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सेंसेक्स 1837 अंक टूटा, निफ्टी 600 से ज्यादा गिरा; वैश्विक तनाव से बाजार धड़ाम
बिजनेस न्यूज
ईरान-इजराइल तनाव, महंगे क्रूड और विदेशी निवेशकों की बिकवाली से भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट, निवेशकों को भारी नुकसान
भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को भारी गिरावट दर्ज की गई, जहां सेंसेक्स 1,837 अंक (2.46%) टूटकर 72,696 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 602 अंक (2.60%) गिरकर 22,513 के स्तर पर पहुंच गया। बाजार में यह गिरावट वैश्विक आर्थिक दबाव, बढ़ते कच्चे तेल के दाम और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के चलते आई।
आज के कारोबार में बैंकिंग, ऑटो, मेटल और FMCG सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट देखी गई। बाजार खुलने के साथ ही बिकवाली का दबाव बना रहा, जो दिनभर जारी रहा।
क्यों गिरा बाजार
विश्लेषकों के मुताबिक, बाजार में गिरावट की तीन प्रमुख वजहें रहीं।
पहली, अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव से वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हुई है।
दूसरी, कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर 113 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं, जिससे महंगाई और लागत का दबाव बढ़ा है।
तीसरी, अमेरिकी और एशियाई बाजारों में आई गिरावट का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा।
एशियाई बाजारों में भी तेज गिरावट दर्ज की गई। जापान का निक्केई इंडेक्स 3.48% गिरा, जबकि साउथ कोरिया का कोस्पी 6.49% टूट गया। हांगकांग का हैंगसेंग और चीन का शंघाई कंपोजिट भी 3% से ज्यादा गिरावट के साथ बंद हुए।
वहीं, 20 मार्च को अमेरिकी बाजारों में भी कमजोरी रही, जहां डाउ जोन्स, नैस्डैक और S&P 500 सभी लाल निशान में बंद हुए।
बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर मुद्रा बाजार पर भी पड़ा। भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 48 पैसे गिरकर 94.01 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ।
इसके अलावा, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने 20 मार्च को ₹5,518 करोड़ की बिकवाली की। मार्च महीने में अब तक FIIs ₹86,780 करोड़ निकाल चुके हैं, जबकि घरेलू निवेशकों (DIIs) ने ₹1 लाख करोड़ से अधिक की खरीदारी कर बाजार को संभालने की कोशिश की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। निवेशकों को फिलहाल सतर्क रहने और दीर्घकालिक रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है।
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सेंसेक्स 1837 अंक टूटा, निफ्टी 600 से ज्यादा गिरा; वैश्विक तनाव से बाजार धड़ाम
बिजनेस न्यूज
भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को भारी गिरावट दर्ज की गई, जहां सेंसेक्स 1,837 अंक (2.46%) टूटकर 72,696 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 602 अंक (2.60%) गिरकर 22,513 के स्तर पर पहुंच गया। बाजार में यह गिरावट वैश्विक आर्थिक दबाव, बढ़ते कच्चे तेल के दाम और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के चलते आई।
आज के कारोबार में बैंकिंग, ऑटो, मेटल और FMCG सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट देखी गई। बाजार खुलने के साथ ही बिकवाली का दबाव बना रहा, जो दिनभर जारी रहा।
क्यों गिरा बाजार
विश्लेषकों के मुताबिक, बाजार में गिरावट की तीन प्रमुख वजहें रहीं।
पहली, अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव से वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हुई है।
दूसरी, कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर 113 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं, जिससे महंगाई और लागत का दबाव बढ़ा है।
तीसरी, अमेरिकी और एशियाई बाजारों में आई गिरावट का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा।
एशियाई बाजारों में भी तेज गिरावट दर्ज की गई। जापान का निक्केई इंडेक्स 3.48% गिरा, जबकि साउथ कोरिया का कोस्पी 6.49% टूट गया। हांगकांग का हैंगसेंग और चीन का शंघाई कंपोजिट भी 3% से ज्यादा गिरावट के साथ बंद हुए।
वहीं, 20 मार्च को अमेरिकी बाजारों में भी कमजोरी रही, जहां डाउ जोन्स, नैस्डैक और S&P 500 सभी लाल निशान में बंद हुए।
बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर मुद्रा बाजार पर भी पड़ा। भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 48 पैसे गिरकर 94.01 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ।
इसके अलावा, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने 20 मार्च को ₹5,518 करोड़ की बिकवाली की। मार्च महीने में अब तक FIIs ₹86,780 करोड़ निकाल चुके हैं, जबकि घरेलू निवेशकों (DIIs) ने ₹1 लाख करोड़ से अधिक की खरीदारी कर बाजार को संभालने की कोशिश की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। निवेशकों को फिलहाल सतर्क रहने और दीर्घकालिक रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है।
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