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ममता-शाह में जुबानी जंग तेज
नेशनल न्यूज
चुनावी माहौल गरमाया, ममता बनर्जी का पलटवार—'मैं मौत से लड़ी हूं', अमित शाह ने उठाए थे सवाल
पश्चिम बंगाल समेत पांच राज्यों में जारी चुनावी सरगर्मी के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। रविवार को पुरुलिया में एक जनसभा को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने शाह के आरोपों पर कड़ा जवाब दिया और कहा कि उन्होंने “मौत से लड़ाई लड़ी है” और उनके स्वास्थ्य पर सवाल उठाना अनुचित है।
ममता बनर्जी ने कहा कि विपक्ष उनके जख्मों और चोटों को लेकर राजनीति कर रहा है, जबकि सच्चाई यह है कि उन पर पहले भी हमले हुए हैं। उन्होंने कहा कि वह लंबे समय तक प्लास्टर में रहीं और व्हीलचेयर पर भी चुनाव प्रचार किया। उन्होंने अमित शाह को डॉक्टरों की रिपोर्ट देखने की सलाह दी।
दरअसल, एक दिन पहले कोलकाता में रैली के दौरान अमित शाह ने ममता पर ‘विक्टिम कार्ड’ खेलने का आरोप लगाया था। शाह ने कहा था कि चुनाव आते ही ममता बनर्जी कभी पैर में चोट का हवाला देती हैं तो कभी सिर पर पट्टी बांधकर सहानुभूति लेने की कोशिश करती हैं। उन्होंने दावा किया कि जनता अब इस तरह की राजनीति को समझ चुकी है।
इसी बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी केरल में चुनाव प्रचार की शुरुआत की है। वे पलक्कड़ में जनसभा और त्रिशूर में रोड शो के जरिए पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। आगामी दिनों में असम और पुडुचेरी के कार्यकर्ताओं से उनका वर्चुअल संवाद भी प्रस्तावित है।
चुनाव से जुड़े अन्य घटनाक्रमों में पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में टीएमसी की रैली के दौरान मंच के एक हिस्से में आग लगने की घटना सामने आई, हालांकि इसमें कोई हताहत नहीं हुआ। वहीं, असम में भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। अमित शाह ने असम में रैली के दौरान कांग्रेस शासन पर आतंकवाद और हिंसा को बढ़ावा देने का आरोप लगाया, जबकि कांग्रेस नेताओं ने भाजपा की नीतियों पर सवाल उठाए।
दक्षिण भारत में भी चुनावी गतिविधियां तेज हो रही हैं। तमिलनाडु में अभिनेता विजय अपनी पार्टी के साथ चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं। वहीं, केरल में कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भाजपा को ‘अप्रभावी’ बताते हुए मतदाताओं से रणनीतिक मतदान की अपील की है।
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, इस बार चुनाव में व्यक्तिगत हमले और तीखी बयानबाजी प्रमुख मुद्दों पर हावी होती दिख रही है। हालांकि, मतदाता अंतिम फैसला विकास, स्थानीय मुद्दों और नेतृत्व के आधार पर ही करेंगे।
आने वाले दिनों में चुनाव प्रचार और तेज होने की संभावना है, जिसमें शीर्ष नेताओं के बीच जुबानी जंग और भी तीखी हो सकती है।
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ममता-शाह में जुबानी जंग तेज
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पश्चिम बंगाल समेत पांच राज्यों में जारी चुनावी सरगर्मी के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। रविवार को पुरुलिया में एक जनसभा को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने शाह के आरोपों पर कड़ा जवाब दिया और कहा कि उन्होंने “मौत से लड़ाई लड़ी है” और उनके स्वास्थ्य पर सवाल उठाना अनुचित है।
ममता बनर्जी ने कहा कि विपक्ष उनके जख्मों और चोटों को लेकर राजनीति कर रहा है, जबकि सच्चाई यह है कि उन पर पहले भी हमले हुए हैं। उन्होंने कहा कि वह लंबे समय तक प्लास्टर में रहीं और व्हीलचेयर पर भी चुनाव प्रचार किया। उन्होंने अमित शाह को डॉक्टरों की रिपोर्ट देखने की सलाह दी।
दरअसल, एक दिन पहले कोलकाता में रैली के दौरान अमित शाह ने ममता पर ‘विक्टिम कार्ड’ खेलने का आरोप लगाया था। शाह ने कहा था कि चुनाव आते ही ममता बनर्जी कभी पैर में चोट का हवाला देती हैं तो कभी सिर पर पट्टी बांधकर सहानुभूति लेने की कोशिश करती हैं। उन्होंने दावा किया कि जनता अब इस तरह की राजनीति को समझ चुकी है।
इसी बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी केरल में चुनाव प्रचार की शुरुआत की है। वे पलक्कड़ में जनसभा और त्रिशूर में रोड शो के जरिए पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। आगामी दिनों में असम और पुडुचेरी के कार्यकर्ताओं से उनका वर्चुअल संवाद भी प्रस्तावित है।
चुनाव से जुड़े अन्य घटनाक्रमों में पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में टीएमसी की रैली के दौरान मंच के एक हिस्से में आग लगने की घटना सामने आई, हालांकि इसमें कोई हताहत नहीं हुआ। वहीं, असम में भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। अमित शाह ने असम में रैली के दौरान कांग्रेस शासन पर आतंकवाद और हिंसा को बढ़ावा देने का आरोप लगाया, जबकि कांग्रेस नेताओं ने भाजपा की नीतियों पर सवाल उठाए।
दक्षिण भारत में भी चुनावी गतिविधियां तेज हो रही हैं। तमिलनाडु में अभिनेता विजय अपनी पार्टी के साथ चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं। वहीं, केरल में कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भाजपा को ‘अप्रभावी’ बताते हुए मतदाताओं से रणनीतिक मतदान की अपील की है।
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, इस बार चुनाव में व्यक्तिगत हमले और तीखी बयानबाजी प्रमुख मुद्दों पर हावी होती दिख रही है। हालांकि, मतदाता अंतिम फैसला विकास, स्थानीय मुद्दों और नेतृत्व के आधार पर ही करेंगे।
आने वाले दिनों में चुनाव प्रचार और तेज होने की संभावना है, जिसमें शीर्ष नेताओं के बीच जुबानी जंग और भी तीखी हो सकती है।
