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संसद रत्न पुरस्कार डॉ. कलाम की सोच से प्रेरित: सुकांत मजूमदार
Digital Desk
केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने कहा कि ‘संसद रत्न पुरस्कार’ एपीजे अब्दुल कलाम के विजन से प्रेरित हैं और सांसदों के संसदीय प्रदर्शन को सम्मानित करते हैं।
केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने कहा है कि संसद रत्न पुरस्कार पूर्व राष्ट्रपति और महान वैज्ञानिक डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की सोच और सुझाव से प्रेरित हैं। उन्होंने कहा कि संसद में सांसदों की जिम्मेदारियां काफी व्यापक होती हैं और उनके काम तथा योगदान को पहचान देने वाले ऐसे सम्मान जनप्रतिनिधियों का उत्साह बढ़ाते हैं।
नई दिल्ली में 9 सितंबर को आयोजित संसद रत्न पुरस्कारों के 16वें संस्करण के बाद ANI से बातचीत में मजूमदार ने सम्मान पाने वाले सांसदों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि संसद में लगातार प्रभावी ढंग से काम करने के लिए काफी मेहनत और समर्पण की जरूरत होती है।
इस वर्ष 12 व्यक्तिगत सांसदों और चार संसदीय समितियों को सम्मान के लिए चुना गया। इसके अलावा पहली बार डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम जन सेवा पुरस्कार भी शुरू किया गया।
कलाम की सोच से हुई शुरुआत
संसद रत्न पुरस्कारों की शुरुआत 2010 में Prime Point Foundation की ओर से की गई थी। इसकी प्रेरणा डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के सुझाव से मिली थी। पहले पुरस्कार समारोह का शुभारंभ भी डॉ. कलाम ने टेली-कॉन्फ्रेंस के माध्यम से किया था।
इस पुरस्कार का उद्देश्य संसद में बेहतर प्रदर्शन करने वाले सांसदों को सम्मानित करना रहा है। इसमें बहस, सवाल पूछने, प्राइवेट मेंबर बिल और संसदीय कार्यों में भागीदारी जैसे क्षेत्रों में प्रदर्शन को आधार बनाया जाता है।
मजूमदार के मुताबिक, पुरस्कार सांसदों को कठिन संसदीय जिम्मेदारियों के बीच और बेहतर काम करने के लिए प्रेरित करते हैं।
सांसदों के काम को मिली पहचान
नवीनतम पुरस्कार पाने वाले कई सांसदों ने सम्मान के लिए आभार जताया।
भाजपा सांसद नरहरि अमीन ने इसे अपने लंबे राजनीतिक जीवन के दौरान मिली महत्वपूर्ण पहचान बताया। उन्होंने सार्वजनिक जीवन में अपने अनुभव और राज्यसभा में छह वर्ष के कार्यकाल का भी उल्लेख किया।
कांग्रेस सांसद चरणजीत सिंह चन्नी ने भी पुरस्कार मिलने पर अपने जालंधर संसदीय क्षेत्र और पंजाब के मतदाताओं का आभार व्यक्त किया।
अलग-अलग राजनीतिक दलों से जुड़े सांसदों को सम्मान मिलना इस पहल के उस उद्देश्य को दर्शाता है जिसमें पार्टी से अधिक संसदीय प्रदर्शन और योगदान पर जोर दिया जाता है।
अनुराग ठाकुर ने सराहा सम्मान
भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा कि ऐसे पुरस्कार सांसदों का मनोबल बढ़ाते हैं और उन्हें संसद में अपने प्रदर्शन को और बेहतर करने के लिए प्रेरित करते हैं।
उन्होंने पुरस्कारों के पीछे डॉ. कलाम की सोच का भी उल्लेख किया और संसद में जनप्रतिनिधियों के काम को पहचान देने के लिए Prime Point Foundation की सराहना की।
संसद रत्न पुरस्कार संगठन के अनुसार, अब तक व्यक्तिगत सांसदों और संसदीय समितियों के योगदान को पहचान देने के लिए बड़ी संख्या में पुरस्कार दिए जा चुके हैं।
नरेश म्हस्के को दूसरी बार सम्मान
शिवसेना सांसद नरेश म्हस्के को दूसरी बार संसद रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
म्हस्के ने Prime Point Foundation का आभार जताते हुए यह सम्मान अपने मतदाताओं और शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे को समर्पित किया।
उन्होंने कहा कि इस तरह की पहचान नए सांसदों को भी संसदीय कार्यवाही में अधिक सक्रिय भागीदारी के लिए प्रोत्साहित करती है।
पुरस्कार पाने वाले सांसदों ने इसे उनकी संसदीय जिम्मेदारियों और सार्वजनिक सेवा के प्रति योगदान की मान्यता बताया।
नया कलाम जन सेवा पुरस्कार
इस वर्ष पुरस्कार समारोह में डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम जन सेवा पुरस्कार की नई श्रेणी भी शुरू की गई।
इस पुरस्कार के लिए राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) को 2026 का सम्मान दिया गया। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अनुसार, यह सम्मान संवैधानिक अधिकारों की रक्षा और सामाजिक न्याय को आगे बढ़ाने के लिए आयोग के काम से जुड़ा है।
नई श्रेणी ने संसद रत्न पुरस्कार कार्यक्रम के दायरे को संसदीय प्रदर्शन से आगे बढ़ाकर व्यापक जनसेवा से भी जोड़ा है।
संसदीय उत्कृष्टता को बढ़ावा
संसद रत्न पुरस्कारों का उद्देश्य सांसदों को लोकतांत्रिक और संसदीय कार्यप्रणाली में प्रभावी योगदान के लिए प्रोत्साहित करना है।
पुरस्कारों में बहस, संसदीय प्रश्न, प्राइवेट मेंबर बिल और विधायी कार्यवाही में भागीदारी जैसे प्रदर्शन मानकों को महत्व दिया जाता है।
पुरस्कार संगठन के अनुसार, 2025 में 15वें संस्करण के पूरा होने तक कुल 143 पुरस्कार प्रदान किए जा चुके थे।
इस पहल का उद्देश्य संसद में सक्रिय भागीदारी और गुणवत्तापूर्ण चर्चा की संस्कृति को बढ़ावा देना है।
लोकतंत्र से जोड़ा सम्मान
सुकांत मजूमदार की टिप्पणी इस बात पर जोर देती है कि संसदीय कार्य लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है और सांसदों के प्रदर्शन को सार्वजनिक रूप से पहचान मिलना उन्हें बेहतर काम के लिए प्रेरित कर सकता है।
2026 के समारोह में सांसदों, संसदीय समितियों और सार्वजनिक संस्थानों को सम्मानित किया गया। इससे विधायी प्रदर्शन और जनसेवा दोनों पर ध्यान केंद्रित हुआ।
मजूमदार के अनुसार, संसद रत्न पुरस्कारों की प्रासंगिकता इसी में है कि वे जनप्रतिनिधियों को संसद में अधिक मेहनत, सक्रिय भागीदारी और प्रभावी योगदान के लिए प्रेरित करते हैं। यह पहल डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम से जुड़ी उस सोच को आगे बढ़ाती है जिसमें सार्वजनिक जीवन में बेहतर प्रदर्शन और जनसेवा को प्रोत्साहन देने पर जोर था।
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