मुक्त शिक्षा से बदलेगी देश की तस्वीर: CBOSE बना ड्रॉपआउट छात्रों की नई उम्मीद

डिजिटल डेस्क

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लचीली परीक्षा प्रणाली, डिजिटल लर्निंग और समावेशी मॉडल से लाखों शिक्षार्थियों को मुख्यधारा में लाने की पहल

केंद्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा एवं परीक्षा बोर्ड (CBOSE) देश में उन लाखों विद्यार्थियों के लिए आशा की किरण बनकर उभरा है, जो किसी न किसी कारण से नियमित स्कूली शिक्षा पूरी नहीं कर सके। मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा प्रणाली के माध्यम से यह बोर्ड माध्यमिक (कक्षा 10) और उच्च माध्यमिक (कक्षा 12) स्तर की शिक्षा उपलब्ध करा रहा है।

शिक्षा से वंचित वर्गों को जोड़ने की पहल

शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, CBOSE का मुख्य उद्देश्य स्कूल छोड़ चुके छात्रों, कामकाजी युवाओं, गृहिणियों और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले विद्यार्थियों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ना है। बोर्ड विशेष रूप से दिव्यांग छात्रों के लिए समावेशी शिक्षा मॉडल को बढ़ावा दे रहा है, जिससे वे भी बिना किसी बाधा के पढ़ाई पूरी कर सकें।

राष्ट्रीय पाठ्यक्रम पर आधारित पढ़ाई

बोर्ड द्वारा संचालित पाठ्यक्रम राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (NCERT) द्वारा निर्धारित राष्ट्रीय पाठ्यक्रम ढांचे पर आधारित हैं। माध्यमिक स्तर पर सामान्य विषयों के साथ व्यावसायिक शिक्षा को जोड़ा गया है, जबकि उच्च माध्यमिक स्तर पर विज्ञान, वाणिज्य और मानविकी संकाय के अंतर्गत विभिन्न विषयों का विकल्प दिया जाता है।

साल में दो बार परीक्षा और ऑन-डिमांड सिस्टम

CBOSE की परीक्षा प्रणाली को लचीला बनाया गया है। साल में दो बार सार्वजनिक परीक्षाओं का आयोजन किया जाता है। इसके साथ ही ऑन-डिमांड परीक्षा प्रणाली के माध्यम से छात्र अपनी सुविधा के अनुसार परीक्षा दे सकते हैं। विशेष आवश्यकता वाले छात्रों के लिए अतिरिक्त समय, स्क्राइब और अन्य सहूलियतें भी प्रदान की जाती हैं।

डिजिटल शिक्षा पर विशेष जोर

बोर्ड ने डिजिटल लर्निंग को भी अपनी शिक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा बनाया है। छात्रों को प्रिंटेड स्टडी मटीरियल के साथ-साथ ऑनलाइन क्लास, वीडियो लेक्चर, ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म और मोबाइल एप के माध्यम से पढ़ाई की सुविधा दी जा रही है। इसके अलावा अध्ययन केंद्रों पर व्यक्तिगत संपर्क कार्यक्रम (PCP) भी आयोजित किए जाते हैं।

मान्यता और भविष्य की राह

आधिकारिक जानकारी के अनुसार, CBOSE द्वारा जारी प्रमाण पत्रों को केंद्र सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त है और इन्हें अन्य राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय शिक्षा बोर्डों के समकक्ष माना जाता है। इन प्रमाण पत्रों के आधार पर छात्र उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रवेश लेने के साथ-साथ विभिन्न सरकारी और निजी नौकरियों के लिए भी आवेदन कर सकते हैं।

शिक्षा में सामाजिक बदलाव का माध्यम

विश्लेषकों का मानना है कि CBOSE ने ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में शिक्षा की पहुंच बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। महिला साक्षरता दर में वृद्धि, कामकाजी युवाओं की पढ़ाई की निरंतरता और दिव्यांग छात्रों के लिए अवसरों का विस्तार इसके प्रत्यक्ष उदाहरण हैं।

कुल मिलाकर, केंद्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा एवं परीक्षा बोर्ड देश में शिक्षा को अधिक लचीला, सुलभ और समावेशी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है। आने वाले वर्षों में इसके माध्यम से लाखों छात्र अपनी अधूरी शिक्षा पूरी कर एक बेहतर भविष्य की ओर बढ़ सकेंगे।

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www.dainikjagranmpcg.com
28 Feb 2026 By Nitin Trivedi

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केंद्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा एवं परीक्षा बोर्ड (CBOSE) देश में उन लाखों विद्यार्थियों के लिए आशा की किरण बनकर उभरा है, जो किसी न किसी कारण से नियमित स्कूली शिक्षा पूरी नहीं कर सके। मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा प्रणाली के माध्यम से यह बोर्ड माध्यमिक (कक्षा 10) और उच्च माध्यमिक (कक्षा 12) स्तर की शिक्षा उपलब्ध करा रहा है।

शिक्षा से वंचित वर्गों को जोड़ने की पहल

शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, CBOSE का मुख्य उद्देश्य स्कूल छोड़ चुके छात्रों, कामकाजी युवाओं, गृहिणियों और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले विद्यार्थियों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ना है। बोर्ड विशेष रूप से दिव्यांग छात्रों के लिए समावेशी शिक्षा मॉडल को बढ़ावा दे रहा है, जिससे वे भी बिना किसी बाधा के पढ़ाई पूरी कर सकें।

राष्ट्रीय पाठ्यक्रम पर आधारित पढ़ाई

बोर्ड द्वारा संचालित पाठ्यक्रम राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (NCERT) द्वारा निर्धारित राष्ट्रीय पाठ्यक्रम ढांचे पर आधारित हैं। माध्यमिक स्तर पर सामान्य विषयों के साथ व्यावसायिक शिक्षा को जोड़ा गया है, जबकि उच्च माध्यमिक स्तर पर विज्ञान, वाणिज्य और मानविकी संकाय के अंतर्गत विभिन्न विषयों का विकल्प दिया जाता है।

साल में दो बार परीक्षा और ऑन-डिमांड सिस्टम

CBOSE की परीक्षा प्रणाली को लचीला बनाया गया है। साल में दो बार सार्वजनिक परीक्षाओं का आयोजन किया जाता है। इसके साथ ही ऑन-डिमांड परीक्षा प्रणाली के माध्यम से छात्र अपनी सुविधा के अनुसार परीक्षा दे सकते हैं। विशेष आवश्यकता वाले छात्रों के लिए अतिरिक्त समय, स्क्राइब और अन्य सहूलियतें भी प्रदान की जाती हैं।

डिजिटल शिक्षा पर विशेष जोर

बोर्ड ने डिजिटल लर्निंग को भी अपनी शिक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा बनाया है। छात्रों को प्रिंटेड स्टडी मटीरियल के साथ-साथ ऑनलाइन क्लास, वीडियो लेक्चर, ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म और मोबाइल एप के माध्यम से पढ़ाई की सुविधा दी जा रही है। इसके अलावा अध्ययन केंद्रों पर व्यक्तिगत संपर्क कार्यक्रम (PCP) भी आयोजित किए जाते हैं।

मान्यता और भविष्य की राह

आधिकारिक जानकारी के अनुसार, CBOSE द्वारा जारी प्रमाण पत्रों को केंद्र सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त है और इन्हें अन्य राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय शिक्षा बोर्डों के समकक्ष माना जाता है। इन प्रमाण पत्रों के आधार पर छात्र उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रवेश लेने के साथ-साथ विभिन्न सरकारी और निजी नौकरियों के लिए भी आवेदन कर सकते हैं।

शिक्षा में सामाजिक बदलाव का माध्यम

विश्लेषकों का मानना है कि CBOSE ने ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में शिक्षा की पहुंच बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। महिला साक्षरता दर में वृद्धि, कामकाजी युवाओं की पढ़ाई की निरंतरता और दिव्यांग छात्रों के लिए अवसरों का विस्तार इसके प्रत्यक्ष उदाहरण हैं।

कुल मिलाकर, केंद्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा एवं परीक्षा बोर्ड देश में शिक्षा को अधिक लचीला, सुलभ और समावेशी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है। आने वाले वर्षों में इसके माध्यम से लाखों छात्र अपनी अधूरी शिक्षा पूरी कर एक बेहतर भविष्य की ओर बढ़ सकेंगे।

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