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नेपाल बाढ़: 98 की मौत, 750 से अधिक लापता; भारत ने भेजी 10 टन राहत सामग्री
Sandeep Patel
नेपाल-तिब्बत सीमा पर भीषण फ्लैश फ्लड में 98 लोगों की मौत हुई है। 750 से ज्यादा लोग लापता हैं। भारत ने 10 टन राहत सामग्री और जरूरी दवाइयां भेजीं।
नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में बुधवार, 26 अगस्त 2026 को आई भीषण फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचाई है। नेपाल में 95 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि चीन के तिब्बत क्षेत्र में तीन लोगों की मौत हुई है। इस तरह आपदा में मृतकों की कुल संख्या 98 पहुंच गई है। सैकड़ों लोग अब भी लापता हैं और राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है।
नेपाल के रसुवा, नुवाकोट और धादिंग समेत कई इलाकों में बाढ़ ने घरों, पुलों, सड़कों और बिजली परियोजनाओं को नुकसान पहुंचाया है। भारत ने संकट के बीच नेपाल को 10 टन मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR) सामग्री और जरूरी दवाइयां भेजी हैं। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने भारत और विदेश मंत्री एस. जयशंकर को सहायता के लिए धन्यवाद दिया है।
नेपाल में 95 की मौत
नेपाल की ओर से उपलब्ध ताजा आंकड़ों के अनुसार, बाढ़ में कम से कम 95 लोगों की जान गई है। तिब्बत में तीन और मौतों की पुष्टि हुई है। राहत दलों के प्रभावित इलाकों तक पहुंचने के साथ मृतकों और लापता लोगों के आंकड़े बदल सकते हैं।
रसुवा जिले का भोटेकोशी नदी क्षेत्र सबसे बुरी तरह प्रभावित इलाकों में है। अचानक आई पानी, मिट्टी और चट्टानों की तेज लहर ने कई बस्तियों और बुनियादी ढांचे को अपनी चपेट में ले लिया।
नेपाल सरकार और सुरक्षा एजेंसियां प्रभावित इलाकों में तलाशी अभियान चला रही हैं। खराब मौसम, क्षतिग्रस्त सड़कों और बाधित संचार व्यवस्था के कारण बचाव कार्य चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
750 से ज्यादा लोग लापता
लापता लोगों की संख्या को लेकर अलग-अलग समय पर अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। देर शाम की रिपोर्टों में 750 से अधिक लोगों के लापता होने की बात कही गई है, जिनमें भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। नेपाल पर्यटन बोर्ड की शुरुआती सूची में 384 यात्रियों के लापता होने की जानकारी थी, जबकि बाद के प्रशासनिक आंकड़े इससे काफी अधिक रहे।
भारत के कम से कम 133 नागरिकों के लापता होने की रिपोर्ट सामने आई है। इनमें कई लोग कैलाश मानसरोवर यात्रा से जुड़े बताए जा रहे हैं। भारतीय दूतावास काठमांडू में नेपाली अधिकारियों के साथ मिलकर भारतीय नागरिकों की तलाश और राहत कार्यों का समन्वय कर रहा है।
बाढ़ की वजह पर जांच
फ्लैश फ्लड के कारण को लेकर शुरुआती जांच में कई संभावनाएं सामने आई हैं। नेपाल के अधिकारियों ने तिब्बत क्षेत्र में आए 4.4 तीव्रता के भूकंप और उसके बाद हुए भूस्खलन को संभावित कारणों में शामिल किया है। वहीं विशेषज्ञों और उपग्रह तस्वीरों के शुरुआती विश्लेषण में ग्लेशियर के हिस्से के टूटने और आइस-रॉक एवलॉन्च की संभावना भी सामने आई है।
रॉयटर्स की विशेषज्ञों पर आधारित रिपोर्ट के अनुसार, करीब 5,200 मीटर की ऊंचाई पर ग्लेशियर का एक हिस्सा टूटकर नीचे गिरा और इससे बर्फ, चट्टानों और मलबे के साथ अचानक पानी का तेज बहाव पैदा हो सकता है। हालांकि, आपदा के सटीक ट्रिगर की जांच अभी जारी है।
इसलिए फिलहाल इसे किसी एक कारण से जोड़ना जल्दबाजी होगी।
बिजली परियोजनाओं को नुकसान
बाढ़ ने नेपाल के ऊर्जा क्षेत्र को भी बड़ा नुकसान पहुंचाया है। शुरुआती आकलनों के अनुसार करीब 430 मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता प्रभावित हुई है। कई जलविद्युत परियोजनाओं, ट्रांसमिशन लाइनों और अन्य बिजली ढांचे को नुकसान पहुंचा है।
रसुवागढ़ी, सान्जेन खोला और अपर त्रिशूली-3A जैसी परियोजनाएं भी प्रभावित परियोजनाओं में शामिल हैं। कई सड़कों और पुलों के बह जाने से प्रभावित इलाकों तक पहुंच मुश्किल हो गई है।
नेपाल के अधिकारियों ने भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के किनारे बसे लोगों को सतर्क रहने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है।
भारत ने भेजी 10 टन मदद
भारत ने आपदा के तुरंत बाद नेपाल के लिए राहत सामग्री भेजी। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बताया कि भारत ने 10 टन HADR सामग्री और जरूरी दवाइयां भेजी हैं। भारतीय वायुसेना का C-130J विमान राहत सामग्री लेकर हिंडन एयरबेस से काठमांडू रवाना हुआ।
राहत सामग्री में अस्थायी आश्रय, कंबल, हाइजीन किट, सोलर लैंप और दवाइयां शामिल हैं। भारत ने आगे भी अतिरिक्त राहत सामग्री भेजने की तैयारी की है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से बात कर संवेदना जताई और हरसंभव मानवीय सहायता का भरोसा दिया।
नेपाल ने भारत को धन्यवाद
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने भारत और एस. जयशंकर को राहत सामग्री और जरूरी चिकित्सा सहायता के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि भारत की तेज प्रतिक्रिया दोनों देशों के बीच साझेदारी और संकट के समय आपसी एकजुटता को दर्शाती है।
भारतीय दूतावास भी नेपाली अधिकारियों के साथ मिलकर प्रभावित भारतीय नागरिकों के बचाव और राहत कार्यों में समन्वय कर रहा है। दूतावास ने भारतीय नागरिकों के लिए आपातकालीन हेल्पलाइन भी जारी की है।
भारत में भी बिहार और उत्तर प्रदेश को अलर्ट पर रखा गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों से स्थिति पर चर्चा की है और सीमावर्ती क्षेत्रों में NDRF तथा स्थानीय बचाव दलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
बचाव अभियान जारी
नेपाल सेना, पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां प्रभावित क्षेत्रों में बचाव अभियान चला रही हैं। कई स्थानों पर हेलीकॉप्टरों की मदद से लोगों को सुरक्षित निकाला जा रहा है, लेकिन ऊंचे जलस्तर और क्षतिग्रस्त संपर्क मार्गों के कारण अभियान में मुश्किलें आ रही हैं।
भारत और नेपाल दोनों के लिए अब प्राथमिकता लापता लोगों का पता लगाना, फंसे हुए नागरिकों को सुरक्षित निकालना और प्रभावित परिवारों तक भोजन, दवाइयां और जरूरी राहत सामग्री पहुंचाना है।
मृतकों और लापता लोगों की संख्या अभी अंतिम नहीं मानी जा सकती। जैसे-जैसे दूरदराज के इलाकों तक बचाव दल पहुंचेंगे, आंकड़ों में बदलाव संभव है। नेपाल में जारी यह आपदा हिमालयी क्षेत्र की प्राकृतिक आपदाओं और कमजोर बुनियादी ढांचे से जुड़ी चुनौतियों को भी सामने ला रही है।
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