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परिसीमन विधेयक पर सियासी संग्राम, पीएम मोदी बोले- नहीं होगा किसी राज्य से भेदभाव
नेशनल डेस्क
परिसीमन विधेयक 2026 पर पीएम मोदी ने संसद में कहा कि किसी राज्य से भेदभाव नहीं होगा और सरकार का उद्देश्य समान प्रतिनिधित्व है।
लोकसभा में तीन अहम विधेयक पेश किए जाने के बाद देश की राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। सरकार ने महिला आरक्षण संशोधन विधेयक 2026, परिसीमन विधेयक 2026 और केंद्र शासित प्रदेशों से जुड़े संशोधन विधेयक को सदन में पेश किया, जिसके बाद विपक्ष ने कड़ा विरोध दर्ज कराया।
विपक्ष का आरोप और हंगामा
विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि सरकार इन विधेयकों को आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए पेश कर रही है। सदन में तीखी बहस और हंगामा देखने को मिला, जिसके चलते कार्यवाही कई बार बाधित हुई। विपक्ष ने मांग की कि इन विधेयकों पर व्यापक चर्चा के बिना आगे नहीं बढ़ा जाना चाहिए।
पीएम मोदी का स्पष्ट बयान
हंगामे के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि परिसीमन प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष होगी। उन्होंने कहा कि किसी भी राज्य के साथ क्षेत्रीय या राजनीतिक आधार पर भेदभाव नहीं होगा। पीएम ने यह भी कहा कि सरकार का उद्देश्य संतुलित और पारदर्शी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर नीयत साफ है तो शब्दों के खेल की जरूरत नहीं होती। पीएम मोदी ने यह भी आश्वासन दिया कि पिछली परिसीमन प्रक्रिया के अनुपात में किसी प्रकार का असंतुलन नहीं होगा।
परिसीमन विधेयक में प्रस्तावित बदलाव
प्रस्तावित विधेयक के अनुसार लोकसभा में सांसदों की संख्या मौजूदा 543 से बढ़ाकर लगभग 850 की जा सकती है। इसमें राज्यों के लिए 815 सीटें और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 35 सीटें निर्धारित की गई हैं। इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 81 में संशोधन का प्रस्ताव रखा गया है।
इसके साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि जनसंख्या का आधार वही जनगणना होगी जिसके आंकड़े आधिकारिक रूप से प्रकाशित हो चुके हैं। फिलहाल 2011 की जनगणना को आधार माना जाएगा।
संसद में वोटिंग का कार्यक्रम
जानकारी के अनुसार लोकसभा में इन तीनों विधेयकों पर 18 घंटे की चर्चा निर्धारित की गई है। 17 अप्रैल को लोकसभा में इन पर मतदान होगा। इसके बाद 18 अप्रैल को राज्यसभा में 10 घंटे की चर्चा के बाद मतदान प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
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परिसीमन विधेयक पर सियासी संग्राम, पीएम मोदी बोले- नहीं होगा किसी राज्य से भेदभाव
नेशनल डेस्क
लोकसभा में तीन अहम विधेयक पेश किए जाने के बाद देश की राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। सरकार ने महिला आरक्षण संशोधन विधेयक 2026, परिसीमन विधेयक 2026 और केंद्र शासित प्रदेशों से जुड़े संशोधन विधेयक को सदन में पेश किया, जिसके बाद विपक्ष ने कड़ा विरोध दर्ज कराया।
विपक्ष का आरोप और हंगामा
विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि सरकार इन विधेयकों को आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए पेश कर रही है। सदन में तीखी बहस और हंगामा देखने को मिला, जिसके चलते कार्यवाही कई बार बाधित हुई। विपक्ष ने मांग की कि इन विधेयकों पर व्यापक चर्चा के बिना आगे नहीं बढ़ा जाना चाहिए।
पीएम मोदी का स्पष्ट बयान
हंगामे के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि परिसीमन प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष होगी। उन्होंने कहा कि किसी भी राज्य के साथ क्षेत्रीय या राजनीतिक आधार पर भेदभाव नहीं होगा। पीएम ने यह भी कहा कि सरकार का उद्देश्य संतुलित और पारदर्शी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर नीयत साफ है तो शब्दों के खेल की जरूरत नहीं होती। पीएम मोदी ने यह भी आश्वासन दिया कि पिछली परिसीमन प्रक्रिया के अनुपात में किसी प्रकार का असंतुलन नहीं होगा।
परिसीमन विधेयक में प्रस्तावित बदलाव
प्रस्तावित विधेयक के अनुसार लोकसभा में सांसदों की संख्या मौजूदा 543 से बढ़ाकर लगभग 850 की जा सकती है। इसमें राज्यों के लिए 815 सीटें और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 35 सीटें निर्धारित की गई हैं। इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 81 में संशोधन का प्रस्ताव रखा गया है।
इसके साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि जनसंख्या का आधार वही जनगणना होगी जिसके आंकड़े आधिकारिक रूप से प्रकाशित हो चुके हैं। फिलहाल 2011 की जनगणना को आधार माना जाएगा।
संसद में वोटिंग का कार्यक्रम
जानकारी के अनुसार लोकसभा में इन तीनों विधेयकों पर 18 घंटे की चर्चा निर्धारित की गई है। 17 अप्रैल को लोकसभा में इन पर मतदान होगा। इसके बाद 18 अप्रैल को राज्यसभा में 10 घंटे की चर्चा के बाद मतदान प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
