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नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी को लगाएं शहद और पीले भोग, दूर होंगे सभी कष्ट”
धर्म डेस्क
छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा और आराधना का महत्व
चैत्र नवरात्रि के छठे दिन भक्त श्रद्धा और विधि-विधान के साथ मां कात्यायनी की पूजा-अर्चना करते हैं। इस दिन देवी का स्वरूप बेहद दिव्य और भव्य माना जाता है। चार भुजाओं और सिंह पर सवार मां कात्यायनी का दर्शन करने से भक्तों को सुख-समृद्धि प्राप्त होती है और रोग-दोष का नाश होता है।
धार्मिक शास्त्रों के अनुसार, छठे दिन मां कात्यायनी को शहद का भोग अर्पित करना अत्यंत फलदायी माना गया है। शहद शुद्धता, मिठास और ऊर्जा का प्रतीक है। भक्त शुद्ध शहद को चांदी या तांबे की कटोरी में रखकर पूजा के समय मां के समक्ष अर्पित करते हैं। इसके बाद इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण कर परिवार में वितरित किया जाता है।
मां कात्यायनी को पीले रंग की चीजें भी अत्यंत प्रिय हैं। इस दिन आम, केला, बेसन के लड्डू या केसरिया हलवे का भोग अर्पित करने से विवाह में अड़चनें दूर होती हैं और देवी की कृपा प्राप्त होती है। पूजा के समय मंत्र “चंद्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना। कात्यायनी शुभं दद्याद् देवी दानवघातिनी॥” का जाप करना शुभ माना जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि मां कात्यायनी की विधिपूर्वक पूजा करने से भक्त की चारों प्रकार की फलप्राप्ति — अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष — होती है। साथ ही मानसिक शांति, स्वास्थ्य लाभ और पारिवारिक सुख-समृद्धि का संचार होता है। भक्तों ने उपवास रखकर और दुर्गा सप्तशती का पाठ करके देवी को प्रसन्न किया।
छठे दिन की पूजा केवल भोग अर्पित करने तक सीमित नहीं है। श्रद्धालु देवी के लिए पारिवारिक प्रसाद वितरण करते हैं, मंदिरों में भजन-कीर्तन करते हैं और परिवार में सामाजिक और धार्मिक सामंजस्य बनाए रखते हैं। कई स्थानों पर माता के जागरण का आयोजन भी किया जाता है, जिससे भक्त आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव करते हैं।
आध्यात्मिक विद्वानों के अनुसार, छठे दिन की पूजा से रोग, शोक, भय और पाप नष्ट होते हैं। साथ ही देवी कात्यायनी की कृपा से विवाह, शिक्षा और व्यवसाय में सफलता प्राप्त होती है। इस दिन की विधिपूर्वक पूजा और भोग अर्पित करने से भक्त का व्यक्तित्व आकर्षक बनता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
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नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी को लगाएं शहद और पीले भोग, दूर होंगे सभी कष्ट”
धर्म डेस्क
चैत्र नवरात्रि के छठे दिन भक्त श्रद्धा और विधि-विधान के साथ मां कात्यायनी की पूजा-अर्चना करते हैं। इस दिन देवी का स्वरूप बेहद दिव्य और भव्य माना जाता है। चार भुजाओं और सिंह पर सवार मां कात्यायनी का दर्शन करने से भक्तों को सुख-समृद्धि प्राप्त होती है और रोग-दोष का नाश होता है।
धार्मिक शास्त्रों के अनुसार, छठे दिन मां कात्यायनी को शहद का भोग अर्पित करना अत्यंत फलदायी माना गया है। शहद शुद्धता, मिठास और ऊर्जा का प्रतीक है। भक्त शुद्ध शहद को चांदी या तांबे की कटोरी में रखकर पूजा के समय मां के समक्ष अर्पित करते हैं। इसके बाद इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण कर परिवार में वितरित किया जाता है।
मां कात्यायनी को पीले रंग की चीजें भी अत्यंत प्रिय हैं। इस दिन आम, केला, बेसन के लड्डू या केसरिया हलवे का भोग अर्पित करने से विवाह में अड़चनें दूर होती हैं और देवी की कृपा प्राप्त होती है। पूजा के समय मंत्र “चंद्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना। कात्यायनी शुभं दद्याद् देवी दानवघातिनी॥” का जाप करना शुभ माना जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि मां कात्यायनी की विधिपूर्वक पूजा करने से भक्त की चारों प्रकार की फलप्राप्ति — अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष — होती है। साथ ही मानसिक शांति, स्वास्थ्य लाभ और पारिवारिक सुख-समृद्धि का संचार होता है। भक्तों ने उपवास रखकर और दुर्गा सप्तशती का पाठ करके देवी को प्रसन्न किया।
छठे दिन की पूजा केवल भोग अर्पित करने तक सीमित नहीं है। श्रद्धालु देवी के लिए पारिवारिक प्रसाद वितरण करते हैं, मंदिरों में भजन-कीर्तन करते हैं और परिवार में सामाजिक और धार्मिक सामंजस्य बनाए रखते हैं। कई स्थानों पर माता के जागरण का आयोजन भी किया जाता है, जिससे भक्त आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव करते हैं।
आध्यात्मिक विद्वानों के अनुसार, छठे दिन की पूजा से रोग, शोक, भय और पाप नष्ट होते हैं। साथ ही देवी कात्यायनी की कृपा से विवाह, शिक्षा और व्यवसाय में सफलता प्राप्त होती है। इस दिन की विधिपूर्वक पूजा और भोग अर्पित करने से भक्त का व्यक्तित्व आकर्षक बनता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
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