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शेयर बाजार में बड़ी गिरावट: अमेरिका-ईरान तनाव और महंगे कच्चे तेल से सहमा बाजार, सेंसेक्स 700 अंक से ज्यादा टूटा; निफ्टी 23,830 के नीचे
Digital Desk
अमेरिका-ईरान संघर्ष के फिर तेज होने से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है। इसका असर बुधवार को भारतीय शेयर बाजार पर दिखा और शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 700 अंक से ज्यादा गिर गया, जबकि निफ्टी भी 23,830 के आसपास फिसल गया।
भारतीय शेयर बाजार में बुधवार, 2 सितंबर 2026 को कारोबार की शुरुआत तेज गिरावट के साथ हुई। अमेरिका और ईरान के बीच फिर बढ़े सैन्य तनाव ने वैश्विक बाजारों में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति बढ़ा दी। इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के शेयर बाजार पर दबाव बढ़ा दिया। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 700 अंक से ज्यादा नीचे चला गया, जबकि निफ्टी भी 23,830 के स्तर के आसपास फिसल गया।
बाजार की शुरुआती कमजोरी आगे बढ़कर व्यापक बिकवाली में बदल गई। सुबह 9:46 बजे तक निफ्टी 50 करीब 0.89 प्रतिशत गिरकर 23,841.40 पर और बीएसई सेंसेक्स 0.79 प्रतिशत की गिरावट के साथ 76,333.20 पर कारोबार कर रहा था। इस दौरान सभी 16 प्रमुख सेक्टरों में कमजोरी दर्ज की गई। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी क्रमशः करीब 1.1 प्रतिशत और 0.8 प्रतिशत की गिरावट रही।
अमेरिका-ईरान तनाव का बाजार पर सीधा असर
बाजार की चिंता का सबसे बड़ा कारण पश्चिम एशिया में संघर्ष का फिर तेज होना है। अमेरिका ने ईरान में सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर हमले किए, जिसके बाद ईरान की ओर से भी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की खबरें सामने आईं। इस घटनाक्रम ने निवेशकों में यह आशंका बढ़ाई है कि संघर्ष लंबा खिंचने पर तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
यही आशंका कच्चे तेल की कीमतों में दिखाई दी। बुधवार को ब्रेंट क्रूड करीब 1 प्रतिशत बढ़कर 95.4 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में इसकी कीमत इससे भी ऊपर गई थी। तेल महंगा होने से भारत का आयात बिल बढ़ने और महंगाई पर दबाव आने की चिंता निवेशकों को परेशान कर रही है।
किन शेयरों पर ज्यादा दबाव?
तेल की कीमतों में तेजी का असर उन कंपनियों पर खास तौर पर पड़ रहा है जिनकी लागत या कारोबार सीधे ऊर्जा कीमतों से प्रभावित होता है। शुरुआती कारोबार में ऑयल मार्केटिंग कंपनियों, टायर और पेंट कंपनियों तथा विमानन क्षेत्र के शेयरों पर दबाव देखा गया। दूसरी ओर, कुछ चुनिंदा शेयरों में कंपनी-विशेष खबरों के चलते खरीदारी भी देखने को मिली।
महंगे तेल से भारत की चिंता क्यों बढ़ी?
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत बढ़ने का असर देश के आयात बिल, चालू खाते, मुद्रास्फीति और कंपनियों की लागत पर पड़ सकता है। यदि तेल लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बना रहता है, तो निवेशकों की चिंता केवल शेयर बाजार तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि ब्याज दरों और आर्थिक वृद्धि के अनुमान पर भी असर पड़ सकता है।
वैश्विक स्तर पर भी निवेशकों का रुख सतर्क है। तेल की तेजी के साथ बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी ने इस आशंका को मजबूत किया है कि महंगाई का दबाव बढ़ने पर केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में जल्द कटौती के बजाय सख्त रुख बनाए रख सकते हैं। इससे उभरते बाजारों में विदेशी निवेश के लिए परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण हो सकती हैं।
आगे बाजार की नजर किन संकेतों पर?
भारतीय शेयर बाजार की अगली दिशा मुख्य रूप से पश्चिम एशिया में संघर्ष की स्थिति, कच्चे तेल की कीमत और वैश्विक बॉन्ड यील्ड पर निर्भर करेगी। यदि तेल की कीमतें लगातार ऊंची रहती हैं और भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है, तो बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। इसके विपरीत तनाव कम होने और तेल कीमतों में नरमी आने पर निवेशकों का ध्यान फिर घरेलू आर्थिक आंकड़ों और कंपनियों के प्रदर्शन पर लौट सकता है।
नोट: शुरुआती कारोबार के आंकड़े तेजी से बदलते हैं। इसलिए बाजार बंद होने के बाद सेंसेक्स-निफ्टी के अंतिम स्तर शुरुआती आंकड़ों से अलग हो सकते हैं।
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