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देवी अहिल्या विश्वविद्यालय में ‘डेटिंग ऐप’ विवाद पर कार्रवाई, छात्रा हॉस्टल से निष्कासित; पढ़ाई जारी रखने की अनुमति
इंदौर (म.प्र.)
इंदौर में जांच समिति की रिपोर्ट के बाद निर्णय; छात्रा ने आरोपों को बताया निराधार, अभिभावक को बुलाया गया
देवी अहिल्या विश्वविद्यालय ने कमला नेहरू हॉस्टल की एक प्रथम वर्ष की छात्रा को हॉस्टल से निष्कासित कर दिया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कार्रवाई केवल हॉस्टल अनुशासन के उल्लंघन के आधार पर की गई है और छात्रा की शैक्षणिक पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी। इस घटनाक्रम के बीच छात्रा के पिता को विश्वविद्यालय प्रबंधन से चर्चा के लिए इंदौर बुलाया गया है।
विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रज्वल खरे के अनुसार, चार सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर यह निर्णय लिया गया। समिति ने तीन दिनों तक हॉस्टल में रह रही छात्राओं के बयान दर्ज किए। रिपोर्ट में हॉस्टल नियमों के उल्लंघन और अन्य छात्राओं को असहज करने वाली गतिविधियों का उल्लेख किया गया है। प्रशासन का कहना है कि छात्रा फिलहाल वैकल्पिक आवास की व्यवस्था कर कक्षाएं जारी रखे हुए है।
दूसरी ओर, छात्रा ने लिखित स्पष्टीकरण में आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि वीडियो कॉल पर बातचीत उसकी निजी स्वतंत्रता का हिस्सा है और उसे गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया। उसने किसी पर दबाव डालने के आरोपों से भी इनकार किया और जब्त किए गए सामान को लौटाने की मांग की है।
यह मामला तब सामने आया जब हॉस्टल की पांच छात्राओं ने लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया कि संबंधित छात्रा उन्हें अज्ञात युवकों से संपर्क करने और ‘कॉलेज लाइफ एंजॉय’ करने के नाम पर बॉयफ्रेंड बनाने के लिए प्रेरित करती थी। शिकायत में यह भी कहा गया कि एक मोबाइल एप के माध्यम से संपर्क स्थापित करने की सलाह दी जाती थी। जांच के दौरान कई छात्राओं ने स्वयं को असहज और दबाव में महसूस करने की बात कही।
विश्वविद्यालय द्वारा गठित समिति में डॉ. अर्चना रांका, डॉ. सुधिरा चंदेल, डॉ. निशा सिद्दीकी, वार्डन डॉ. अर्पिता लाखरे और डॉ. पूजा जैन शामिल थीं। समिति ने लगभग दस छात्राओं के बयान दर्ज कर अपनी रिपोर्ट सौंपी। जांच के दौरान कमरे की तलाशी में कुछ सामग्री जब्त की गई, जबकि मोबाइल फोन छात्रा को लौटा दिया गया।
प्रशासन के अनुसार, छात्रा ने प्रवेश के समय स्थानीय अभिभावक की जानकारी उपलब्ध नहीं कराई थी, जिसके कारण विश्वविद्यालय ने अभिभावक से सीधे संवाद का निर्णय लिया। पिता के साथ बैठक के बाद आगे की प्रशासनिक प्रक्रिया स्पष्ट होगी।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला छात्रावास अनुशासन, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और संस्थागत जिम्मेदारी के बीच संतुलन का प्रश्न भी उठाता है। राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय समाचार पर नजर रखने वाले शिक्षा विश्लेषकों के अनुसार, विश्वविद्यालयों में आचार संहिता को लेकर स्पष्ट दिशानिर्देश और संवेदनशील संवाद आवश्यक है।
फिलहाल विश्वविद्यालय ने कहा है कि छात्रा की पढ़ाई सुचारु रूप से जारी रहेगी और अंतिम निर्णय सभी पक्षों की बात सुनने के बाद लिया जाएगा।
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