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रानी दुर्गावती पर लिखी किताब – प्रवीन आनंद का ऐतिहासिक और प्रेरक कार्य
Jagran Desk
प्रवीन आनंद की किताब “रानी दुर्गावती – जिन्होंने जिंदगानी में कभी युद्ध नहीं हारा” 2025 में प्रकाशित होकर इतिहास प्रेमियों और पाठकों में चर्चा का विषय बनी।
उत्तर प्रदेश सरकार के ग्रामीण विकास विभाग में उप-आयुक्त के रूप में सेवा दे रहे प्रवीन आनंद साहित्य जगत में भी अपनी पहचान बना चुके हैं। कानपुर में जन्मे प्रवीन आनंद ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा और उच्च शिक्षा यहीं से पूरी की। इसके बाद उन्होंने प्रयागराज के मोतीलाल नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ़ रिसर्च एंड बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (MONIRBA) से MBA की पढ़ाई की।
साहित्यिक करियर की शुरुआत उन्होंने प्रेरक कहानियों जैसे “मुक्ता” और “मेरी सहेली” से की। उनका पहला उपन्यास “I Love You More Than Anyone Else” (2013) पाठकों के बीच सराहा गया। इसके बाद 2014 में उन्होंने “Mars, Love and Breakups” लिखा। व्यापक पहचान उन्हें “Mumtaz and Taj Mahal” (2018) और “Acid – Why I Was Acid Attacked” (2024) जैसी किताबों के माध्यम से मिली, जो Amazon Kindle पर बेस्टसेलर रही।
उनका नवीनतम और सबसे चर्चित कार्य “Rani Durgawati – Who Never Lost a War, Till She Was Alive” (2025) रानी दुर्गावती के जीवन और वीरता का विस्तृत और ऐतिहासिक विवरण प्रस्तुत करता है।
रानी दुर्गावती का साहस और नेतृत्व
इस किताब में रानी दुर्गावती की अदम्य वीरता और नेतृत्व क्षमता को बड़ी सजीवता और ऐतिहासिक सटीकता के साथ प्रस्तुत किया गया है। लेखक ने कलिंजर की राजकुमारी और राजा कीर्तिवर्धन सिंह की पुत्री की कहानी को जीवंत रूप में पेश किया है। इतिहास में कलिंजर वही स्थल है, जहां हिंदुस्तान के शासक शेर शाह सूरी का निधन हुआ था।
रानी दुर्गावती ने पति के निधन के बाद सती प्रथा का पालन नहीं किया। इसके बजाय उन्होंने गढ़ा कटंगा राज्य (वर्तमान में जबलपुर और आसपास के क्षेत्र) की सत्ता संभाली और न्याय व साहस के साथ शासन किया। मुगल साम्राज्य और अकबर की चुनौती के बावजूद उन्होंने कभी आत्मसमर्पण नहीं किया।
वीरता के अद्भुत उदाहरण
रानी दुर्गावती ने 52 युद्ध लड़े और उनमें से 51 में विजय प्राप्त की। 24 जून 1564 को अंतिम युद्ध में उन्होंने कैद होने के बजाय अपने सम्मान और राज्य की रक्षा के लिए खून से लथपथ अपने जीवन का अंत किया।
भारत सरकार ने उनके 500वें जन्मोत्सव वर्ष 2024 को विशेष रूप से मनाया। इस अवसर का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मध्य प्रदेश के शहडोल में किया।
प्रवीन आनंद की यह किताब न केवल रानी दुर्गावती के इतिहास को जीवंत बनाती है, बल्कि युवाओं और इतिहास प्रेमियों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है।
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