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रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म कराने में मदद को तैयार भारत: MEA
Digital Desk
भारत ने कहा कि वह रूस और यूक्रेन दोनों के संपर्क में है और संवाद, कूटनीति तथा युद्धविराम के प्रयासों में योगदान देने के लिए तैयार है।
भारत ने एक बार फिर रूस-यूक्रेन संघर्ष को समाप्त करने के लिए कूटनीतिक प्रयासों में योगदान देने की इच्छा जताई है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने कहा कि नई दिल्ली लगातार मॉस्को और कीव दोनों के संपर्क में है और ऐसे विचारों पर काम कर रही है, जो संघर्ष को रोकने में मदद कर सकते हैं।
MEA के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत का मानना है कि युद्ध का समाधान युद्ध के मैदान में नहीं, बल्कि संवाद और कूटनीति के जरिए निकाला जा सकता है।
उनका बयान विदेश मंत्री एस. जयशंकर की 3 से 5 सितंबर तक यूक्रेन और पोलैंड की यात्रा के कुछ दिनों बाद आया है। यात्रा के दौरान जयशंकर ने भारत की लंबे समय से चली आ रही स्थिति दोहराते हुए कहा था कि यह युद्ध का दौर नहीं है और भारत संघर्ष को समाप्त करने में मदद के लिए तैयार है।
भारत ने संवाद पर दिया जोर
रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत का रुख सैन्य समाधान के बजाय संवाद और कूटनीति पर केंद्रित है।
उन्होंने बताया कि जयशंकर ने हालिया बातचीत में भारत की उस स्थिति को दोहराया कि संघर्ष का स्थायी समाधान युद्ध के मैदान से नहीं निकल सकता। नई दिल्ली का मानना है कि सीधे संघर्ष में शामिल पक्षों को युद्ध समाप्त करने का रास्ता तलाशना होगा।
भारत ने साथ ही यह स्पष्ट किया है कि जहां उसका योगदान उपयोगी हो सकता है, वहां वह अपनी भूमिका निभाने के लिए तैयार है।
नई दिल्ली लंबे समय से रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को समाप्त करने तथा कूटनीतिक बातचीत बहाल करने की वकालत करती रही है।
जयशंकर ने किया कीव दौरा
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 3 सितंबर को कीव का दौरा किया था। वहां उन्होंने यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा से मुलाकात की और राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की से भी बातचीत की।
दौरे के दौरान भारत-यूक्रेन द्विपक्षीय संबंधों के साथ रूस-यूक्रेन संघर्ष और संभावित कूटनीतिक रास्तों पर भी चर्चा हुई।
जयशंकर ने कहा था कि भारत ने यूक्रेन के साथ युद्ध समाप्त करने के तरीकों को लेकर बातचीत की है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश भी साझा किया कि “अंतहीन युद्ध” की स्थिति को अब “युद्ध के अंत” की दिशा में ले जाना चाहिए।
मोदी ने शांति का संदेश दोहराया
भारत की हालिया कूटनीतिक पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच हुई बातचीत के बाद और महत्वपूर्ण हो गई है।
बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान हुई मुलाकात में मोदी ने संघर्ष को लंबे समय तक जारी रखने के बजाय उसके अंत की दिशा में आगे बढ़ने की जरूरत पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री पहले भी यह स्पष्ट कर चुके हैं कि मौजूदा दौर को युद्ध का दौर नहीं माना जाना चाहिए। भारत का लगातार कहना रहा है कि टिकाऊ समाधान के लिए बातचीत और कूटनीति ही प्रभावी रास्ता है।
रूस और यूक्रेन से संपर्क
भारत की कूटनीतिक रणनीति में दोनों पक्षों के साथ संवाद बनाए रखना अहम रहा है।
जायसवाल ने कहा कि नई दिल्ली रूस और यूक्रेन दोनों के संपर्क में है और संघर्ष समाप्त करने में योगदान देने वाले विभिन्न विचारों और सुझावों पर विचार कर रही है।
इस नीति से भारत दोनों देशों के साथ अपने स्वतंत्र राजनयिक संबंध बनाए रखते हुए शांति प्रयासों में संभावित भूमिका निभा सकता है।
रूस ने भी संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में भारत की भूमिका निभाने की इच्छा का स्वागत किया है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि मॉस्को भारत की स्थिति से अवगत है और रूस भी शांतिपूर्ण समाधान चाहता है।
युद्ध का असर वैश्विक
भारत की चिंता केवल यूरोप की सुरक्षा तक सीमित नहीं है। विदेश मंत्री जयशंकर ने युद्ध के व्यापक आर्थिक प्रभावों पर भी जोर दिया है।
यूक्रेन यात्रा के दौरान उन्होंने वाणिज्यिक समुद्री परिवहन में आई बाधाओं और ग्लोबल साउथ के देशों पर उनके प्रभाव का उल्लेख किया।
लंबे समय तक चलने वाले युद्ध से ईंधन, उर्वरक और खाद्य पदार्थों की उपलब्धता तथा कीमतों पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर दबाव बढ़ सकता है।
इसी वजह से भारत संघर्ष समाप्त करने की जरूरत को वैश्विक आर्थिक स्थिरता से भी जोड़कर देखता है।
रूस में भारतीय नागरिकों का मुद्दा
MEA की ब्रीफिंग में रूस की सेना में शामिल भारतीय नागरिकों का मुद्दा भी उठा।
रणधीर जायसवाल ने बताया कि करीब दो दर्जन भारतीय नागरिक अभी भी रूसी सेना में हैं। भारत ने मॉस्को के सामने यह मुद्दा उठाया है और उनके जल्द डिस्चार्ज की मांग की है।
इससे पहले विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बताया था कि 227 भारतीय नागरिकों की रूसी सशस्त्र बलों में भर्ती हुई थी। इनमें से 139 को सेवा से मुक्त किया जा चुका है, जबकि 51 की मौत हो चुकी है।
भारत रूस के साथ बाकी भारतीय नागरिकों की रिहाई और स्वदेश वापसी को लेकर लगातार बातचीत कर रहा है।
कूटनीति का रास्ता खुला
भारत के ताजा बयान से स्पष्ट है कि नई दिल्ली रूस-यूक्रेन संघर्ष में सैन्य टकराव के बजाय बातचीत और कूटनीति को प्राथमिक रास्ता मानती है।
युद्ध के पांचवें वर्ष में प्रवेश कर चुके इस संघर्ष में भारत का कहना है कि हर अतिरिक्त दिन जान-माल के नुकसान और विनाश को बढ़ाता है। नई दिल्ली दोनों पक्षों से शांति की दिशा में आगे बढ़ने की अपील कर रही है और जरूरत पड़ने पर अपने स्तर पर योगदान देने को तैयार है।
फिलहाल भारत मॉस्को और कीव दोनों के साथ संपर्क बनाए हुए है। आने वाले समय में भारत की भूमिका इस बात पर निर्भर करेगी कि रूस और यूक्रेन के बीच बातचीत और संभावित युद्धविराम के लिए कितनी कूटनीतिक गुंजाइश बनती है।
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