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महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती के साथ हुए बाबा महाकाल के दिव्य शृंगार, भक्तों ने किए अलौकिक दर्शन
धर्म डेस्क
उज्जैन के श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में शुक्रवार तड़के भस्म आरती के बाद बाबा महाकाल का मनमोहक शृंगार किया गया। देशभर से पहुंचे श्रद्धालुओं ने 'कण-कण में महादेव' के जयघोष के बीच दर्शन किए
उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में शुक्रवार 17 जुलाई 2026 की सुबह प्रतिदिन की तरह ब्रह्ममुहूर्त में होने वाली भस्म आरती के बाद बाबा महाकाल का अत्यंत आकर्षक और दिव्य शृंगार किया गया। सुबह से ही मंदिर परिसर शिवभक्ति में सराबोर नजर आया। गर्भगृह में वैदिक मंत्रों का उच्चारण, शंखनाद, घंटियों की मधुर ध्वनि और डमरू की गूंज के बीच भगवान महाकाल की विशेष पूजा-अर्चना संपन्न हुई। आरती के बाद जब बाबा महाकाल का अलौकिक स्वरूप श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोला गया तो पूरा मंदिर परिसर "हर-हर महादेव" और "जय श्री महाकाल" के जयघोष से गूंज उठा।
आज के विशेष शृंगार में भगवान महाकाल को रजत मुकुट, पारंपरिक आभूषण, रंग-बिरंगी पुष्पमालाओं, मोरपंख और सुगंधित फूलों से सजाया गया। शिवलिंग पर आकर्षक त्रिपुंड, चंद्रमा का चिह्न, तिलक और विभिन्न धार्मिक प्रतीकों का अलंकरण किया गया। बाबा महाकाल के मुखारविंद को विशेष रूप से सजाया गया, जिससे उनका स्वरूप अत्यंत मनोहारी दिखाई दे रहा था। मोरपंखों से की गई सजावट ने पूरे शृंगार को और अधिक भव्य बना दिया। श्रद्धालु गर्भगृह में पहुंचकर इस दिव्य स्वरूप के दर्शन कर स्वयं को धन्य महसूस करते रहे।
महाकाल मंदिर की भस्म आरती विश्वभर में अपनी विशिष्ट परंपरा के लिए प्रसिद्ध है। यह आरती प्रतिदिन सूर्योदय से पहले ब्रह्ममुहूर्त में संपन्न होती है। सबसे पहले भगवान महाकाल का पंचामृत से अभिषेक किया जाता है। इसके बाद जल, दूध, दही, घी, शहद और अन्य पूजन सामग्री से विधिवत स्नान कराया जाता है। फिर वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार पवित्र भस्म अर्पित की जाती है। भस्म आरती के बाद भगवान का विशेष शृंगार किया जाता है, जिसमें ऋतु, पर्व और विशेष अवसरों के अनुसार अलग-अलग प्रकार की सजावट की जाती है।
आज की आरती में मंदिर के पुजारियों ने परंपरा के अनुसार सभी धार्मिक विधियों का पालन किया। आरती के दौरान वेद मंत्रों के साथ भगवान शिव का अभिषेक और पूजन किया गया। इसके पश्चात दीप, धूप, नैवेद्य और आरती के साथ पूजा संपन्न हुई। गर्भगृह में उपस्थित श्रद्धालु पूरे समय शिव मंत्रों का जाप करते रहे। धार्मिक वातावरण और आध्यात्मिक ऊर्जा का ऐसा संगम देखने को मिला जिसने हर श्रद्धालु को भावविभोर कर दिया।
श्रावण मास की शुरुआत से पहले ही महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ने लगी है। मध्य प्रदेश के अलावा राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में भक्त उज्जैन पहुंचे। कई श्रद्धालु रात में ही मंदिर पहुंच गए थे ताकि उन्हें सुबह होने वाली भस्म आरती के दर्शन का अवसर मिल सके। मंदिर परिसर के बाहर सुबह से ही लंबी कतारें लगी रहीं। दर्शन के लिए आए श्रद्धालुओं में युवाओं, बुजुर्गों और महिलाओं की बड़ी संख्या देखने को मिली।
मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए व्यापक इंतजाम किए। प्रवेश और निकास मार्गों पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रखी गई। दर्शन के लिए अलग-अलग कतारों की व्यवस्था की गई ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके। मंदिर परिसर में पेयजल, चिकित्सा सहायता और अन्य आवश्यक सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गईं। सुरक्षा कर्मी और स्वयंसेवक लगातार श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन करते रहे।
महाकालेश्वर मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में विशेष स्थान रखता है। इसे एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि यहां दर्शन और पूजा करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। भस्म आरती का महत्व भी अन्य मंदिरों की आरतियों से अलग माना जाता है। यह आरती जीवन की नश्वरता और शिव के वैराग्य स्वरूप का प्रतीक मानी जाती है। इसी कारण देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी श्रद्धालु इस अनूठी परंपरा को देखने के लिए उज्जैन पहुंचते हैं।
धार्मिक विद्वानों के अनुसार बाबा महाकाल का भस्म शृंगार व्यक्ति को यह संदेश देता है कि संसार की सभी भौतिक वस्तुएं नश्वर हैं और अंततः हर जीव को परमात्मा की शरण में ही जाना है। भगवान शिव का यह स्वरूप त्याग, वैराग्य और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक माना जाता है। इसी कारण भस्म आरती को केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि आध्यात्मिक साधना का भी महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है।
आज के दिव्य शृंगार में शिवलिंग पर आकर्षक नेत्र, चंद्र, त्रिपुंड और अन्य पारंपरिक अलंकरण श्रद्धालुओं का विशेष आकर्षण बने रहे। मोरपंखों से सुसज्जित स्वरूप ने बाबा महाकाल की छवि को और अधिक भव्य बना दिया। गर्भगृह में फूलों की सुगंध, दीपों की रोशनी और मंत्रोच्चार का वातावरण श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति करा रहा था। कई श्रद्धालु दर्शन के बाद मंदिर परिसर में बैठकर भगवान शिव का ध्यान और मंत्र जाप करते नजर आए।
भस्म आरती के बाद पूरे दिन भगवान महाकाल के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का सिलसिला जारी रहा। मंदिर परिसर के बाहर प्रसाद, पूजन सामग्री और धार्मिक वस्तुओं की दुकानों पर भी अच्छी चहल-पहल देखने को मिली। उज्जैन आने वाले श्रद्धालु महाकाल दर्शन के साथ हरसिद्धि मंदिर, कालभैरव मंदिर, मंगलनाथ मंदिर और रामघाट भी पहुंच रहे हैं। धार्मिक पर्यटन के लिहाज से भी शहर में इन दिनों विशेष रौनक देखने को मिल रही है।
बाबा महाकाल के आज के दिव्य शृंगार की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहे हैं। श्रद्धालु "कण-कण में महादेव", "जय श्री महाकाल" और "हर-हर महादेव" लिखकर अपने अनुभव साझा कर रहे हैं। भक्ति और आस्था से भरे इस वातावरण में महाकाल मंदिर एक बार फिर देशभर के शिव भक्तों की श्रद्धा का प्रमुख केंद्र बना रहा।
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महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती के साथ हुए बाबा महाकाल के दिव्य शृंगार, भक्तों ने किए अलौकिक दर्शन
धर्म डेस्क
उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में शुक्रवार 17 जुलाई 2026 की सुबह प्रतिदिन की तरह ब्रह्ममुहूर्त में होने वाली भस्म आरती के बाद बाबा महाकाल का अत्यंत आकर्षक और दिव्य शृंगार किया गया। सुबह से ही मंदिर परिसर शिवभक्ति में सराबोर नजर आया। गर्भगृह में वैदिक मंत्रों का उच्चारण, शंखनाद, घंटियों की मधुर ध्वनि और डमरू की गूंज के बीच भगवान महाकाल की विशेष पूजा-अर्चना संपन्न हुई। आरती के बाद जब बाबा महाकाल का अलौकिक स्वरूप श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोला गया तो पूरा मंदिर परिसर "हर-हर महादेव" और "जय श्री महाकाल" के जयघोष से गूंज उठा।
आज के विशेष शृंगार में भगवान महाकाल को रजत मुकुट, पारंपरिक आभूषण, रंग-बिरंगी पुष्पमालाओं, मोरपंख और सुगंधित फूलों से सजाया गया। शिवलिंग पर आकर्षक त्रिपुंड, चंद्रमा का चिह्न, तिलक और विभिन्न धार्मिक प्रतीकों का अलंकरण किया गया। बाबा महाकाल के मुखारविंद को विशेष रूप से सजाया गया, जिससे उनका स्वरूप अत्यंत मनोहारी दिखाई दे रहा था। मोरपंखों से की गई सजावट ने पूरे शृंगार को और अधिक भव्य बना दिया। श्रद्धालु गर्भगृह में पहुंचकर इस दिव्य स्वरूप के दर्शन कर स्वयं को धन्य महसूस करते रहे।
महाकाल मंदिर की भस्म आरती विश्वभर में अपनी विशिष्ट परंपरा के लिए प्रसिद्ध है। यह आरती प्रतिदिन सूर्योदय से पहले ब्रह्ममुहूर्त में संपन्न होती है। सबसे पहले भगवान महाकाल का पंचामृत से अभिषेक किया जाता है। इसके बाद जल, दूध, दही, घी, शहद और अन्य पूजन सामग्री से विधिवत स्नान कराया जाता है। फिर वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार पवित्र भस्म अर्पित की जाती है। भस्म आरती के बाद भगवान का विशेष शृंगार किया जाता है, जिसमें ऋतु, पर्व और विशेष अवसरों के अनुसार अलग-अलग प्रकार की सजावट की जाती है।
आज की आरती में मंदिर के पुजारियों ने परंपरा के अनुसार सभी धार्मिक विधियों का पालन किया। आरती के दौरान वेद मंत्रों के साथ भगवान शिव का अभिषेक और पूजन किया गया। इसके पश्चात दीप, धूप, नैवेद्य और आरती के साथ पूजा संपन्न हुई। गर्भगृह में उपस्थित श्रद्धालु पूरे समय शिव मंत्रों का जाप करते रहे। धार्मिक वातावरण और आध्यात्मिक ऊर्जा का ऐसा संगम देखने को मिला जिसने हर श्रद्धालु को भावविभोर कर दिया।
श्रावण मास की शुरुआत से पहले ही महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ने लगी है। मध्य प्रदेश के अलावा राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में भक्त उज्जैन पहुंचे। कई श्रद्धालु रात में ही मंदिर पहुंच गए थे ताकि उन्हें सुबह होने वाली भस्म आरती के दर्शन का अवसर मिल सके। मंदिर परिसर के बाहर सुबह से ही लंबी कतारें लगी रहीं। दर्शन के लिए आए श्रद्धालुओं में युवाओं, बुजुर्गों और महिलाओं की बड़ी संख्या देखने को मिली।
मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए व्यापक इंतजाम किए। प्रवेश और निकास मार्गों पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रखी गई। दर्शन के लिए अलग-अलग कतारों की व्यवस्था की गई ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके। मंदिर परिसर में पेयजल, चिकित्सा सहायता और अन्य आवश्यक सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गईं। सुरक्षा कर्मी और स्वयंसेवक लगातार श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन करते रहे।
महाकालेश्वर मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में विशेष स्थान रखता है। इसे एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि यहां दर्शन और पूजा करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। भस्म आरती का महत्व भी अन्य मंदिरों की आरतियों से अलग माना जाता है। यह आरती जीवन की नश्वरता और शिव के वैराग्य स्वरूप का प्रतीक मानी जाती है। इसी कारण देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी श्रद्धालु इस अनूठी परंपरा को देखने के लिए उज्जैन पहुंचते हैं।
धार्मिक विद्वानों के अनुसार बाबा महाकाल का भस्म शृंगार व्यक्ति को यह संदेश देता है कि संसार की सभी भौतिक वस्तुएं नश्वर हैं और अंततः हर जीव को परमात्मा की शरण में ही जाना है। भगवान शिव का यह स्वरूप त्याग, वैराग्य और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक माना जाता है। इसी कारण भस्म आरती को केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि आध्यात्मिक साधना का भी महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है।
आज के दिव्य शृंगार में शिवलिंग पर आकर्षक नेत्र, चंद्र, त्रिपुंड और अन्य पारंपरिक अलंकरण श्रद्धालुओं का विशेष आकर्षण बने रहे। मोरपंखों से सुसज्जित स्वरूप ने बाबा महाकाल की छवि को और अधिक भव्य बना दिया। गर्भगृह में फूलों की सुगंध, दीपों की रोशनी और मंत्रोच्चार का वातावरण श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति करा रहा था। कई श्रद्धालु दर्शन के बाद मंदिर परिसर में बैठकर भगवान शिव का ध्यान और मंत्र जाप करते नजर आए।
भस्म आरती के बाद पूरे दिन भगवान महाकाल के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का सिलसिला जारी रहा। मंदिर परिसर के बाहर प्रसाद, पूजन सामग्री और धार्मिक वस्तुओं की दुकानों पर भी अच्छी चहल-पहल देखने को मिली। उज्जैन आने वाले श्रद्धालु महाकाल दर्शन के साथ हरसिद्धि मंदिर, कालभैरव मंदिर, मंगलनाथ मंदिर और रामघाट भी पहुंच रहे हैं। धार्मिक पर्यटन के लिहाज से भी शहर में इन दिनों विशेष रौनक देखने को मिल रही है।
बाबा महाकाल के आज के दिव्य शृंगार की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहे हैं। श्रद्धालु "कण-कण में महादेव", "जय श्री महाकाल" और "हर-हर महादेव" लिखकर अपने अनुभव साझा कर रहे हैं। भक्ति और आस्था से भरे इस वातावरण में महाकाल मंदिर एक बार फिर देशभर के शिव भक्तों की श्रद्धा का प्रमुख केंद्र बना रहा।
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