तमिलनाडु विधानसभा में विजय बनाम डीएमके, वॉकआउट से बढ़ा टकराव

Digital Desk

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तमिलनाडु विधानसभा में मुख्यमंत्री विजय के डीएमके पर भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद हंगामा हुआ। उदयनिधि स्टालिन को जवाब की अनुमति नहीं मिलने पर डीएमके ने वॉकआउट किया।

तमिलनाडु विधानसभा में सोमवार को मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के भाषण ने सदन की कार्यवाही को बड़े राजनीतिक टकराव में बदल दिया। गृह विभाग और कानून-व्यवस्था पर चर्चा के दौरान विजय ने पिछली डीएमके सरकार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय (डीवीएसी) तथा सरकारिया आयोग का हवाला दिया।

मुख्यमंत्री के आरोपों का जवाब देने के लिए विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने अनुमति मांगी। हालांकि, विधानसभा अध्यक्ष जे.सी.डी. प्रभाकर ने उन्हें तत्काल जवाब देने की अनुमति नहीं दी। इसके बाद डीएमके विधायक सदन के वेल में पहुंच गए, नारेबाजी की और अंततः वॉकआउट कर दिया।

विजय ने डीएमके पर साधा निशाना

विजय ने शुरुआत में अपनी सरकार के कानून-व्यवस्था से जुड़े कामकाज का बचाव किया। उन्होंने पुलिस में रिक्त पदों, आधुनिकीकरण, डिजिटल व्यवस्था, अपराध रोकथाम और पुलिस व्यवस्था में राजनीतिक हस्तक्षेप कम करने की जरूरत पर बात की।

इसके बाद मुख्यमंत्री ने पिछली डीएमके सरकार की ओर रुख किया। उन्होंने ईडी और डीवीएसी से जुड़े दस्तावेजों का हवाला देते हुए सरकारी ठेकों और कथित “पार्टी फंड” के नाम पर धन जुटाने के आरोप लगाए। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन, उदयनिधि स्टालिन और पूर्व मंत्रियों का भी उल्लेख किया।

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विजय ने सरकारिया आयोग की रिपोर्ट का भी हवाला देते हुए डीएमके के पुराने शासनकाल में भ्रष्टाचार के आरोपों को सदन में उठाया।

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जवाब नहीं मिला तो हंगामा

मुख्यमंत्री के आरोपों के दौरान उदयनिधि स्टालिन और अन्य डीएमके विधायक खड़े हो गए। उदयनिधि ने अपने और पूर्व डीएमके सरकार के खिलाफ लगाए गए आरोपों का जवाब देने की मांग की।

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हालांकि, विजय अपना भाषण जारी रखते रहे। डीएमके विधायकों ने नारेबाजी शुरू कर दी और आरोप लगाया कि गंभीर आरोप लगाने के बाद विपक्ष को जवाब देने का अवसर नहीं दिया जा रहा है।

स्थिति बिगड़ने पर कई डीएमके विधायक सदन के वेल में पहुंच गए। उन्होंने पोस्टर और पर्चे भी प्रदर्शित किए। अध्यक्ष ने कहा कि बिना अनुमति सदन में पोस्टर लाना उचित नहीं है और आरोप लगाया कि विपक्ष मुख्यमंत्री का जवाब रोकने की कोशिश कर रहा है।

अध्यक्ष के फैसले से वॉकआउट

कुछ समय बाद डीएमके विधायक अपनी सीटों पर लौट आए। उन्हें उम्मीद थी कि उदयनिधि को मुख्यमंत्री के आरोपों का जवाब देने का अवसर मिलेगा।

लेकिन अध्यक्ष ने बाद में उदयनिधि को तत्काल बोलने की अनुमति नहीं दी। इसके बाद डीएमके विधायकों ने विरोध में सदन से वॉकआउट कर दिया।

वॉकआउट के बाद उदयनिधि ने विजय के आरोपों को आधारहीन बताया। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियों के दस्तावेजों में किसी का नाम आना अपने आप में अपराध साबित नहीं करता। उन्होंने मुख्यमंत्री पर मौजूदा सरकार के प्रदर्शन से जुड़े सवालों से बचने के लिए पुराने मामलों को उठाने का आरोप भी लगाया।

कानून-व्यवस्था से राजनीति तक

इस घटनाक्रम की शुरुआत कानून-व्यवस्था पर चर्चा से हुई थी, लेकिन मुख्यमंत्री के भाषण के बाद बहस का केंद्र पिछली डीएमके सरकार का कथित भ्रष्टाचार बन गया।

विजय ने पुलिस भर्ती, आधुनिकीकरण और अपराध नियंत्रण की बात करते हुए अपनी सरकार की प्राथमिकताएं बताईं। इसके बाद उन्होंने विपक्ष के शासनकाल से जुड़े आरोपों को प्रमुखता दी।

राजनीतिक रूप से इस रणनीति ने बहस का मुद्दा बदल दिया। सरकार के मौजूदा प्रदर्शन पर विपक्ष के सवालों के बजाय सदन में चर्चा इस बात पर केंद्रित हो गई कि पिछली डीएमके सरकार के दौरान क्या हुआ था।

उदयनिधि ने बताया राजनीतिक रणनीति

वॉकआउट के बाद उदयनिधि ने मुख्यमंत्री के भाषण को “डायवर्जनरी टैक्टिक्स” बताया। उनका आरोप था कि विजय ने कानून-व्यवस्था से जुड़े सवालों का जवाब देने के बजाय पुराने मुद्दे उठाकर ध्यान भटकाने की कोशिश की।

उदयनिधि ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री को अपने आरोपों के समर्थन में उचित प्रमाण सदन में रखने चाहिए। डीएमके ने विजय पर अपने शासन के प्रदर्शन से जुड़े सवालों से बचने का आरोप लगाया है।

वहीं, विजय सरकार की ओर से यह रुख सामने आया कि मुख्यमंत्री ने पिछली सरकार के कार्यकाल से जुड़े दस्तावेजों और उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर सवाल उठाए हैं।

महिलाओं पर टिप्पणी से विवाद

मुख्यमंत्री विजय ने अपने भाषण में राजनीति में महिलाओं के प्रति अपमानजनक टिप्पणियों की भी आलोचना की। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता और 1989 के विधानसभा घटनाक्रम का संदर्भ दिया।

यह टिप्पणी ऐसे समय आई जब उदयनिधि स्टालिन से जुड़ी अभिनेता त्रिशा को लेकर हालिया विवाद भी राजनीतिक चर्चा में था। डीएमके ने उस टिप्पणी की अलग व्याख्या की है, जबकि विजय ने राजनीति में महिलाओं के सम्मान को लेकर कड़ा रुख जताया।

इस मुद्दे ने विधानसभा की राजनीतिक बहस को भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था से आगे सामाजिक और व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप तक पहुंचा दिया।

आगे बढ़ा राजनीतिक टकराव

डीएमके के वॉकआउट ने विधानसभा सत्र की शुरुआत में ही सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच गहरी राजनीतिक दूरी को उजागर कर दिया है। मंगलवार को भी विजय की पिछली टिप्पणियों को लेकर डीएमके और सत्तापक्ष के बीच टकराव जारी रहा।

डीएमके विधायक ई.वी. वेलु ने मुख्यमंत्री द्वारा एमआईएसए और सरकारिया आयोग के संदर्भों पर आपत्ति जताई और कहा कि जांच के अधीन मामलों को सदन में इस तरह नहीं उठाया जाना चाहिए। अध्यक्ष ने विजय की एमआईएसए संबंधी टिप्पणियों को रिकॉर्ड से हटाने की डीएमके की मांग खारिज कर दी।

अब विधानसभा की आगामी कार्यवाही में सरकार के प्रदर्शन, पिछली डीएमके सरकार पर लगाए गए आरोपों और विपक्ष को जवाब देने के अधिकार पर टकराव और बढ़ने की संभावना है। इस राजनीतिक संघर्ष का असर केवल सदन की कार्यवाही तक सीमित रहेगा या तमिलनाडु की व्यापक राजनीति का प्रमुख मुद्दा बनेगा, इस पर नजर रहेगी।

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