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दुष्कर्म पीड़िता को मिली राहत, हाईकोर्ट ने दी 10 हफ्ते के गर्भ को खत्म करने की इजाजत
ग्वालियर (म.प्र.)
ग्वालियर हाईकोर्ट ने दुष्कर्म पीड़िता को राहत देते हुए 10 हफ्ते का गर्भ मेडिकल निगरानी में समाप्त करने की अनुमति दी।
ग्वालियर में दुष्कर्म पीड़िता को न्यायिक राहत मिली है, जहां हाईकोर्ट की एकल पीठ ने उसके 10 सप्ताह के गर्भ को समाप्त करने की अनुमति दे दी है। अदालत ने यह फैसला पीड़िता की शारीरिक, मानसिक और सामाजिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सुनाया। आदेश के अनुसार गर्भपात की प्रक्रिया निर्धारित समय पर जीआर मेडिकल कॉलेज में मेडिकल बोर्ड की निगरानी में कराई जाएगी।
घटना का विवरण और पीड़िता की स्थिति
याचिका में बताया गया कि 11 जनवरी को आरोपियों ने पीड़िता को घर से जबरन ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। इस घटना के बाद वह गर्भवती हो गई। वर्तमान में युवती की उम्र 18 वर्ष 5 माह बताई गई है। परिवार ने अदालत को बताया कि वे आर्थिक रूप से बच्चे का पालन-पोषण करने की स्थिति में नहीं हैं। इसके अलावा गर्भ के कारण युवती को लगातार शारीरिक दर्द, मानसिक तनाव और सामाजिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है।
मेडिकल बोर्ड से रिपोर्ट तलब
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अदालत ने कमलाराजा अस्पताल और जीआर मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञों से गठित मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट मांगी। जांच के बाद बोर्ड ने पुष्टि की कि गर्भ की अवधि 10 सप्ताह 3 दिन है और पीड़िता के सभी मेडिकल पैरामीटर सामान्य हैं।
सुरक्षित प्रक्रिया पर मेडिकल बोर्ड की राय
मेडिकल बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि आवश्यक सुविधाओं और विशेषज्ञों की निगरानी में गर्भपात पूरी तरह सुरक्षित तरीके से किया जा सकता है। इस रिपोर्ट को आधार मानते हुए अदालत ने पीड़िता को राहत देते हुए गर्भ समाप्त करने की अनुमति दे दी।
कोर्ट का मानवीय दृष्टिकोण
अदालत ने अपने आदेश में यह माना कि ऐसी परिस्थितियों में पीड़िता को गर्भ जारी रखने के लिए बाध्य करना उसके लिए और अधिक कष्टदायक हो सकता है। इसलिए उसके स्वास्थ्य और सम्मान को प्राथमिकता देते हुए यह निर्णय लिया गया।
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दुष्कर्म पीड़िता को मिली राहत, हाईकोर्ट ने दी 10 हफ्ते के गर्भ को खत्म करने की इजाजत
ग्वालियर (म.प्र.)
ग्वालियर में दुष्कर्म पीड़िता को न्यायिक राहत मिली है, जहां हाईकोर्ट की एकल पीठ ने उसके 10 सप्ताह के गर्भ को समाप्त करने की अनुमति दे दी है। अदालत ने यह फैसला पीड़िता की शारीरिक, मानसिक और सामाजिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सुनाया। आदेश के अनुसार गर्भपात की प्रक्रिया निर्धारित समय पर जीआर मेडिकल कॉलेज में मेडिकल बोर्ड की निगरानी में कराई जाएगी।
घटना का विवरण और पीड़िता की स्थिति
याचिका में बताया गया कि 11 जनवरी को आरोपियों ने पीड़िता को घर से जबरन ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। इस घटना के बाद वह गर्भवती हो गई। वर्तमान में युवती की उम्र 18 वर्ष 5 माह बताई गई है। परिवार ने अदालत को बताया कि वे आर्थिक रूप से बच्चे का पालन-पोषण करने की स्थिति में नहीं हैं। इसके अलावा गर्भ के कारण युवती को लगातार शारीरिक दर्द, मानसिक तनाव और सामाजिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है।
मेडिकल बोर्ड से रिपोर्ट तलब
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अदालत ने कमलाराजा अस्पताल और जीआर मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञों से गठित मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट मांगी। जांच के बाद बोर्ड ने पुष्टि की कि गर्भ की अवधि 10 सप्ताह 3 दिन है और पीड़िता के सभी मेडिकल पैरामीटर सामान्य हैं।
सुरक्षित प्रक्रिया पर मेडिकल बोर्ड की राय
मेडिकल बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि आवश्यक सुविधाओं और विशेषज्ञों की निगरानी में गर्भपात पूरी तरह सुरक्षित तरीके से किया जा सकता है। इस रिपोर्ट को आधार मानते हुए अदालत ने पीड़िता को राहत देते हुए गर्भ समाप्त करने की अनुमति दे दी।
कोर्ट का मानवीय दृष्टिकोण
अदालत ने अपने आदेश में यह माना कि ऐसी परिस्थितियों में पीड़िता को गर्भ जारी रखने के लिए बाध्य करना उसके लिए और अधिक कष्टदायक हो सकता है। इसलिए उसके स्वास्थ्य और सम्मान को प्राथमिकता देते हुए यह निर्णय लिया गया।
