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इंदौर छावनी में तोड़फोड़ विरोध, आज ‘न्याय रैली’ का ऐलान
इंदौर,(म.प्र.)
सड़क चौड़ीकरण कार्रवाई पर जनहित पार्टी का आरोप—बिना मुआवजा और बिना सहमति तोड़े गए घर-दुकान, शाम 7 बजे रैली
इंदौर के छावनी क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण के नाम पर हाल ही में हुई तोड़फोड़ और कार्रवाई को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। जनहित पार्टी ने नगर निगम और प्रशासन की इस कार्रवाई को लेकर तीखा विरोध दर्ज करते हुए शनिवार शाम 7 बजे ‘न्याय रैली’ निकालने का ऐलान किया है। पार्टी का आरोप है कि बिना सहमति और बिना पर्याप्त मुआवजा दिए कई परिवारों के घर और दुकानें अचानक ढहा दी गईं, जिससे इलाके में तनाव का माहौल बन गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सुबह के समय अचानक भारी पुलिस बल और जेसीबी मशीनें पहुंचीं और कुछ ही घंटों में कई निर्माण ढहा दिए गए। कई लोगों को अपना सामान निकालने तक का समय नहीं मिला। इस पूरी कार्रवाई को लेकर विपक्षी स्वर भी तेज हो गए हैं और इसे विकास के नाम पर अन्याय बताया जा रहा है। जनहित पार्टी के नेताओं का कहना है कि छावनी क्षेत्र की 136 साल पुरानी बसाहट को इस तरह से उजाड़ देना सही नहीं है। वहीं प्रशासन का पक्ष है कि कार्रवाई सड़क चौड़ीकरण और जनहित के कार्य के तहत की गई है, लेकिन विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। कार्रवाई के बाद क्षेत्र में कई दुकानों ने दिनभर बंद रखा और यातायात भी प्रभावित हुआ। लोग पूरे घटनाक्रम पर लगातार चर्चा करते नजर आए।
पार्टी और स्थानीय रहवासियों का आरोप है कि नियमों के अनुसार प्रभावित लोगों को कम से कम सात दिन का नोटिस दिया जाना चाहिए था, लेकिन केवल दो दिन पहले सूचना देकर कार्रवाई शुरू कर दी गई। आरोप यह भी लगाया जा रहा है कि कार्रवाई के दौरान भारी पुलिस बल की मौजूदगी में बिना बातचीत के ही मकानों पर बुलडोजर चला दिए गए। कई लोगों ने दावा किया है कि उनके पास संपत्तियों की वैध रजिस्ट्री और पुराने दस्तावेज मौजूद हैं, इसके बावजूद निर्माण गिरा दिए गए। कुछ स्थानों पर जहां केवल दस फीट तक निर्माण हटाने की बात कही गई थी, वहां कथित तौर पर बीस फीट तक मकान तोड़ दिए गए, जिससे नुकसान और बढ़ गया। बियाबानी, गणेशगंज, खजूरी बाजार और शीतला माता बाजार जैसे पुराने और घने बसे इलाके पहले ही विकास परियोजनाओं की वजह से प्रभावित हो चुके हैं, और अब छावनी क्षेत्र की यह कार्रवाई लोगों में डर और असंतोष पैदा कर रही है। स्थानीय व्यापारी वर्ग का कहना है कि लगातार हो रही तोड़फोड़ से उनका रोजगार भी प्रभावित हो रहा है और बाजारों की रौनक खत्म होती जा रही है। कई लोग इसे शहर के पुराने स्वरूप को खत्म करने जैसा कदम बता रहे हैं। कई प्रभावित परिवारों का यह भी कहना है कि उन्हें मुआवजे की प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। इस मुद्दे पर प्रशासनिक स्तर पर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं।
पार्टी ने इस पूरे मामले को लेकर कई मांगें रखी हैं जिनमें एफएआर और टीडीआर जैसे प्रावधानों को समाप्त करने की मांग प्रमुख है। साथ ही यह भी कहा गया है कि जिन लोगों के पुश्तैनी मकान या रजिस्ट्री आधारित संपत्तियां प्रभावित हुई हैं उन्हें बाजार मूल्य से कम से कम दोगुना मुआवजा दिया जाना चाहिए। पार्टी का कहना है कि सरकार की मनमानी और दमनात्मक कार्रवाई पर रोक लगनी चाहिए और किसी भी विकास योजना को लागू करने से पहले स्थानीय लोगों की सहमति अनिवार्य होनी चाहिए। इसके अलावा शहर में हरियाली, स्वच्छ हवा और जल संरक्षण जैसे मुद्दों को प्राथमिकता देने की भी बात कही गई है। छोटे व्यापारियों, ठेले और फेरी वालों के रोजगार को सुरक्षित रखने की मांग भी उठाई गई है, क्योंकि लगातार कार्रवाई से उनकी आजीविका पर असर पड़ रहा है। इसी के साथ यह भी कहा गया है कि बस स्टैंड, आरटीओ और न्यायालय जैसी जनसुविधाओं को शहर के भीतर ही सुचारू रूप से संचालित किया जाए ताकि आम नागरिकों को परेशानी न हो।
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इंदौर छावनी में तोड़फोड़ विरोध, आज ‘न्याय रैली’ का ऐलान
इंदौर,(म.प्र.)
इंदौर के छावनी क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण के नाम पर हाल ही में हुई तोड़फोड़ और कार्रवाई को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। जनहित पार्टी ने नगर निगम और प्रशासन की इस कार्रवाई को लेकर तीखा विरोध दर्ज करते हुए शनिवार शाम 7 बजे ‘न्याय रैली’ निकालने का ऐलान किया है। पार्टी का आरोप है कि बिना सहमति और बिना पर्याप्त मुआवजा दिए कई परिवारों के घर और दुकानें अचानक ढहा दी गईं, जिससे इलाके में तनाव का माहौल बन गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सुबह के समय अचानक भारी पुलिस बल और जेसीबी मशीनें पहुंचीं और कुछ ही घंटों में कई निर्माण ढहा दिए गए। कई लोगों को अपना सामान निकालने तक का समय नहीं मिला। इस पूरी कार्रवाई को लेकर विपक्षी स्वर भी तेज हो गए हैं और इसे विकास के नाम पर अन्याय बताया जा रहा है। जनहित पार्टी के नेताओं का कहना है कि छावनी क्षेत्र की 136 साल पुरानी बसाहट को इस तरह से उजाड़ देना सही नहीं है। वहीं प्रशासन का पक्ष है कि कार्रवाई सड़क चौड़ीकरण और जनहित के कार्य के तहत की गई है, लेकिन विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। कार्रवाई के बाद क्षेत्र में कई दुकानों ने दिनभर बंद रखा और यातायात भी प्रभावित हुआ। लोग पूरे घटनाक्रम पर लगातार चर्चा करते नजर आए।
पार्टी और स्थानीय रहवासियों का आरोप है कि नियमों के अनुसार प्रभावित लोगों को कम से कम सात दिन का नोटिस दिया जाना चाहिए था, लेकिन केवल दो दिन पहले सूचना देकर कार्रवाई शुरू कर दी गई। आरोप यह भी लगाया जा रहा है कि कार्रवाई के दौरान भारी पुलिस बल की मौजूदगी में बिना बातचीत के ही मकानों पर बुलडोजर चला दिए गए। कई लोगों ने दावा किया है कि उनके पास संपत्तियों की वैध रजिस्ट्री और पुराने दस्तावेज मौजूद हैं, इसके बावजूद निर्माण गिरा दिए गए। कुछ स्थानों पर जहां केवल दस फीट तक निर्माण हटाने की बात कही गई थी, वहां कथित तौर पर बीस फीट तक मकान तोड़ दिए गए, जिससे नुकसान और बढ़ गया। बियाबानी, गणेशगंज, खजूरी बाजार और शीतला माता बाजार जैसे पुराने और घने बसे इलाके पहले ही विकास परियोजनाओं की वजह से प्रभावित हो चुके हैं, और अब छावनी क्षेत्र की यह कार्रवाई लोगों में डर और असंतोष पैदा कर रही है। स्थानीय व्यापारी वर्ग का कहना है कि लगातार हो रही तोड़फोड़ से उनका रोजगार भी प्रभावित हो रहा है और बाजारों की रौनक खत्म होती जा रही है। कई लोग इसे शहर के पुराने स्वरूप को खत्म करने जैसा कदम बता रहे हैं। कई प्रभावित परिवारों का यह भी कहना है कि उन्हें मुआवजे की प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। इस मुद्दे पर प्रशासनिक स्तर पर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं।
पार्टी ने इस पूरे मामले को लेकर कई मांगें रखी हैं जिनमें एफएआर और टीडीआर जैसे प्रावधानों को समाप्त करने की मांग प्रमुख है। साथ ही यह भी कहा गया है कि जिन लोगों के पुश्तैनी मकान या रजिस्ट्री आधारित संपत्तियां प्रभावित हुई हैं उन्हें बाजार मूल्य से कम से कम दोगुना मुआवजा दिया जाना चाहिए। पार्टी का कहना है कि सरकार की मनमानी और दमनात्मक कार्रवाई पर रोक लगनी चाहिए और किसी भी विकास योजना को लागू करने से पहले स्थानीय लोगों की सहमति अनिवार्य होनी चाहिए। इसके अलावा शहर में हरियाली, स्वच्छ हवा और जल संरक्षण जैसे मुद्दों को प्राथमिकता देने की भी बात कही गई है। छोटे व्यापारियों, ठेले और फेरी वालों के रोजगार को सुरक्षित रखने की मांग भी उठाई गई है, क्योंकि लगातार कार्रवाई से उनकी आजीविका पर असर पड़ रहा है। इसी के साथ यह भी कहा गया है कि बस स्टैंड, आरटीओ और न्यायालय जैसी जनसुविधाओं को शहर के भीतर ही सुचारू रूप से संचालित किया जाए ताकि आम नागरिकों को परेशानी न हो।
