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जन्माष्टमी 2026: दुर्लभ ग्रहीय संयोग से बन रहा 'द्वापर युग' जैसा अलौकिक योग
Digital Desk
4 सितंबर को जन्माष्टमी 2026 पर द्वापर युग जैसा दुर्लभ ग्रहीय संयोग बन रहा है। जानें इसका ज्योतिषीय महत्व, शुभ मुहूर्त और सभी राशियों के लिए भविष्यवाणियां।
4 सितंबर 2026 को बनने वाली खगोलीय स्थिति एक दुर्लभ अलौकिक योग का निर्माण कर रही है। ज्योतिषियों का मानना है कि यह योग द्वापर युग की परिस्थितियों को दर्शाता है, जब 5,000 से भी अधिक वर्ष पूर्व भगवान श्री कृष्ण ने जन्म लिया था।
4 सितंबर को मनाई जाएगी जन्माष्टमी 2026
कृष्ण जन्माष्टमी 2026 भारत के अधिकांश हिस्सों में शुक्रवार, 4 सितंबर को मनाई जाएगी। यह त्योहार भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को पड़ता है। पंचांग की गणना के अनुसार, अष्टमी तिथि 4 सितंबर को तड़के लगभग 2:25 बजे शुरू होगी और 5 सितंबर को मध्यरात्रि 12:13 बजे समाप्त होगी।
रोहिणी नक्षत्र और दुर्लभ योग का निर्माण
इस जन्माष्टमी को जो बात अत्यंत खास बनाती है, वह है द्वापर युग की याद दिलाने वाली ग्रहों की स्थिति। 27 नक्षत्रों में सबसे शुभ माना जाने वाला रोहिणी नक्षत्र 4 सितंबर को रात 12:29 बजे (3 सितंबर की देर रात) शुरू होगा और रात लगभग 11:04 बजे तक रहेगा। ज्योतिषाचार्य अजय तेलंग ने पुष्टि की है कि वही नक्षत्र और योग संयोजन बन रहे हैं जो 5,000 साल पहले बने थे।
सूर्योदय के समय ग्रहों की स्थिति
4 सितंबर 2026 को सूर्योदय के समय ग्रहों की स्थिति एक अनूठा योग दर्शाती है:
सूर्य: सिंह राशि में (17.3 डिग्री)
चंद्रमा: वृषभ राशि में (13.3 डिग्री)
मंगल: वृषभ राशि में (6.6 डिग्री)
बुध: सिंह राशि में (18.1 डिग्री)
गुरु (बृहस्पति): कर्क राशि में (9.6 डिग्री)
शुक्र: मकर राशि में (16.6 डिग्री)
शनि: मीन राशि में (21.4 डिग्री)
जन्माष्टमी पूजा का शुभ मुहूर्त
जन्माष्टमी पूजन का सबसे महत्वपूर्ण समय 'निशिता काल' होता है, जो भगवान कृष्ण के जन्म से जुड़ी मध्यरात्रि की पवित्र अवधि है। दिल्ली के लिए निशिता पूजा मुहूर्त 4 सितंबर की रात लगभग 11:55 बजे से 12:45 बजे (5 सितंबर) तक रहेगा। दिन का सबसे शुभ समय 'अभिजीत मुहूर्त' दोपहर 11:55 बजे से 12:45 बजे के बीच रहेगा।
ज्योतिषीय महत्व और भविष्यवाणियां
वैदिक ज्योतिष के अनुसार, अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में जन्म लेने वाले बच्चे अत्यधिक भाग्यशाली होंगे और उनमें भगवान कृष्ण के समान ही सोलह दिव्य गुण विद्यमान होंगे। दोपहर 3:44 बजे तक सक्रिय रहने वाला 'हर्षण योग' इस दिन की शुभता को और बढ़ाता है।
श्रद्धालुओं को सलाह दी जाती है कि वे सुबह 10:45 बजे से दोपहर 12:20 बजे के बीच 'राहुकाल' के दौरान कोई भी नया कार्य शुरू करने से बचें। आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए दिन के दौरान लाभ और अमृत चौघड़िया मुहूर्त सबसे अनुकूल रहेंगे।
ग्रहों का यह दुर्लभ योग आध्यात्मिक उन्नति और ईश्वर से जुड़ाव का एक अद्भुत अवसर प्रदान करता है। जैसा कि ज्योतिषियों का कहना है, ऐसे खगोलीय संयोग अत्यंत दुर्लभ हैं, जो जन्माष्टमी 2026 को पूरे भारत के भक्तों के लिए एक विशेष अवसर बनाते हैं।
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