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महिला आरक्षण कानून: लोकतंत्र में महिलाओं की निर्णायक भागीदारी का नया दौर — माया नारोलिया
Opinion
देश की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में महिला आरक्षण कानून एक ऐतिहासिक पहल के रूप में सामने आया है। राज्यसभा सांसद Maya Narolia ने इसे भारत के लोकतंत्र को अधिक समावेशी और संतुलित बनाने वाला महत्वपूर्ण कदम बताया है।
उन्होंने कहा कि जब तक देश की आधी आबादी को निर्णय प्रक्रिया में बराबरी का अवसर नहीं मिलेगा, तब तक समग्र विकास की कल्पना अधूरी रहेगी। महिला आरक्षण कानून इसी कमी को दूर करने की दिशा में एक ठोस प्रयास है, जो महिलाओं को नीति निर्माण में सक्रिय भागीदारी का अवसर प्रदान करेगा।
सांसद नारोलिया के अनुसार, इस कानून के पीछे प्रधानमंत्री Narendra Modi का स्पष्ट विज़न और मजबूत नेतृत्व रहा है। केंद्र सरकार ने बीते वर्षों में महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए कई योजनाएं लागू की हैं, जिससे उनकी आर्थिक और सामाजिक स्थिति में सुधार हुआ है। यह कानून उसी व्यापक सोच का विस्तार है।
उन्होंने कहा कि संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण सुनिश्चित होने से राजनीतिक निर्णयों में उनकी भागीदारी बढ़ेगी। इससे नीतियों में सामाजिक संवेदनशीलता और व्यापक दृष्टिकोण का समावेश होगा, जो समाज के हर वर्ग के हित में होगा।
माया नारोलिया ने यह भी कहा कि महिला सशक्तिकरण का अर्थ केवल अधिकार देना नहीं, बल्कि उन्हें नेतृत्व की भूमिका में आगे बढ़ाना है। महिलाओं की भागीदारी से शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर अधिक प्रभावी और संतुलित निर्णय लिए जा सकेंगे।
उन्होंने इस कानून को देश के विकास के लिए भी महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि जब महिलाओं को समान अवसर मिलता है, तो आर्थिक और सामाजिक प्रगति की गति तेज होती है। यह पहल ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की महिलाओं को आगे बढ़ने और नेतृत्व करने के लिए प्रेरित करेगी।
अंत में उन्होंने कहा कि यह कानून केवल एक विधायी बदलाव नहीं, बल्कि सामाजिक सोच में परिवर्तन की शुरुआत है। यह आने वाली पीढ़ियों के लिए समान अवसर और सशक्त समाज की नींव रखेगा।
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महिला आरक्षण कानून: लोकतंत्र में महिलाओं की निर्णायक भागीदारी का नया दौर — माया नारोलिया
Opinion
उन्होंने कहा कि जब तक देश की आधी आबादी को निर्णय प्रक्रिया में बराबरी का अवसर नहीं मिलेगा, तब तक समग्र विकास की कल्पना अधूरी रहेगी। महिला आरक्षण कानून इसी कमी को दूर करने की दिशा में एक ठोस प्रयास है, जो महिलाओं को नीति निर्माण में सक्रिय भागीदारी का अवसर प्रदान करेगा।
सांसद नारोलिया के अनुसार, इस कानून के पीछे प्रधानमंत्री Narendra Modi का स्पष्ट विज़न और मजबूत नेतृत्व रहा है। केंद्र सरकार ने बीते वर्षों में महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए कई योजनाएं लागू की हैं, जिससे उनकी आर्थिक और सामाजिक स्थिति में सुधार हुआ है। यह कानून उसी व्यापक सोच का विस्तार है।
उन्होंने कहा कि संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण सुनिश्चित होने से राजनीतिक निर्णयों में उनकी भागीदारी बढ़ेगी। इससे नीतियों में सामाजिक संवेदनशीलता और व्यापक दृष्टिकोण का समावेश होगा, जो समाज के हर वर्ग के हित में होगा।
माया नारोलिया ने यह भी कहा कि महिला सशक्तिकरण का अर्थ केवल अधिकार देना नहीं, बल्कि उन्हें नेतृत्व की भूमिका में आगे बढ़ाना है। महिलाओं की भागीदारी से शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर अधिक प्रभावी और संतुलित निर्णय लिए जा सकेंगे।
उन्होंने इस कानून को देश के विकास के लिए भी महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि जब महिलाओं को समान अवसर मिलता है, तो आर्थिक और सामाजिक प्रगति की गति तेज होती है। यह पहल ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की महिलाओं को आगे बढ़ने और नेतृत्व करने के लिए प्रेरित करेगी।
अंत में उन्होंने कहा कि यह कानून केवल एक विधायी बदलाव नहीं, बल्कि सामाजिक सोच में परिवर्तन की शुरुआत है। यह आने वाली पीढ़ियों के लिए समान अवसर और सशक्त समाज की नींव रखेगा।
