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केरल में चुनावी मोड, रोड शो और रैली में तीखे हमले
नेशनल न्यूज
दक्षिणी राज्य में प्रचार तेज, मंच से विरोधी दलों पर भ्रष्टाचार और वोट बैंक राजनीति के आरोप
केरल में चुनावी हलचल तेज हो गई है, जहां रविवार को एक बड़े राष्ट्रीय नेता ने प्रचार अभियान की शुरुआत करते हुए रोड शो और जनसभा के जरिए शक्ति प्रदर्शन किया। पलक्कड़ में रैली को संबोधित करने के बाद त्रिशूर में रोड शो निकाला गया, जिसमें सड़कों के दोनों ओर बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
जनसभा में दिए गए भाषण में राज्य की मौजूदा राजनीति पर तीखे सवाल उठाए गए। कहा गया कि लंबे समय से प्रदेश दो प्रमुख गठबंधनों के बीच फंसा हुआ है, जिनकी नीतियां विकास के बजाय वोट बैंक पर केंद्रित रही हैं। दोनों पर भ्रष्टाचार और सांप्रदायिक राजनीति के आरोप लगाए गए और यह दावा किया गया कि मौजूदा व्यवस्था से जनता निराश है।
सभा के दौरान यह भी कहा गया कि राज्य में बदलाव का माहौल बन रहा है और युवा, महिलाएं तथा किसान नए विकल्प की ओर देख रहे हैं। वक्ता ने दावा किया कि लोगों का समर्थन तेजी से बढ़ रहा है, जो आने वाले चुनावों में असर दिखा सकता है।
रोड शो के दौरान स्थानीय संस्कृति की झलक भी देखने को मिली। पारंपरिक वाद्य यंत्र बजाकर जनता से जुड़ने की कोशिश की गई, जिसे भीड़ ने उत्साह के साथ स्वीकार किया। यह आयोजन सिर्फ राजनीतिक संदेश तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जनसंपर्क का एक बड़ा मंच भी बना।
इसी बीच, अन्य राज्यों में भी चुनावी गतिविधियां तेज हो गई हैं। पूर्वी और उत्तर-पूर्वी राज्यों में अलग-अलग दलों के नेताओं ने रैलियां कर एक-दूसरे पर आरोप लगाए। कहीं सुरक्षा और सीमाओं का मुद्दा उठाया गया, तो कहीं घुसपैठ और रोजगार जैसे विषयों पर बहस तेज हुई।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार चुनावी मुकाबला पहले से ज्यादा तीखा हो सकता है। एक ओर सत्ता में बने रहने की कोशिश है, तो दूसरी ओर विपक्ष अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटा है। लगातार हो रहे दौरे और रैलियां इस बात का संकेत हैं कि सभी दल चुनाव को लेकर पूरी ताकत झोंक रहे हैं।
आने वाले दिनों में प्रचार और तेज होने की उम्मीद है। वर्चुअल संवाद, जनसभाएं और रोड शो के जरिए मतदाताओं तक पहुंचने की रणनीति बनाई जा रही है। इसके साथ ही विभिन्न दल अपने-अपने मुद्दों को प्रमुखता से उठाकर समर्थन जुटाने में लगे हैं।
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केरल में चुनावी मोड, रोड शो और रैली में तीखे हमले
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केरल में चुनावी हलचल तेज हो गई है, जहां रविवार को एक बड़े राष्ट्रीय नेता ने प्रचार अभियान की शुरुआत करते हुए रोड शो और जनसभा के जरिए शक्ति प्रदर्शन किया। पलक्कड़ में रैली को संबोधित करने के बाद त्रिशूर में रोड शो निकाला गया, जिसमें सड़कों के दोनों ओर बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
जनसभा में दिए गए भाषण में राज्य की मौजूदा राजनीति पर तीखे सवाल उठाए गए। कहा गया कि लंबे समय से प्रदेश दो प्रमुख गठबंधनों के बीच फंसा हुआ है, जिनकी नीतियां विकास के बजाय वोट बैंक पर केंद्रित रही हैं। दोनों पर भ्रष्टाचार और सांप्रदायिक राजनीति के आरोप लगाए गए और यह दावा किया गया कि मौजूदा व्यवस्था से जनता निराश है।
सभा के दौरान यह भी कहा गया कि राज्य में बदलाव का माहौल बन रहा है और युवा, महिलाएं तथा किसान नए विकल्प की ओर देख रहे हैं। वक्ता ने दावा किया कि लोगों का समर्थन तेजी से बढ़ रहा है, जो आने वाले चुनावों में असर दिखा सकता है।
रोड शो के दौरान स्थानीय संस्कृति की झलक भी देखने को मिली। पारंपरिक वाद्य यंत्र बजाकर जनता से जुड़ने की कोशिश की गई, जिसे भीड़ ने उत्साह के साथ स्वीकार किया। यह आयोजन सिर्फ राजनीतिक संदेश तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जनसंपर्क का एक बड़ा मंच भी बना।
इसी बीच, अन्य राज्यों में भी चुनावी गतिविधियां तेज हो गई हैं। पूर्वी और उत्तर-पूर्वी राज्यों में अलग-अलग दलों के नेताओं ने रैलियां कर एक-दूसरे पर आरोप लगाए। कहीं सुरक्षा और सीमाओं का मुद्दा उठाया गया, तो कहीं घुसपैठ और रोजगार जैसे विषयों पर बहस तेज हुई।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार चुनावी मुकाबला पहले से ज्यादा तीखा हो सकता है। एक ओर सत्ता में बने रहने की कोशिश है, तो दूसरी ओर विपक्ष अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटा है। लगातार हो रहे दौरे और रैलियां इस बात का संकेत हैं कि सभी दल चुनाव को लेकर पूरी ताकत झोंक रहे हैं।
आने वाले दिनों में प्रचार और तेज होने की उम्मीद है। वर्चुअल संवाद, जनसभाएं और रोड शो के जरिए मतदाताओं तक पहुंचने की रणनीति बनाई जा रही है। इसके साथ ही विभिन्न दल अपने-अपने मुद्दों को प्रमुखता से उठाकर समर्थन जुटाने में लगे हैं।
