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फाल्गुन अमावस्या 2026: जानें स्नान-दान का शुभ मुहूर्त और महत्व
धर्म डेस्क
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अमावस्या पर किया गया स्नान और दान पाप निवारण और आत्मिक शांति का प्रतीक है
फाल्गुन अमावस्या है, जिसे हिन्दू धर्म में विशेष धार्मिक महत्व प्राप्त है। यह दिन पितृ तर्पण और दान-पुण्य का सर्वोत्तम अवसर माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन किया गया स्नान और दान पितरों की आत्मा को शांति और जीवन में समृद्धि लाने में मदद करता है।
पंडितों और ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, फाल्गुन अमावस्या पर स्नान-दान का शुभ मुहूर्त सुबह 7:30 से 10:15 बजे तक है। इस दौरान श्रद्धालुओं द्वारा गंगा, यमुना और अन्य पवित्र नदियों में पितृ तर्पण करने की परंपरा है। इसका उद्देश्य पूर्वजों की आत्मा की शांति, पुण्य लाभ और जीवन में समृद्धि प्राप्त करना है।
हिंदू शास्त्रों में स्नान-दान को अत्यंत महत्त्वपूर्ण बताया गया है। इस दिन विशेष रूप से दूध, धान, वस्त्र और अन्य आवश्यक सामग्री का दान करने की सलाह दी जाती है। पुरोहितों का कहना है कि ऐसा करने से पितृ प्रसन्न होते हैं और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
धार्मिक स्थलों और नदियों के किनारे भक्तजन सुबह-सुबह जुटेंगे, जहां वे पितरों की स्मृति में तर्पण करेंगे। इस अवसर पर विभिन्न मंदिर और आश्रम भी विशेष पूजा आयोजन कर रहे हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि स्नान से न केवल शारीरिक स्वच्छता होती है, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक शांति भी मिलती है।
फाल्गुन अमावस्या का महत्व केवल पितृ तर्पण तक सीमित नहीं है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन किया गया दान गरीबों, छात्रों और जरूरतमंदों के लिए भी किया जा सकता है। अन्न, वस्त्र और शिक्षा से जुड़ा दान विशेष रूप से शुभ माना जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि व्यक्ति अमावस्या पर नदियों या पवित्र जल स्रोतों के किनारे स्नान कर दान करता है, तो उसका जीवन धन, सुख और आरोग्य से संपन्न होता है। इसके अलावा, यह दिन आत्मनिरीक्षण, आत्मशुद्धि और पुण्य कमाने का भी प्रतीक है।
इस बार की फाल्गुन अमावस्या, सूर्य और चंद्रमा की विशेष स्थिति के कारण और भी अधिक शुभ मानी जा रही है। धार्मिक विद्वानों के अनुसार, इस दिन किए गए तर्पण और दान के प्रभाव साल भर महसूस किए जा सकते हैं।
शास्त्रों में कहा गया है कि अमावस्या का महत्व व्यक्ति को जीवन में नैतिकता, सहानुभूति और दानशीलता का पाठ भी पढ़ाता है। इस दिन की गई धार्मिक क्रियाओं से न केवल परिवार को लाभ मिलता है, बल्कि समाज में भी सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
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