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शेख हसीना दिसंबर में लौटेंगी बांग्लादेश, निष्पक्ष ट्रायल की मांग
Digital Desk
शेख हसीना ने दिसंबर में बांग्लादेश लौटने की योजना बताई है। उन्होंने सुरक्षा, वकील रखने का अधिकार, स्वतंत्र न्यायपालिका और निष्पक्ष ट्रायल की मांग की है।
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कहा है कि वह दिसंबर में ढाका लौटने की योजना बना रही हैं। यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब उनके खिलाफ गंभीर कानूनी मामले चल रहे हैं और बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने उन्हें उनकी अनुपस्थिति में मौत की सजा सुनाई है। CNN-News18 को दिए एक ताजा इंटरव्यू में हसीना ने कहा कि वह अदालत का सामना करने के लिए तैयार हैं, लेकिन उन्हें अपना पक्ष रखने का पूरा अधिकार मिलना चाहिए।
अवामी लीग नेता अगस्त 2024 में अपनी सरकार के पतन के बाद से भारत में रह रही हैं। उन्होंने कहा कि भारत उनका मित्र देश है, लेकिन बांग्लादेश उनकी मातृभूमि है और वह हमेशा के लिए देश से बाहर नहीं रह सकतीं।
उनकी प्रस्तावित वापसी ऐसे समय में हो रही है जब ढाका और नई दिल्ली के बीच उनके प्रत्यर्पण को लेकर तनाव बना हुआ है। हसीना ने स्पष्ट किया कि उनकी वापसी स्वेच्छा से होगी और इसे किसी प्रत्यर्पण समझौते से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
दिसंबर में वापसी की पुष्टि
शेख हसीना ने CNN-News18 से बातचीत में कहा कि वह दिसंबर में बांग्लादेश लौटने की योजना बना रही हैं और फिलहाल वापसी की प्रक्रिया पर काम कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि बांग्लादेश इस समय कठिन दौर से गुजर रहा है और वह ऐसे समय में अपने देश के लोगों के साथ खड़ा होना चाहती हैं। अगस्त में भी हसीना ने बांग्लादेश लौटने की इच्छा जताई थी। उस समय उन्होंने कहा था कि उन्हें हिरासत में लिए जाने या जेल भेजे जाने का खतरा हो सकता है, लेकिन डर उनके कर्तव्य को तय नहीं कर सकता।
पूर्व प्रधानमंत्री ने पहले भी संकेत दिया है कि वह और अवामी लीग के वरिष्ठ नेता स्वेच्छा से बांग्लादेश लौटकर कानूनी प्रक्रिया का सामना कर सकते हैं।
निष्पक्ष सुनवाई की मांग
हसीना ने कहा कि बांग्लादेश लौटने के लिए उनकी प्राथमिक चिंता व्यक्तिगत सुरक्षा, वकील रखने का अधिकार और अदालत में अपना बचाव करने का अवसर है।
उन्होंने स्वतंत्र न्यायपालिका और पारदर्शी कानूनी प्रक्रिया की भी मांग की। उनका कहना है कि वह अदालत का सामना करने को तैयार हैं, लेकिन न्याय का मतलब ऐसा फैसला नहीं होना चाहिए जो सुनवाई से पहले ही तय कर दिया गया हो।
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार की ओर से पहले कहा जा चुका है कि यदि हसीना देश लौटती हैं और मामलों का सामना करती हैं तो उन्हें कानूनी प्रक्रिया के तहत उचित अवसर दिया जाएगा।
मौत की सजा बनी बड़ी चुनौती
शेख हसीना के सामने सबसे बड़ी कानूनी चुनौती इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल द्वारा सुनाई गई मौत की सजा है। यह फैसला उनकी अनुपस्थिति में सुनाया गया था। मामला 2024 में छात्र नेतृत्व वाले आंदोलन के दौरान हुई हिंसक कार्रवाई से जुड़ा है, जिसके बाद हसीना की करीब 15 वर्ष लंबी सत्ता का अंत हुआ था।
हसीना ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज किया है। भारत में रहते हुए उन्होंने लगातार मौजूदा कानूनी प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।
ऐसे में उनकी संभावित वापसी राजनीतिक और न्यायिक दोनों स्तरों पर बड़ा घटनाक्रम होगी। बांग्लादेश पहुंचते ही उन्हें मौजूदा मामलों और ट्रिब्यूनल के फैसले का सामना करना पड़ सकता है।
ढाका ने कहा कानून चलेगा
बांग्लादेश सरकार लगातार कहती रही है कि शेख हसीना को वापस लाकर उनके खिलाफ चल रहे मामलों में न्यायिक प्रक्रिया पूरी की जानी चाहिए।
सूचना सलाहकार जाहेद उर रहमान ने कहा है कि यदि हसीना बांग्लादेश लौटकर मामलों का सामना करती हैं तो सरकार उनका स्वागत करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि हसीना अपनी पसंद के वकील नियुक्त कर सकती हैं और ट्रिब्यूनल की प्रक्रिया पारदर्शी रहनी चाहिए।
कानून मंत्री मोहम्मद असदुज्जमान ने भी कहा है कि यदि हसीना बांग्लादेश में प्रवेश करती हैं तो उनके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
इससे संकेत मिलता है कि उनकी वापसी की स्थिति में सरकार उन्हें राजनीतिक समझौते के बजाय मौजूदा कानूनी प्रक्रिया के दायरे में रख सकती है।
बैकचैनल बातचीत से इनकार
हसीना ने बांग्लादेश की सरकार के साथ किसी भी तरह की बैकचैनल बातचीत से इनकार किया है। उन्होंने बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार के साथ बातचीत की संभावना को खारिज करते हुए आरोप लगाया कि अवामी लीग के नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों को निशाना बनाया जा रहा है।
उनके मुताबिक अगस्त 2024 के बाद से पार्टी के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है। कई लोगों के खिलाफ मामले दर्ज हुए हैं, जबकि कुछ को नौकरी से हटाया गया है। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं पर हमलों और धमकियों का भी आरोप लगाया।
हसीना का कहना है कि अवामी लीग भविष्य में फिर जनता के बीच लौटेगी और उसका राजनीतिक संघर्ष जारी रहेगा।
वापसी की प्रक्रिया पर सवाल
दिसंबर में वापसी की घोषणा के बावजूद यह स्पष्ट नहीं है कि हसीना बांग्लादेश में प्रवेश किस दस्तावेज या कानूनी व्यवस्था के तहत करेंगी। रिपोर्टों के मुताबिक उनका राजनयिक पासपोर्ट रद्द किया जा चुका है। इससे उनकी यात्रा और प्रवेश की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठते हैं।
उनकी वापसी का भारत-बांग्लादेश संबंधों पर भी असर पड़ सकता है। ढाका पहले हसीना के प्रत्यर्पण की मांग कर चुका है, जबकि हसीना अपनी प्रस्तावित वापसी को स्वैच्छिक राजनीतिक फैसला बता रही हैं।
इस घटनाक्रम में भारत की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि हसीना पिछले दो वर्षों से भारत में रह रही हैं। हालांकि, हसीना ने स्पष्ट किया है कि उनकी वापसी को प्रत्यर्पण प्रक्रिया से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
बांग्लादेश की राजनीति की परीक्षा
शेख हसीना की दिसंबर में प्रस्तावित वापसी बांग्लादेश की राजनीति और न्यायिक व्यवस्था के लिए बड़ी परीक्षा साबित हो सकती है। उनकी मौजूदगी सरकार के सामने सुरक्षा, कानून और राजनीतिक स्थिरता से जुड़े कई सवाल खड़े कर सकती है।
सरकार को एक ओर ट्रिब्यूनल के मौजूदा फैसलों और कानूनी मामलों को लागू करना होगा, वहीं दूसरी ओर निष्पक्ष सुनवाई और आरोपी को अपना बचाव करने का अधिकार देने के दावे को भी कायम रखना होगा।
हसीना के लिए यह वापसी भारत में लगभग दो वर्ष बिताने के बाद राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण कदम होगी। उनका कहना है कि वह कानूनी परिणामों का सामना करने के लिए तैयार हैं, बशर्ते उन्हें आरोपों को चुनौती देने और अपना पक्ष रखने का उचित अवसर मिले।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या शेख हसीना दिसंबर में वास्तव में बांग्लादेश लौटती हैं और यदि वह ढाका पहुंचती हैं तो उनके खिलाफ तत्काल कौन-सी कानूनी कार्रवाई होती है। इसका जवाब उस समय की राजनीतिक और न्यायिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
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