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रामलला का दिव्य सूर्य तिलक, 9 मिनट तक ललाट पर चमकी किरणें
नेशनल न्यूज
रामनवमी पर अयोध्या में भव्य आयोजन, लाखों श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़
रामनवमी के पावन अवसर पर आज अयोध्या में भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। दोपहर 12 बजे अभिजीत मुहूर्त में रामलला का भव्य सूर्य तिलक किया गया। इस दौरान करीब 9 मिनट तक सूर्य की किरणें भगवान के ललाट पर पड़ीं, जिससे पूरा गर्भगृह दिव्य प्रकाश से भर उठा।
यह प्राण-प्रतिष्ठा के बाद दूसरा अवसर है जब इस विशेष सूर्य तिलक का आयोजन किया गया। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी क्षण भगवान राम का जन्म माना जाता है। सूर्य तिलक के समय गर्भगृह में 14 पुजारी मौजूद रहे, जिन्होंने वैदिक मंत्रों के बीच विशेष पूजा-अर्चना की। इसके बाद आरती संपन्न हुई और कुछ समय के लिए मंदिर के पट बंद कर दिए गए।
इससे पहले सुबह रामलला का पंचामृत से अभिषेक किया गया, जिसमें दूध, दही, घी, शहद और शक्कर का उपयोग किया गया। भगवान को स्वर्ण जड़ित पीतांबर वस्त्र पहनाए गए, जिनमें सोने-चांदी की बारीक कढ़ाई की गई है। इसके साथ ही आकर्षक आभूषण और मुकुट से श्रृंगार किया गया।
सूर्य तिलक के लिए विशेष तकनीकी व्यवस्था तैयार की गई थी। अष्टधातु के 20 पाइप और करीब 65 फीट लंबे सिस्टम के जरिए सूर्य की किरणों को गर्भगृह तक पहुंचाया गया। इसमें लेंस और दर्पणों का उपयोग कर किरणों को सीधे भगवान के मस्तक तक केंद्रित किया गया।
रामनवमी के अवसर पर अयोध्या में भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। अनुमान है कि करीब 10 लाख भक्त रामलला के दर्शन के लिए आए हैं। मंदिर परिसर, राम पथ, भक्ति पथ और जन्मभूमि पथ पर लंबी-लंबी कतारें देखी गईं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए दर्शन का समय भी बढ़ाकर सुबह 5 बजे से रात 11 बजे तक कर दिया गया।
पूरे शहर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। पुलिस बल, अर्धसैनिक बल और विशेष सुरक्षा एजेंसियां तैनात हैं। ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों के जरिए निगरानी की जा रही है ताकि आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।
सूर्य तिलक के बाद भगवान को 56 प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाया जाएगा, जिसमें विभिन्न प्रकार की मिठाइयां और फलाहार शामिल हैं। यह प्रसाद बाद में श्रद्धालुओं में वितरित किया जाएगा।
रामनवमी के इस भव्य आयोजन ने एक बार फिर अयोध्या को आस्था, परंपरा और आधुनिक तकनीक के संगम का केंद्र बना दिया है। भक्तों के लिए यह क्षण आध्यात्मिक अनुभव से कम नहीं रहा, जहां श्रद्धा और विज्ञान का अद्भुत मेल देखने को मिला।
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रामलला का दिव्य सूर्य तिलक, 9 मिनट तक ललाट पर चमकी किरणें
नेशनल न्यूज
रामनवमी के पावन अवसर पर आज अयोध्या में भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। दोपहर 12 बजे अभिजीत मुहूर्त में रामलला का भव्य सूर्य तिलक किया गया। इस दौरान करीब 9 मिनट तक सूर्य की किरणें भगवान के ललाट पर पड़ीं, जिससे पूरा गर्भगृह दिव्य प्रकाश से भर उठा।
यह प्राण-प्रतिष्ठा के बाद दूसरा अवसर है जब इस विशेष सूर्य तिलक का आयोजन किया गया। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी क्षण भगवान राम का जन्म माना जाता है। सूर्य तिलक के समय गर्भगृह में 14 पुजारी मौजूद रहे, जिन्होंने वैदिक मंत्रों के बीच विशेष पूजा-अर्चना की। इसके बाद आरती संपन्न हुई और कुछ समय के लिए मंदिर के पट बंद कर दिए गए।
इससे पहले सुबह रामलला का पंचामृत से अभिषेक किया गया, जिसमें दूध, दही, घी, शहद और शक्कर का उपयोग किया गया। भगवान को स्वर्ण जड़ित पीतांबर वस्त्र पहनाए गए, जिनमें सोने-चांदी की बारीक कढ़ाई की गई है। इसके साथ ही आकर्षक आभूषण और मुकुट से श्रृंगार किया गया।
सूर्य तिलक के लिए विशेष तकनीकी व्यवस्था तैयार की गई थी। अष्टधातु के 20 पाइप और करीब 65 फीट लंबे सिस्टम के जरिए सूर्य की किरणों को गर्भगृह तक पहुंचाया गया। इसमें लेंस और दर्पणों का उपयोग कर किरणों को सीधे भगवान के मस्तक तक केंद्रित किया गया।
रामनवमी के अवसर पर अयोध्या में भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। अनुमान है कि करीब 10 लाख भक्त रामलला के दर्शन के लिए आए हैं। मंदिर परिसर, राम पथ, भक्ति पथ और जन्मभूमि पथ पर लंबी-लंबी कतारें देखी गईं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए दर्शन का समय भी बढ़ाकर सुबह 5 बजे से रात 11 बजे तक कर दिया गया।
पूरे शहर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। पुलिस बल, अर्धसैनिक बल और विशेष सुरक्षा एजेंसियां तैनात हैं। ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों के जरिए निगरानी की जा रही है ताकि आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।
सूर्य तिलक के बाद भगवान को 56 प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाया जाएगा, जिसमें विभिन्न प्रकार की मिठाइयां और फलाहार शामिल हैं। यह प्रसाद बाद में श्रद्धालुओं में वितरित किया जाएगा।
रामनवमी के इस भव्य आयोजन ने एक बार फिर अयोध्या को आस्था, परंपरा और आधुनिक तकनीक के संगम का केंद्र बना दिया है। भक्तों के लिए यह क्षण आध्यात्मिक अनुभव से कम नहीं रहा, जहां श्रद्धा और विज्ञान का अद्भुत मेल देखने को मिला।
