतरी 30 अगस्त को हुई, जब अमेरिकी बलों ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य में स्थित ईरान के लारक द्वीप पर हमला किया।
रॉयटर्स के अनुसार, अमेरिकी कार्रवाई में दो ईरानी रॉकेट लॉन्चरों को निशाना बनाया गया। अमेरिका का कहना था कि ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स से जुड़े कर्मी इन रॉकेटों के जरिए समुद्र में बारूदी सुरंगें बिछाने की तैयारी कर रहे थे।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इसे सीमित सैन्य कार्रवाई बताया और कहा कि इसका उद्देश्य वाणिज्यिक जहाजों तथा नागरिक नाविकों के लिए माने जा रहे तत्काल खतरे को खत्म करना था।
ईरान ने किया जवाबी हमला
अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरान ने भी जवाबी कदम उठाया। ईरान की ओर से जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों की दिशा में मिसाइलें दागे जाने की जानकारी सामने आई।
जॉर्डन के अधिकारियों ने कहा कि आठ मिसाइलों को रोका गया। ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात में अमेरिकी सैन्य संपत्तियों को निशाना बनाने का दावा भी किया, हालांकि UAE ने अपने एक एयरबेस पर हमले के दावे से इनकार किया।
इन घटनाओं ने उस अपेक्षाकृत शांत अवधि को समाप्त कर दिया जिसमें दोनों देशों के बीच प्रत्यक्ष सैन्य टकराव सीमित रहा था।
ट्रंप की कड़ी चेतावनी
ट्रंप ने ईरान को पहले भी जवाबी हमलों के खिलाफ चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर तेहरान अमेरिकी बलों पर फिर हमला करता है तो वॉशिंगटन की प्रतिक्रिया और कड़ी हो सकती है।
फॉक्स न्यूज से बातचीत में ट्रंप ने ईरान के खिलाफ बेहद सख्त भाषा का इस्तेमाल करते हुए चेतावनी दी कि लगातार जवाबी हमले जारी रहने पर देश को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
ओवल ऑफिस में उन्होंने हालिया अमेरिकी कार्रवाई को भी भारी हमला बताया और संकेत दिया कि अमेरिका भविष्य में अपनी पसंद के समय फिर सैन्य कार्रवाई कर सकता है।
हॉर्मुज पर बढ़ा दबाव
मौजूदा तनाव में हॉर्मुज जलडमरूमध्य सबसे संवेदनशील क्षेत्र बना हुआ है। यह दुनिया के प्रमुख ऊर्जा परिवहन मार्गों में शामिल है और यहां किसी भी बड़े सैन्य व्यवधान का असर वैश्विक तेल और शिपिंग बाजारों पर पड़ सकता है।
अमेरिका का कहना है कि समुद्री मार्ग में बारूदी सुरंगों की तैनाती को रोकना वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा के लिए जरूरी है। दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया है और जवाबी कार्रवाई का अधिकार बरकरार रखा है।
बढ़ते तनाव का असर तेल बाजार पर भी दिख रहा है। रॉयटर्स के अनुसार, 3 सितंबर को ब्रेंट क्रूड करीब 95 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा था, जबकि हॉर्मुज से होकर गुजरने वाला शिपिंग ट्रैफिक हालिया औसत से नीचे बना हुआ था।
प्रतिबंधों पर भी जोर
ट्रंप प्रशासन ईरान पर सैन्य दबाव के साथ आर्थिक दबाव भी बढ़ा रहा है। अमेरिकी रणनीति में प्रतिबंधों और आर्थिक अलगाव को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन के कुछ वरिष्ठ सलाहकार लंबे सैन्य टकराव के जोखिम को कम रखने और आर्थिक दबाव बढ़ाने की रणनीति पर जोर दे रहे हैं। हालांकि, हालिया अमेरिकी और ईरानी हमलों के बाद तनाव कम करना और मुश्किल हो गया है।
इस बीच, सैन्य कार्रवाई और आर्थिक प्रतिबंधों का संयुक्त दबाव क्षेत्रीय बाजारों और अमेरिकी विदेश नीति दोनों के लिए चुनौती बना हुआ है।
व्यापक युद्ध का खतरा
ट्रंप की ताजा चेतावनी और अमेरिका-ईरान के बीच सैन्य कार्रवाई ने व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष की आशंका बढ़ा दी है। सबसे बड़ा तत्काल खतरा हॉर्मुज जलडमरूमध्य में बना हुआ है, जहां किसी भी समुद्री खनन या सैन्य टकराव से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
यदि ईरान अमेरिकी सैनिकों या उसके क्षेत्रीय सहयोगियों पर और हमले करता है, तो अमेरिका की ओर से नई कार्रवाई की संभावना बढ़ सकती है। इसके विपरीत, लगातार अमेरिकी हमले ईरान को और जवाबी कदम उठाने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।
फिलहाल ट्रंप का संदेश स्पष्ट है कि अमेरिका ईरान की सैन्य गतिविधियों पर करीबी निगरानी बनाए हुए है और किसी भी नई जवाबी कार्रवाई की स्थिति में सैन्य विकल्प खुला रखता है। इससे आने वाले दिनों में हॉर्मुज और पूरे मध्य पूर्व में तनाव पर दुनिया की नजर बनी रहेगी।
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